दुनिया की खबरें: ट्रंप ने एआई रेगुलेशन को किया नामंजूर और पाक की मोस्ट वांटेड लिस्ट में मसूद अजहर पर ₹70 लाख का इनाम

ट्रंप ने एंथ्रोपिक, ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट तथा दूसरी कंपनियों की प्रौद्योगिकी हस्तियों की उन मांगों का विरोध किया, जिनमें एआई के लिए अधिक नियंत्रण की बात कही गई थी।

फोटोः IANS
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वह एआई के खिलाफ एक मज़बूत सुरक्षा कवच हैं और इस प्रौद्योगिकी को सीमित करने की कोई भी कोशिश एक ‘घिनौनी साजिश’ का हिस्सा है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘एआई को एकमात्र नियंत्रण या सुरक्षा नियम की जरूरत है। राष्ट्रपति ने खास तौर पर कहा कि प्रशासन ने एआई कंपनी एंथ्रोपिक को पहले ही ‘बुरी या संभावित रूप से बुरी’ चीजें करने से रोक दिया है।

ट्रंप ने एंथ्रोपिक, ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट तथा दूसरी कंपनियों की प्रौद्योगिकी हस्तियों की उन मांगों का विरोध किया, जिनमें एआई के लिए अधिक नियंत्रण की बात कही गई थी, ताकि इसे सुरक्षा को बढ़ावा देने, कानूनी ज़िम्मेदारी तय करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखने वाले तरीकों से विकसित किया जा सके।

हमले में क्षतिग्रस्त सऊदी तेल पाइपलाइन की मरम्मत में कई हफ्ते लगेंगे

सऊदी अरब की एक अहम तेल पाइपलाइन की मरम्मत में कई हफ्ते लगेंगे जो पिछले हफ्ते हमले में क्षतिग्रस्त हो गई थी। क्षेत्रीय अधिकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को यह जानकारी दी।

पूरे देश में फैली ‘पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन’’ सऊदी अरब की उस रणनीति के लिए बहुत जरूरी है जिसके तहत वह अपने तेल निर्यात को फारस की खाड़ी के होर्मुज जलडमरूमध्य से हटाकर लाल सागर की ओर ले जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी हमलों के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है।

करीब 1,200 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन से रोज़ाना 70 लाख बैरल तक तेल भेजा जा सकता है। पिछले दिनों एक हमले के कारण इस पाइपलाइन को बंद करना पड़ा था। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के ड्रोन को ज़िम्मेदार ठहराया था।

क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि पाइपलाइन की मरम्मत में तीन से पांच हफ्ते लग सकते हैं। एक अधिकारी ने कहा कि मरम्मत कार्य चलने के दौरान पाइपलाइन आंशिक रूप से काम कर सकती है।

पाइपलाइन का संचालन करने वाली सऊदी तेल कंपनी अरामको ने इस संबंध में टिप्पणी के अनुरोध पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।


पाकिस्तान की ‘रेड बुक’ में मसूद अजहर पर 70 लाख का इनाम, दुनिया को गुमराह करने की साजिश

पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी यानी एफआईए ने अपनी नई ‘रेड बुक’ में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को भगोड़ा घोषित किया है। यही नहीं उसके सिर पर घोषित इनाम को भी बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया गया है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञ इसे अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचने की पाकिस्तान की एक और कोशिश मान रहे हैं।

गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अक्टूबर में वित्तीय कार्रवाई कार्यबल यानी एफएटीएफ की पूर्ण बैठक होने वाली है। पाकिस्तान पर पहले भी आतंकवाद के वित्तपोषण और सीमा पार आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई दिखाकर पाकिस्तान दोबारा निगरानी और संभावित कार्रवाई से बचने की कोशिश कर रहा है। मसूद अजहर के मामले में पाकिस्तान का दावा भी लगातार सवालों में रहा है।

पाकिस्तान वर्ष 2021 से यह कहता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में नहीं है और अफगानिस्तान भाग चुका है। उसी साल एफआईए ने उसके सिर पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपए का इनाम घोषित किया था। अब पांच साल बाद इस इनाम को बढ़ाकर 70 लाख रुपए कर दिया गया है। हालांकि, भारतीय खुफिया एजेंसियों के पिछले छह महीनों के तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक मसूद अजहर पाकिस्तान में ही छिपा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, वह सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में सक्रिय रूप से छिपा है। ऐसे में उसे केवल कागजों पर भगोड़ा घोषित करने और उसके सिर पर इनाम बढ़ाने को लेकर पाकिस्तान की मंशा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

एफआईए की नई रेड बुक में 26-11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम भी शामिल हैं। ये वे लोग हैं, जिन्होंने हमले के लिए आतंकियों को समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने में मदद की, उन्हें आर्थिक सहायता दी या अभियान के प्रबंधन में भूमिका निभाई। इनमें से 17 आतंकियों के नाम के साथ उनकी तस्वीर और 26-11 हमले में उनकी भूमिका का विवरण दिया गया है। लेकिन दो मामलों में पाकिस्तान ने अहम जानकारियां हटा दी हैं।

ईरान की चेतावनी के बाद भी होर्मुज में तैनाती पर व‍िचार कर रहा दक्षिण कोरिया, अमेर‍िका के साथ करेगा रक्षा वार्ता

दक्षिण कोरिया और अमेरिका इस सप्ताह अपने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच नियमित रक्षा वार्ता करने जा रहे हैं। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब सोल, होर्मुज स्‍ट्रेट में सैन्य तैनाती के विकल्प पर विचार कर रहा है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कोरिया-अमेरिका इंटीग्रेटेड डिफेंस डायलॉग (केआईडीडी) की द्विवार्षिक बैठक बुधवार से शुक्रवार तक दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर बुसान में आयोजित की जाएगी।

इन वार्ताओं का नेतृत्व दक्षिण कोरिया के उप रक्षा मंत्री (नीति) किम होंग-चोल और अमेरिका के पूर्वी एशिया मामलों के उप सहायक रक्षा सचिव जॉर्ज लेमूर करेंगे। इनके साथ रक्षा और विदेश मामलों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल होंगे।

मंत्रालय ने कहा कि बैठक में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इनमें युद्धकालीन सैन्य संचालन का नियंत्रण (ओपीकॉन) वापस हासिल करना, दोनों देशों की संयुक्त रक्षा व्यवस्था और जहाज निर्माण क्षेत्र में सहयोग जैसे विषय शामिल हैं।

हालांकि दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि बैठक में होर्मुज स्‍ट्रेट में दक्षिण कोरियाई सेना की संभावित तैनाती पर भी चर्चा हो सकती है। अमेरिका काफी समय से दक्षिण कोरिया पर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के प्रयासों में शामिल होने का दबाव बना रहा है।

पिछले सप्ताह दक्षिण कोरिया ने होर्मुज स्‍ट्रेट के आसपास की सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के लिए एक टीम संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भेजी थी।

इस कदम के बाद अटकलें लगने लगीं कि दक्षिण कोरिया वास्तव में वहां सैन्य बल भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि इस मामले में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

दूसरी ओर, ईरान पहले ही सार्वजनिक रूप से चेतावनी दे चुका है कि अगर उस क्षेत्र में किसी प्रकार की सैन्य तैनाती की जाती है, तो इसके 'गंभीर परिणाम' हो सकते हैं।

इस सप्ताह की बैठक में एक और अहम मुद्दा युद्धकालीन सैन्य नियंत्रण (ओपीकॉन) का होगा। दक्षिण कोरिया चाहता है कि अमेरिका से यह अधिकार वापस लेकर वह अपनी सेना का पूर्ण नियंत्रण हासिल करे।

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