दुनिया की खबरें: पाकिस्तान-ईरान में फंसे अफगान पत्रकारों के हालात बिगड़े और रूस पर भड़के जेलेंस्की
रक्षा खतरों के कारण अफगानिस्तान छोड़ने वाले कई पत्रकार अब मेजबान देशों से निष्कासन (डिपोर्टेशन) के जोखिम में हैं, जबकि उनका पुनर्वास लंबित है।

अफगानिस्तान मीडिया सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (एएमएसओ) ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान और ईरान में फंसे अफगान पत्रकार मानवीय वीजा का इंतजार करते हुए बदतर हालात का सामना कर रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा खतरों के कारण अफगानिस्तान छोड़ने वाले कई पत्रकार अब मेजबान देशों से निष्कासन (डिपोर्टेशन) के जोखिम में हैं, जबकि उनका पुनर्वास लंबित है।
अफगानिस्तान की प्रमुख समाचार एजेंसी खामा प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एएमएसओ ने कहा कि लंबी प्रशासनिक देरी और वीजा प्रक्रिया की स्पष्ट समयसीमा न होने से पत्रकारों की मानसिक और शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। संगठन ने विशेष रूप से ब्राजील के अधिकारियों और राजनयिक मिशनों से अपील की है कि वे मानवीय वीजा आवेदनों पर तुरंत कार्रवाई करें और पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराएं।
कई अफगान पत्रकार, जो तालिबान शासन के बाद देश छोड़कर भागे थे, पड़ोसी देशों पाकिस्तान और ईरान में रह रहे हैं, जहां उनकी कानूनी स्थिति और आजीविका दोनों अनिश्चित बनी हुई हैं। एएमएसओ और अंतरराष्ट्रीय अधिकार संगठनों का कहना है कि शीघ्र पुनर्वास ही उन्हें विदेशों में जारी असुरक्षा और कानूनी जोखिमों से बचा सकता है।
2 फरवरी को एएमएसओ ने जानकारी दी थी कि पिछले दो सप्ताह में पाकिस्तान पुलिस ने पांच अफगान पत्रकारों को हिरासत में लिया। संगठन के अनुसार, पत्रकार समीम फोरूघ फैजी और कैमरामैन अताउल्लाह शिरजाद को भी हिरासत में लिया गया था, जबकि अन्य ने सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन एएमएसओ ने कहा कि मनमानी हिरासत और असुरक्षा अब भी पाकिस्तान में रह रहे अफगान पत्रकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
जिनेवा में बैठक के बाद रूस पर भड़के जेलेंस्की
जिनेवा में रूस और यूक्रेन के बीच बुधवार को बैठक हुई। इस बैठक के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की रूस पर आगबबूला हो गए। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें जंग खत्म करने के लिए किसी ऐतिहासिक बकवास की जरूरत नहीं है।
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "मुझे इस जंग को खत्म करने और डिप्लोमेसी की तरफ बढ़ने के लिए हिस्टोरिकल बकवास की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह बस देर करने का तरीका है। मैंने पुतिन से कम हिस्ट्री की किताबें नहीं पढ़ी हैं और मैंने बहुत कुछ सीखा है। मैं उनके देश के बारे में उनसे ज्यादा जानता हूं जितना वे यूक्रेन के बारे में जानते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं रूस गया हूं, कई शहरों में, और मैं वहां बहुत से लोगों को जानता था। वे इतनी बार यूक्रेन कभी नहीं गए। वे सिर्फ बड़े शहरों में गए थे। मैं छोटे शहरों में गया, उत्तरी हिस्से से लेकर दक्षिणी हिस्से तक, हर जगह।"
उन्होंने आगे कहा कि मैं उनकी सोच जानता हूं, इसीलिए मैं इन सब चीजों पर समय बर्बाद नहीं करना चाहता। यह उनके बारे में है। उन्होंने ऐसा सिस्टम बनाने का फैसला किया। रूसियों ने खुद को बदलने का फैसला किया।
जेलेंस्की ने कहा, "हमारे खिलाफ एक बड़ी जंग छिड़ी हुई है। यह हमारी जिंदगी है। मैं उनसे बस यही बात करना चाहता हूं कि मुझे लगता है कि हमें इसे सबसे कामयाब तरीके से हल करने की जरूरत है। मेरा मतलब है कि इस जंग को जल्दी खत्म करना है, इसलिए मैं सिर्फ ऐसी चीजों के बारे में ही बात करना चाहता हूं।"
युवाओं में बढ़ते आक्रोश से एक और जनविद्रोह की आग भड़क सकती है: नेपाल की प्रधानमंत्री कार्की
नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने बृहस्पतिवार को चेतावनी दी कि अगर युवाओं के असंतोष का समाधान नहीं किया गया तो इससे एक और विद्रोह की आग भड़क सकती है।
काठमांडू में नेपाली सेना पवेलियन में 76वें लोकतंत्र दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र ठोस परिणाम देने वाला होना चाहिए, इससे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
पिछले साल सितंबर में ‘जेनरेशन जेड’ (जेन-जेड) के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कार्की ने कहा, ‘‘उस आंदोलन का उद्देश्य भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और भेदभाव को समाप्त करना था। इसका उद्देश्य सुशासन और समान न्याय सुनिश्चित करना था।’’
नेपाल में युवाओं के इस प्रदर्शन के कारण के. पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को सत्ता से हटना पड़ा था।
उन्होंने आगे कहा, ‘‘राज्य को न केवल उदारता से, बल्कि विनम्रता और कर्तव्य की गहरी भावना से भी इसका जवाब देना चाहिए।’’ उन्होंने चेतावनी दी कि युवाओं की असंतोष की समस्या का समाधान नहीं करने से एक और विद्रोह भड़क सकता है।
पिछले साल 12 सितंबर को अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं कार्की ने कहा, ‘‘युवाओं को कमजोर करके कोई भी राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता।’’ उन्होंने कहा, ‘‘युवाओं में ऊर्जा, बदलाव की आकांक्षा और आक्रोश है।’’ उन्होंने कहा कि लोकतंत्र ‘‘न केवल एक प्रक्रिया है, बल्कि एक परिणामोन्मुखी प्रणाली है’’।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने सैद्धांतिक रूप से लोकतंत्र को अपनाया, लेकिन व्यवहार में हमने भेदभाव को बढ़ावा देना जारी रखा। हमने संविधान में समानता का प्रावधान किया; फिर भी अपनी व्यवस्थाओं के भीतर हम असमानता को प्रश्रय देते रहे।’’
नाइजीरिया में खदान में जहरीली गैस के रिसाव से 37 लोगों की मौत
उत्तर-मध्य नाइजीरिया में एक खदान में जहरीली गैस के रिसाव से 37 लोगों की मौत हो गई और 26 अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस प्रवक्ता अल्फ्रेड अलाबो ने एक बयान में कहा कि घटना मंगलवार तड़के पठार राज्य के वासे क्षेत्र में स्थित कम्पानी जुरक समुदाय में हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रारंभिक जांच से पता चला है कि खनिक लेड ऑक्साइड तथा सल्फर एवं कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी अन्य संबंधित गैसों के अचानक रिसाव के कारण प्रभावित हुए थे, जो मनुष्यों के लिए विषाक्त और जहरीली होती हैं, खासकर एक बंद या खराब हवादार वातावरण में इन गैसों का असर खतरनाक होता है।’’
अलाबो ने बताया, ‘‘शवों को धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए उनके परिवारों को सौंप दिया गया है।’’ नाइजीरिया की सरकार ने खनन स्थल को बंद कर दिया है और रिसाव की जांच जारी है।
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