दुनिया की खबरें: अमेरिका ने पहली बार माना, 'अंतरिक्ष में तैनात किए हथियार', ईरान ने कहा- 'शर्तें पूरी होने तक US...'

एयर फोर्स सेक्रेटरी ट्रॉय मिंक ने यह नहीं बताया कि हथियार क्या हैं या वे कैसे काम करते हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
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अमेरिका ने पहली बार पुष्टि की है कि उसने अंतरिक्ष में हथियार तैनात किए हैं। एयर फोर्स सेक्रेटरी ट्रॉय मिंक ने सोमवार को मैरीलैंड में एयर एंड स्पेस साइबर कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका ने “दुश्मन की कार्रवाई के खिलाफ संयुक्त बल की सुरक्षा करने में सक्षम, कक्षा में तैनात अंतरिक्ष नियंत्रण हथियार” तैनात किए हैं।

मिंक ने यह नहीं बताया कि हथियार क्या हैं या वे कैसे काम करते हैं। अमेरिका ने 2024 में कहा कि रूस एक नया उपग्रह रोधी हथियार बना रहा है जिसे अंतरिक्ष से प्रक्षेपित किया जा सकता है। उस समय व्हाइट हाउस ने कहा था कि खतरा आसन्न नहीं है।

उपग्रह रोधी हथियार के बारे में आई खबरों से हालांकि रूस और चीन की ओर से अंतरिक्ष में मौजूद खतरों को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताएं जाहिर हुईं, क्योंकि अमेरिका की काफी अवसंरचना उपग्रह संचार पर निर्भर है।

अपनी टिप्पणी में मिंक ने यह भी कहा कि वायुसेना अपनी क्षमताओं में और अधिक स्वायत्त प्रणालियां जोड़ रही है और अनुमान जताया कि 2032 तक यह बल ‘‘पूरी तरह अलग’’ नजर आएगा। उदाहरण के लिए, उन्होंने कहा कि एकतरफा हमले वाले ड्रोन तोपखाने की जगह ‘‘मुख्य मारक हथियार’’ बन जाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हम मौजूदा खतरों के खिलाफ अपनी तैयारियों को बढ़ा रहे हैं।’’ ट्रंप ने 2019 में अंतरिक्ष बल (स्पेस फोर्स) का गठन किया था।

ओमान के तट पर लापता भारतीय नाविक की तलाश और बचाव अभियान जारी : विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने मंगलवार को कहा कि ओमान के तट पर रविवार को 14 भारतीयों को ले जा रहे एक कमर्शियल जहाज पर हमले के बाद, लापता भारतीय नाविक की तलाश और बचाव अभियान जारी है।

नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान, विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "लापता नाविक के बारे में बता दें कि यह हमला ओमान के तट के पास हुआ था। यह पनामा के झंडे वाला जहाज था जिस पर 14 भारतीय नागरिक या नाविक सवार थे। इनमें से 13 को बचा लिया गया है और हम अपने नागरिकों को बचाने के लिए ओमान के अधिकारियों का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं। एक भारतीय नागरिक लापता है। वह नाविक जहाज पर ही था। ओमान के अधिकारियों की मदद से खोज और बचाव अभियान जारी है।"

उन्होंने कहा कि ओमान में भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और चल रहे अभियान में ओमान के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है।

एमईए के प्रवक्ता ने कहा, "हम तनाव को तुरंत कम करने और इलाके में शांति लाने के लिए बातचीत और कूटनीति अपनाने की अपनी अपील दोहराते हैं। इसके साथ ही, मैं यह कहना चाहता हूं कि इस इलाके में कमर्शियल शिपिंग, नाविकों, आम नागरिकों और आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना हमें मंजूर नहीं है। हम यह भी अपील करते हैं कि इलाके में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय जलमार्गों से स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही और व्यापार का प्रवाह जल्द से जल्द बहाल किया जाए।"

रविवार को, विदेश मंत्रालय ने ओमान के तट के पास कमर्शियल जहाज एमटी ईआई जीएआइए पर हुए हमले की निंदा की थी। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने कहा कि एक सुपर ऑयल टैंकर, जो जलमार्ग के दक्षिण में 'वर्जित' रास्ते से होर्मुज जलडमरूमध्य (स्टेट्र ऑफ होर्मुज) को पार करने की कोशिश कर रहा था, नौसैनिक बारूदी सुरंगों (नेवल माइन्स) से टकराने के बाद उसमें विस्फोट हो गया और आग लग गई।


जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होती, अमेरिका के साथ बातचीत संभव नहीं: मोहस‍िन रेजाई

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहस‍िन रेजाई ने कहा क‍ि अमेरिका के साथ बातचीत तब तक संभव नहीं है जब तक क‍ि ईरान की शर्तें पूरी नहीं हो जाती।

ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट पर यह बात कही। उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोमवार की टिप्पणी के जवाब में आया।

ट्रंप ने कहा था कि तेहरान 'जल्दी और किसी भी कीमत पर' एक समझौता करना चाहता है और अमेरिका उसके साथ फिर से बातचीत शुरू कर सकता है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "कमजोर पड़ चुका ईरान जल्दी और बुरी तरह एक समझौता करना चाहता है। अमेरिका बातचीत करेगा या नहीं, इसका फैसला मैं करूंगा। हालांकि हम इस विचार के लिए खुले हैं।"

इसके जवाब में मोहसिन रेजाई ने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति के बदलते बयानों से भ्रमित मत होइए। कभी वे कहते हैं 'कोई बातचीत नहीं होगी' और फिर कहते हैं 'हम बातचीत के लिए तैयार हैं।' तेल और समुद्री मार्गों से जुड़े दांव अब बदल चुके हैं। बाद में नुकसान नियंत्रित करने की कोशिश आने वाली स्थितियों को नहीं रोक पाएगी।"

उन्होंने स्‍पष्‍ट क‍िया, "जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। बस यही अंतिम बात है।"

स‍िन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में चल रहे संघर्षों को खत्म करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर तनाव कम करने की बात शामिल थी।

इस समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत करके अंतिम समझौते तक पहुंचना था। यह अवधि 17 अगस्त को समाप्त हो चुकी है, लेकिन हाल के तनाव बढ़ने के बाद इन वार्ताओं का भविष्य अभी स्पष्ट नहीं है।

इसी बीच, सोमवार रात ईरान के दक्षिणी तट के पास ड्रोन हमले में दो मछली पकड़ने वाली नौकाओं को निशाना बनाया गया।

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