दुनिया की खबरें: ट्रंप के दावों की खुली पोल! जेलेंस्की बोले, 'ऊर्जा संघर्षविराम की चर्चा के बीच ग्रिडों को बनाया निशाना

जेलेंस्की ने पोलैंड में वारसॉ सुरक्षा मंच पर कहा कि यूक्रेन को मीडिया की खबरों के माध्यम से पता चला कि ट्रंप ने रूस के साथ ‘ऊर्जा संघर्षविराम’ कराया है, जिसके तहत दोनों पक्षों को ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने थे।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोमवार को कहा कि रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं, जबकि एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि साढ़े चार साल से युद्धरत दोनों देश एक दूसरे के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले न करने को लेकर सहमत हो गये हैं।

जेलेंस्की ने पोलैंड में वारसॉ सुरक्षा मंच पर कहा कि यूक्रेन को मीडिया की खबरों के माध्यम से पता चला कि ट्रंप ने रूस के साथ ‘ऊर्जा संघर्षविराम’ कराया है, जिसके तहत दोनों पक्षों को ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने थे।

जेलेंस्की ने कहा कि यदि मॉस्को भी ऐसा करता है तो वह इस समझौते का पालन करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा, "हम इसका समर्थन करते हैं, लेकिन मैंने रूसी पक्ष की ओर से इस प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बारे में नहीं सुना है।"

ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक संक्षिप्त पोस्ट में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के कथित समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि यह संघर्षविराम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और साथ ही यह भी कहा, ‘‘इसे तोड़ें मत!’’

जेलेंस्की ने कहा कि हालांकि, ट्रंप की ‘‘अचानक, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण पोस्ट’’ के बाद रूस ने कई ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले किए, जिससे यूक्रेन को ‘‘गहरा आश्चर्य’’ हुआ। उन्होंने कहा कि इन प्रतिष्ठानों में पूर्वोत्तर शहर खारकीव का एक बिजली संयंत्र, गैस उत्पादन की एक इकाई और एक आम नागरिक का गैस स्टेशन शामिल हैं।

जेलेंस्की ने ट्रंप के सोशल मीडिया मंच का जिक्र करते हुए कहा, "यह स्पष्ट था कि (रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन 'ट्रुथ सोशल' नहीं पढ़ते।"

ट्रंप ने 14 सितंबर को भी सोशल मीडिया पर दावा किया था कि दोनों देश एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला नहीं करने के लिए सहमत हुए हैं। हालांकि, उन्होंने उस प्रस्ताव के बारे में भी कोई विवरण नहीं दिया था और कथित समझौते का कोई नतीजा नहीं निकला था।

रूस ने युद्ध के दौरान यूक्रेन के आम नागरिकों को बिजली, गर्मी और पानी की सुविधा से वंचित करने के लिए ऊर्जा केंद्रों पर हमले किए हैं। ऐसा करके वह मॉस्को के बड़े पैमाने पर किए गए हमले के खिलाफ जनता के विरोध को कमजोर करना चाहता है। यूक्रेनी अधिकारी इस रणनीति को "सर्दियों को हथियार बनाना" कहते हैं।

पाकिस्तान: केपी में इमरजेंसी के बाद भी पीएम शहबाज की दिक्कतें बरकरार, अब पुलिस जवानों ने खड़े किए हाथ!

पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में आपातकाल लागू कर दिया। इसके पीछे की वजह पीटीआई शासित (पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ) प्रांत में बढ़ती आतंकी गतिविधियां बताया गया। एक और कारण वो लॉन्ग मार्च है जो संवैधानिक मूल्यों की बहाली के नाम पर इमरान खान की पार्टी (पीटीआई) करना चाहती थी। सब कुछ इस्लामाबाद के मुताबिक हो रहा था। इस बीच सरकार की मंशा को झटका दिया है पंजाब पुलिस के जवानों ने! ये लोग केपी में तैनाती नहीं चाहते।

दरअसल, पीटीआई मार्च को रोकने के लिए रावलपिंडी डिवीजन में तैनात पंजाब पुलिस के जवानों की चिंताएं रविवार को और बढ़ गईं। उन्हें पता चला कि इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू होने के बाद, कुल 40,000 जवानों में से 25,000 को अटक (पंजाब) से खैबर पख्तूनख्वा भेजा जा सकता है।

प्रमुख दैनिक डॉन ने इस खबर को रिपोर्ट किया है। उनके मुताबिक थकान, नींद की कमी और रहन-सहन की खराब परिस्थितियों से परेशान पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि थके-हारे पुलिसकर्मी अटक से केपी भेजे जाने को एक नई चुनौती और बड़ी मुसीबत के तौर पर देख रहे हैं, खासकर तब जब उन्हें पहले से ही जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

जवानों के लिए माहौल माकूल नहीं रहा है। स्थानीय मीडिया और राजनीतिक दलों ने इसे समय-समय पर उठाया भी है। डॉन ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में, रावलपिंडी डिवीजन पुलिस प्रशासन पर तैनात जवानों को सड़ा-गला और बासी खाना देने के कई आरोप लगे हैं। साथ ही, पीटीआई विरोध मार्च के दौरान ड्यूटी पर रहते हुए अटक और वाह कैंट में पिछले दो हफ्तों में पांच पुलिसकर्मियों की मौत की पुष्टि हुई है। दो की मौत हार्ट अटैक से हुई, एक नहर में डूब गया, और दो अन्य की मौत स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण हुई, जबकि एक कॉन्स्टेबल की सर्पदंश के बाद स्थिति गंभीर बनी हुई है।

सामने आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिसकर्मी बासी भोजन, खराब कैटरिंग, वॉशरूम की बदहाल स्थिति और रहने की बेहद खौफनाक स्थितियों की शिकायत करते रहे हैं।


पाकिस्तान अपनी नाकामियों का ठीकरा अफगानिस्तान पर फोड़ रहा, ये ठीक नहीं: तालिबान

तालिबान ने पाकिस्तान पर बातचीत का माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया है। प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान की सरकार समाधान निकालने की बजाय प्रोपेगैंडा में जुटी है।मुजाहिद ने इस्लामाबाद के रवैये को "विफल नीति" करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान के वरिष्ठ प्रशासक वार्ता प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं।

मुजाहिद ने कहा कि अपनी नाकामियों का दोष अफगानिस्तान पर मढ़ना किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता जबकि इस्लामाबाद के सामने मौजूद राजनीतिक, सुरक्षा, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां "गंभीर चिंता का विषय" हैं।

मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी बयान साझा किया। जिसमें लिखा गया, "पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा अपनी नाकामियों के लिए अफगानिस्तान को दोष देना किसी भी परेशानी से निजात नहीं दिला सकता है। पाकिस्तान के सामने मौजूद राजनीतिक, सुरक्षा, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां गंभीर चिंता का विषय हैं और इनका पूरे क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ता है।"

उन्होंने आगे कहा, "पाकिस्तानी प्रशासकों के बेबुनियाद आरोप, बातचीत की प्रक्रियाओं को बाधित करने की कोशिशें और समाधान खोजने के बजाय प्रचार-प्रसार पर वरिष्ठ अधिकारियों का अत्यधिक ध्यान एक विफल नीति को दर्शाता है।"

जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान से आग्रह किया कि वह अपनी घरेलू चुनौतियों से निपटने के लिए रचनात्मक कदम उठाए। साथ ही अपने राजनेताओं और लोगों के विचारों और अधिकारों का सम्मान करे।

तालिबान प्रवक्ता का यह बयान पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान की टिप्पणी का जवाब है। इस्लामाबाद की ओर से दोहराया गया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य सशस्त्र समूहों के अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकाने हैं; यह जानकारी अफगानिस्तान के 'अमू टीवी' ने दी।

होर्मुज स्ट्रेट मार्ग ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा, अमेर‍िकी वादे पूरे होने तक जारी रहेगा नियंत्रण: गरीबाबादी

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान ने सख्त रुख अपनाया हुआ है। उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि यह जलमार्ग ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है। न‍ियम उल्‍लंघन करने वाले जहाजों पर कार्रवाई होगी।

इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) के अनुसार, गरीबाबादी ने रविवार शाम दक्षिणी ईरान के होर्मोजगन प्रांत की राजधानी बंदर अब्बास में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा क‍ि जब तक अमेरिका अपने वादों और प्रतिबद्धताओं पर वापस नहीं लौटता, तब तक ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा।

उन्होंने कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार ईरान के पास सुरक्षित है।"

आईआरएनए के अनुसार, ईरान के नियंत्रण को लेकर हो रही आलोचनाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने के शुरुआती दिनों से लागू किए गए ये सुरक्षा उपाय आगे भी जारी रहेंगे।

उन्‍होंने ने कहा क‍ि ये नियंत्रण तब तक लागू रहेंगे, जब तक मुख्य आक्रामक पक्ष अमेरिका यह नहीं समझ लेता कि सैन्य कार्रवाई कोई समाधान नहीं है और वह अपनी प्रतिबद्धताओं पर लौट नहीं आता।

आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने बताया कि ईरान की ओर से घोषित नियमों को जलडमरूमध्य में सख्ती से लागू किया जा रहा है। इन नियमों के तहत युद्धपोतों के गुजरने पर रोक है, जबकि व्यावसायिक जहाज जरूरी समन्वय और अनुमति मिलने के बाद ही वहां से गुजर सकते हैं।

उन्होंने कहा, "फिलहाल कोई भी जहाज ईरान के साथ समन्वय किए बिना इस जलडमरूमध्य से नहीं गुजर सकता। जो जहाज ऐसा करने की कोशिश करेंगे, वे ईरान की ओर से घोषित नियमों का उल्लंघन करेंगे और हमारी सशस्त्र सेनाएं उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं।"

आईआरएनए के अनुसार, उप विदेश मंत्री ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को लेकर ईरान और ओमान के बीच बनी एक सहमति का भी जिक्र किया।

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