दुनिया की खबरें: एच1बी वीजा शुल्क रद्द करने के कोर्ट आदेश पर भड़के ट्रंप और फिलीपीन भूकंप में अब तक 37 की मौत

मैडिसन स्क्वायर गार्डन में एनबीए फाइनल देखने के बाद न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, ‘‘ये न्यायाधीश हमें बहुत परेशान कर रहे हैं, यह बिलकुल पागलपन है। वे हमें बहुत अधिक परेशान कर रहे हैं... वे हमारे देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं।’’

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संघीय अदालत के उस आदेश की आलोचना की, जिसमें एक लाख डॉलर के एच-1बी वीजा शुल्क को रद्द कर दिया गया। ट्रंप ने यह भी कहा कि ऐसे अदालती फैसले देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं।

मैडिसन स्क्वायर गार्डन में एनबीए फाइनल देखने के बाद न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, ‘‘ये न्यायाधीश हमें बहुत परेशान कर रहे हैं, यह बिलकुल पागलपन है। वे हमें बहुत अधिक परेशान कर रहे हैं... वे हमारे देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं।’’

मैसाचुसेट्स के एक संघीय न्यायाधीश ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन द्वारा उच्च कुशल श्रमिकों के लिए एच-1बी वीजा पर लगाए गए एक लाख डॉलर के शुल्क को रद्द कर दिया। शुल्क आदेश को कैलिफोर्निया और 19 अन्य प्रांतों ने चुनौती दी थी।

न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने फैसला सुनाया कि एच-1बी आवेदनों पर ट्रंप द्वारा लगाया गया एक लाख डॉलर का शुल्क गैरकानूनी था, क्योंकि इसे अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिली थी।

ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें नये एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए एक लाख डॉलर का शुल्क निर्धारित किया गया था।

व्हाइट हाउस की एक प्रवक्ता ने संकेत दिया कि इस आदेश को अपीलीय अदालत में चुनौती दी जाएगी। प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा, ‘‘एच-1बी कार्यक्रम का दशकों से दुरुपयोग होता रहा है और राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरकार इसे ठीक करने के लिए कदम उठाया था।’’

रोजर्स ने यह भी कहा, ‘‘वाशिंगटन में एक संघीय न्यायाधीश पहले ही लगभग इसी तरह के एक आदेश को बरकरार रख चुके हैं, और प्रशासन को विश्वास है कि अपील में यह आदेश पलट दिया जाएगा।’’

उत्तर कोरिया के नेता किम के साथ महत्वपूर्ण सहमति बनी: चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने मंगलवार को उत्तर कोरिया की अपनी यात्रा संपन्न की और कहा कि वह दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए किम जोंग उन के साथ एक महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंचे हैं। उत्तर कोरिया, चीन का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है।

सोमवार को प्योंगयांग में भव्य स्वागत किये जाने के बाद, शी ने उत्तर कोरिया के नेता किम को चीन के ‘‘अटूट’’ समर्थन का आश्वासन दिया, जिन्होंने हाल के वर्षों में रूस के साथ संबंधों को प्रगाढ़ किया है, जिससे बीजिंग काफी असहज हो गया है।

शी की दो दिवसीय यह यात्रा 2019 के बाद उत्तर कोरिया की उनकी पहली यात्रा थी और इस वर्ष शी चिनफिंग की यह पहली विदेश यात्रा भी है।

दोनों रणनीतिक सहयोगियों के बीच किसी ठोस समझौते की कोई घोषणा नहीं हुई और चीनी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण पर किसी भी वार्ता से संबंधित सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।

उत्तर कोरिया, जिसने 2006 से कई परमाणु परीक्षण किए हैं, सार्वजनिक रूप से खुद को परमाणु-आयुध से लैस देश बताता है, लेकिन बीजिंग कोरियाई प्रायद्वीप पर परमाणु हथियारों के विरोध में है और परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन करता है।

शी की यात्रा से पहले, किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने सरकारी समाचार एजेंसी ‘केसीएनए’ के माध्यम से कहा था कि उत्तर कोरिया कभी भी खुद के परमाणु-सशस्त्र होने का दर्जा नहीं छोड़ेगा और अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार करना जारी रखेगा।

उन्होंने उन खबरों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि शी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच, अमेरिकी नेता की हालिया बीजिंग यात्रा के दौरान हुई बातचीत में प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण का मुद्दा उठा था।

उत्तर कोरिया की शी की यात्रा के परिणामों पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने संकेत दिया कि कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण पर बीजिंग के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।


पीओके में बर्बरता: ब्रिटेन में पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अंतिम संस्कार के दौरान गमजदा लोगों पर की गई गोलीबारी में कम से कम 11 लोगों की मौत के विरोध में कश्मीरी प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड में स्थित पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के सामने प्रदर्शन किया।

घटना ऐसे समय हुई जब कुछ दिन पहले लगभग 30 ब्रिटिश सांसदों ने पीओके में बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघनों का दावा करते हुए कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की थी।

पीओके में यह बर्बरता उस समय हुई जब जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) द्वारा सस्ती दरों पर आटा और बिजली की मांग को लेकर प्रस्तावित विरोध रैली की तैयारी चल रही थी। अधिकारियों ने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए शुक्रवार को जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया था।

मंगलवार को प्रदर्शनकारी ब्रैडफोर्ड में पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर एकत्र हुए और पाकिस्तान के अधिकारियों पर पीओके में प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया।

कई कश्मीरी प्रवासियों समेत आयोजकों ने दावा किया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में खासकर रावलाकोट में कई लोग मारे गए और घायल हुए। रावलकोट में पांच जून से विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

फिलीपीन में आए भूकंप में 37 लोगों की मौत; 32,000 लोग विस्थापित

दक्षिणी फिलीपीन में सोमवार को आए भूकंप में कम से कम 37 लोग मारे गए और 32,000 से अधिक लोग विस्थापित हो गए। हालांकि क्षतिग्रस्त इमारतों में फंसे लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान मंगलवार को भी जारी रहा और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति मलबे में फंसा न रहे।

फिलीपीन में सोमवार सुबह 7.8 तीव्रता का भूकंप आया। दक्षिणी प्रांतों के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार केवल चार लोग लापता बताए गए थे लेकिन नागरिक सुरक्षा कार्यालय ने माना कि संभावित जीवित बचे लोगों या हताहतों की तलाश के लिए कई ढह चुकी और बुरी तरह क्षतिग्रस्त इमारतों का गहन निरीक्षण करने की जरूरत है।

भूकंप का केंद्र फिलीपीन के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले द्वीप मिंडानाओ के पास था। इस भूकंप से लगभग 500 लोग घायल हुए और 32,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए जिनमें से अधिकतर ने आपातकालीन आश्रयस्थलों में शरण ली।

सुनामी की आशंका के कारण कई लोगों ने अपना घर छोड़ दिया। फिलीपीन में सुनामी की 4.6 फुट ऊंची लहरें उठीं, हालांकि सुनामी से केवल एक तटीय गांव में छह झोपड़ियों को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली। इंडोनेशिया और पलाऊ के साथ-साथ दक्षिणी जापान में भी छोटी लहरें उठीं।

भूकंप से सबसे अधिक जनरल सैंटोस प्रभावित हुआ। सात लाख की आबादी वाले इस तटीय शहर में भूकंप के कारण इमारतें ढहने और मलबों में दबने से कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई।

नागरिक सुरक्षा कार्यालय के राफेलिटो अलेजांद्रो के अनुसार, सारंगानी प्रांत में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई, जिनमें से अधिकतर ग्लान नामक पर्वतीय कस्बे में भूस्खलन में मारे गए। भूस्खलन के कारण कई घर जमींदोज हो गए।

आपदा राहत अधिकारियों ने बताया कि अन्य मौतें दक्षिण कोटाबाटो और दावो ऑक्सिडेंटल के दक्षिणी प्रांतों और बलुत द्वीप पर हुईं।

सरकार द्वारा किए गए प्रारंभिक क्षति आकलन के अनुसार, कई प्रांतों में लगभग 2,500 मकान और 117 सरकारी इमारतें और प्रतिष्ठान क्षतिग्रस्त हो गए। जनरल सैंटोस में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बंद रहा, जिसके कारण मानवीय सहायता मिशन पर जाने वाली उड़ानों को छोड़कर 63 घरेलू उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।


कांगो में इबोला के 550 मामलों में से 101 मरीजों की मौत

पूर्वी कांगो में इबोला का प्रकोप घोषित होने के एक महीने से भी कम समय में इसके संक्रमण से मृतकों की संख्या बढ़कर 100 से अधिक हो गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों के अनुसार, अब तक इबोला वायरस के संक्रमण के कुल 550 मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें से 101 लोगों की मौत हो गई और 19 मरीजों के ठीक होने की पुष्टि की गई है।

यह प्रकोप मुख्य रूप से कांगो के पूर्वी प्रांत इटुरी में केंद्रित है, जहां कुल मामलों के 90 प्रतिशत से अधिक दर्ज किये गये हैं। कुछ मामले नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों में भी सामने आए हैं और यह संक्रमण सीमा पार कर युगांडा तक फैल चुका है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वास्तविक मामलों की संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि प्रकोप की पहचान देरी से हुई और प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी तथा स्वास्थ्य प्रतिक्रिया में गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं।

स्थानीय निवासियों द्वारा स्वास्थ्य कर्मियों पर हमलों, समुदायों में फैले संदेह और सशस्त्र संघर्ष ने संक्रमण नियंत्रण प्रयासों को और कठिन बना दिया है।

अधिकारियों के अनुसार, यह नया प्रकोप दुर्लभ बुंदीबुग्यो वायरस स्ट्रेन के कारण है, जिसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। वायरस का यह उपस्वरूप ज़ैरे वायरस से अलग है, जो कांगो में पहले हुए अधिकांश प्रकोपों के लिए जिम्मेदार रहा है।