दुनिया की खबरें: होर्मुज को लेकर अमेरिका-ईरान में तनातनी बढ़ी, दुनिया भर में ठप हो सकती है कच्चे तेल की सप्लाई

इस हमले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक स्तर पर कभी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के लगभग पांचवें हिस्से की आवाजाही वाले इस समुद्री मार्ग का मुद्दा ही दोनों देशों के बीच वार्ता का सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।

फोटोः IANS
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पश्चिम एशिया में सप्ताहांत में हुए हमलों के बाद सोमवार को अमेरिका और ईरान ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उनका नियंत्रण है। इस घटनाक्रम ने युद्ध समाप्त करने के लिए जारी कूटनीतिक कोशिशों पर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

तनाव उस समय और बढ़ गया जब रविवार को ईरान ने ओमान के तट के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया। इस हमले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक स्तर पर कभी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के लगभग पांचवें हिस्से की आवाजाही वाले इस समुद्री मार्ग का मुद्दा ही दोनों देशों के बीच वार्ता का सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ‘फॉक्स न्यूज’ से कहा, ‘‘जलडमरूमध्य पर हमारा नियंत्रण है।’’ ट्रंप ने यह भी कहा कि रविवार को 11 घंटे चली बैठक में ‘‘सभी बातों पर सहमति बन गई थी’’, लेकिन बाद में ईरानी वार्ताकारों ने कुछ बदलावों का सुझाव दिया। उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया।

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से ही फारस की खाड़ी के इस संकरे समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है। ईरान ने व्यावसायिक जहाजों पर हमले कर और जहाजरानी कंपनियों को डराकर इस मार्ग पर अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश की है।

अमेरिका और ईरान के बीच हुए 60 दिन के अंतरिम समझौते की अवधि लगभग आधी पूरी हो चुकी है। इस समझौते का उद्देश्य युद्ध के स्थायी समाधान के लिए वार्ता शुरू करना था, लेकिन इसके बजाय होर्मुज जलडमरूमध्य और इसके भविष्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार हमले हो रहे हैं। इससे विश्व नेताओं की यह आशंका बढ़ गई है कि ईरान युद्ध फिर से पूरी तरह भड़क सकता है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने एक बयान में कहा, ‘‘यदि व्यापक स्तर पर फिर से युद्ध शुरू होता है, तो इसके परिणाम विनाशकारी होंगे।’’

अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने बताया कि सोमवार को किए गए हमलों में उसने दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें वायु रक्षा प्रणालियां, रडार केंद्र, मिसाइल और ड्रोन संबंधी उपकरण तथा छोटी नौकाएं शामिल हैं।

सेंटकॉम ने कहा, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस पर ईरान का नियंत्रण नहीं है।’’

ईरान के अर्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने अमेरिका के इस दावे को सिरे से खारिज किया। ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता पर इसी बल का नियंत्रण है।

गार्ड ने कहा, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य हमारा क्षेत्र है और हम दुनिया के दूसरे छोर से आई एक बेलगाम तथा बच्चों की हत्यारी सेना को इसमें अपना अवैध हस्तक्षेप जारी रखने की अनुमति नहीं देंगे।’’

इस बीच, सोमवार को बहरीन में तीन बार मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजे। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय स्थित है।

वहीं, कुवैत ने भी कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने दुश्मन की ओर से दागे गए प्रक्षेपास्त्रों को रोकने की कार्रवाई की। हालांकि, दोनों देशों में किसी नुकसान की तत्काल सूचना नहीं मिली।

जॉर्डन ने सोमवार को कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गईं चार मिसाइलों को मार गिराया। देश ने अपनी सरकारी समाचार एजेंसी ‘पेट्रा’ के जरिए यह घोषणा की।

जॉर्डन की सेना का हवाला देते हुए पेट्रा ने कहा, ‘‘इस घटना में किसी की जान नहीं गई और न ही कोई नुकसान हुआ।’’

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि होर्मुजगान, खुजेस्तान और मरकजी प्रांतों में हमले हुए हैं, जिनमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई।ईरानी मीडिया ने यह भी बताया कि सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में भी हमले किए गए हैं।

रविवार को ईरान के हमलों का दायरा बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और यहां तक कि ओमान तक फैल गया। ओमान के साथ साझा समुद्री सीमा वाला होर्मुज जलडमरूमध्य भी इस तनाव का केंद्र बना रहा। लंबे समय से तेहरान और पश्चिमी देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले ओमान ने इस हमले की आलोचना करते हुए एक ईरानी राजनयिक को तलब किया।

वहीं, सोमवार को इराक के स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित ईरानी कुर्द विपक्षी संगठन कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी की सशस्त्र शाखा के एक ठिकाने पर भी ड्रोन हमला किया गया।

ट्रंप ने अपनी हत्या की स्थिति में ईरान पर भीषण हमले का आदेश दिया, अंतिम निर्णय वेंस करेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि उन्होंने अपनी सेना को यह स्थायी आदेश दे रखा है कि अगर तेहरान उन्हें मारने की अपनी पुरानी धमकियों पर अमल करता है, तो ईरान को ‘‘ऐसे स्तर तक नष्ट कर दिया जाए जैसा उसने पहले कभी न देखा हो’’।

लेकिन अमेरिका सरकार के पास ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे एक स्वचालित, पहले से स्वीकृत ‘‘डेड मैन्स स्विच’’ बनाया जा सके, जो तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू कर दे।

इसके बजाय, अगर ट्रंप की हत्या हो जाती है, तो उनके उत्तराधिकारी को सत्ता सौंपने की प्रक्रिया 25वें संशोधन और 1947 के राष्ट्रपति उत्तराधिकार अधिनियम के तहत तय होगी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस तुरंत सर्वोच्च कमांडर बन जाएंगे और उनके पास किसी भी जवाबी कार्रवाई का अधिकार होगा।

ऐसे हालात में, वेंस ठीक वही कर सकते हैं जो ट्रंप ने करने को कहा था, हालांकि इस बात की भी संभावना है कि वह अपने पूर्ववर्ती के आदेशों को न मानने का फ़ैसला करें -- या फिर किसी अलग तरीके से सीधे जवाब दें।

‘रेवेन रॉक: द स्टोरी ऑफ द यूएस गवर्नमेंट्स सीक्रेट प्लान टू सेव इटसेल्फ -- व्हाइल द रेस्ट ऑफ अस डाई’ के लेखक गैरेट एम. ग्राफ ने कहा, “अमेरिका ने, कई अलग-अलग कारणों से, कभी भी तकनीकी ‘डेड मैन्स स्विच’ का उपयोग नहीं किया है।’’

अमेरिका के पास परमाणु हमले या किसी ऐसी बड़ी आपदा (जिससे वाशिंगटन का अधिकांश या पूरा हिस्सा नष्ट हो सकता है) की स्थिति में सरकार का कामकाज जारी रखने के लिए व्यापक आकस्मिक योजनाएँ हैं।

ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि ईरान ने उनकी ‘‘हत्या करने या हत्या की कोशिश करने’’ की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि 1,000 मिसाइल ‘‘लॉक और लोड’’ करके ईरान की ओर तान दी गई हैं तथा अगर ईरान सरकार अपनी धमकी पर अमल करती है, तो तुरंत हज़ारों अन्य मिसाइल दागी जाएंगी।

इसके कुछ घंटों बाद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरानी उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेना जारी रखेंगे।


अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने बढ़ाई खाड़ी देशों में हलचल, जॉर्डन ने कई ड्रोन किए नष्ट, बहरीन में बजा सायरन

ईरान-अमेरिका के बीच ताजा हमलों ने खाड़ी देशों की चिंता फिर से बढ़ा दी है। कुवैत ने सोमवार को कहा कि उसकी सेना एयरस्पेस में ईरानी हवाई हमलों का सामना कर रही है। वहीं, बहरीन की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, देश में सायरन बजा दिया गया है और लोगों से सबसे पास की सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की गई है। जॉर्डन ने भी कई ड्रोन को हवा में नष्ट करने का दावा किया।

ईरान ने कहा कि वह उसके क्षेत्र पर अमेरिकी हमलों के जवाब में पूरे क्षेत्र में हमले शुरू कर रहा है। इस बीच अमेरिकी सहयोगियों बहरीन, कुवैत और जॉर्डन सभी ने स्थानीय समयानुसार सोमवार सुबह हवाई हमलों को लेकर जवाबी कार्रवाई की सूचना दी।

जॉर्डन की सेना ने ईरान की चार मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। तीनों देशों ने रविवार को भी हवाई हमलों की सूचना दी थी।

ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, बहरीन में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि उसकी एयर फोर्स ने ईसा एयर बेस पर हमला किया।

कुवैत की सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा बयान में लोगों से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की और लिखा, "सुरक्षा बल अभी कुवैती एयरस्पेस में दुश्मन के हवाई टारगेट का सामना कर रहे हैं। आर्मी के जनरल स्टाफ ने बताया है कि अगर कोई धमाके की आवाज सुनाई देती है, तो वह एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा दुश्मन के हमलों को रोकने का नतीजा है। सभी से अनुरोध है कि वे जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।"

बहरीन के गृह मंत्रालय ने लोगों से शांत रहने और सबसे पास की सुरक्षित जगह पर जाने की अपील की है। बहरीन के गृह मंत्रालय ने कहा, "सायरन बज गया है। नागरिकों और निवासियों से शांत रहने और सबसे पास की सुरक्षित जगह पर जाने की अपील की जाती है।"

आईआरजीसी ने कहा कि उसने दो जहाजों को रोका, क्योंकि उन्होंने अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिए थे और होर्मुज स्ट्रेट से बिना इजाजत के रूट ले लिया था। इन दो जहाजों को रोकने के बाद हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल करके जॉर्डन में प्रिंस हसन एयर बेस को निशाना बनाया गया।

जवाबी कार्रवाई के दूसरे फेज में बहरीन में ईसा एयरबेस पर अमेरिकी हेलीकॉप्टर मेंटेनेंस और रिपेयर फैसिलिटी, पी-8 इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट वाले हैंगर, और अमेरिकी सेना के ड्रोन ऑपरेशन के कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर पर हमला किया।"

इसके अलावा, आईआरजीसी ने बताया कि जवाबी कार्रवाई के तीसरे और चौथे चरण में कुवैत में अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया गया।

आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स ने कुवैत के अली अल सलेम में अमेरिकी बेस पर फ्यूल स्टोरेज टैंक, एक पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और अहमद अल जाबेर एयर बेस पर एक एफपीएस स्ट्रेटेजिक रडार सिस्टम को पूरी तरह से नष्ट कर दिया।

रूस ने फिर यूक्रेन में नागरिक ठिकानों पर किए हमले, जेलेंस्की ने की हवाई सुरक्षा बढ़ाने की मांग

रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में रूस ने यूक्रेन के नागर‍िक ढांचे को न‍िशाना बनाया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर एक बार फिर आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर ल‍िखा, ''सोमवार को रूस ने एक बार फिर सिर्फ आम नागरिकों की जगहों-ओडेसा में सामान्य यात्री बसें, जापोरिज्जिया में आम रिहायशी इमारतें और खार्कीव क्षेत्र का एक साधारण अस्पताल को निशाना बनाया।''

जेलेंस्की ने कहा क‍ि रूस लोगों की ज‍िंदगी के ख‍िलाफ युद्ध छेड़े हुए है, यह साबित करता है कि यूक्रेन का साथ देना हर नजरिए से सही है। सुरक्षा के लिए, राजनीतिक तौर पर और सबसे बढ़कर इंसानियत के लिए।

उन्‍होंने कहा क‍ि दुनियाभर के लोग यह देख रहे हैं। वे देख रहे हैं कि यूक्रेन को और मजबूत हवाई सुरक्षा की जरूरत है। लोगों की जान बचाने के लिए और बेहतर सुरक्षा चाहिए। वे यह भी देख रहे हैं कि रूस की सरकार इस युद्ध को लेकर पूरी तरह गैर-तर्कसंगत हो चुकी है और इसे खत्म करने से लगातार इनकार कर रही है।

जेलेंस्‍की ने कहा क‍ि रूस पर दबाव असरदार होना चाहिए। हमलावर के ख‍िलाफ नए प्रतिबंध, यूक्रेन के लिए नए सहायता पैकेज और हमारी यूरोपीय एंटी-बैलिस्टिक पहल 'फ्रेया' जैसे नए प्रोजेक्ट इन सभी को मिलकर असर दिखाना होगा।

यूक्रेनी राष्‍ट्रपत‍ि ने कहा क‍ि मदद करने वाले हर व्यक्ति का धन्यवाद। आने वाले दिनों में कई बैठकें और बातचीत होंगी, जिनसे हमारी सुरक्षा को और मजबूत बनाने की उम्मीद है।

इससे पहले शन‍िवार को यूक्रेन ने रूस के समारा इलाके में मौजूद सिजरान रिफाइनरी पर जबरदस्त हमला क‍िया था।


परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ा तो ईरान पर प्रतिबंध जारी रहेगा: फ्रांस

फ्रांस ने स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ने की घोषणा नहीं करता, तब तक उस पर लगे प्रतिबंधों में कोई राहत नहीं दी जाएगी।

सोमवार को फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने फ्रांसीसी मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम का त्याग किए बिना उस पर लगे प्रतिबंध हटाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

पिछले महीने भी बारो ने कहा था कि फ्रांस ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर होने वाली वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की शर्तों से संतुष्ट हुए बिना पेरिस संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध हटाने का समर्थन नहीं करेगा।

फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो का अधिकार भी है।

उधर, तेहरान में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने मीडिया से कहा कि ईरान ने हर वार्ता में गंभीरता और पूरी जिम्मेदारी के साथ हिस्सा लिया है तथा हमेशा देश के हितों और जनता की चिंताओं को प्राथमिकता दी है।

उन्होंने कहा, "जब भी कोई समझौता हुआ, ईरान ने सद्भावना के साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने कभी भी सबसे पहले अपने वादों का उल्लंघन नहीं किया।"

बाघेई ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका युद्ध समाप्त करने संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता, तो ईरान भी अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का पालन नहीं करेगा।

उन्होंने कहा, "जब भी दूसरे पक्ष ने अपने दायित्वों को पूरा नहीं किया, हमने भी अपने दायित्वों का पालन नहीं किया। आगे भी हमारा रुख यही रहेगा।"

बाघेई ने इस दौर दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत मामले में न्याय की उम्मीद करना ईरानी सरकार का एक गंभीर और मूलभूत सिद्धांत है। उन्होंने कहा, "सरकार की इस संबंध में स्पष्ट जिम्मेदारी है। विदेश मंत्रालय भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है।"

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