दुनिया की खबरें: अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के दावों को किया खारिज, दो जहाजों पर हमले का बताया 'सच'
अमेरिका की ओर से किए गए हमले के जवाब में बुधवार सुबह ईरान ने खाड़ी में अमेरिका के दो युद्धपोतों और आठ तेल टैंकरों पर हमले का दावा किया था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के दो अमेरिकी जहाजों पर हमले के दावे को सिरे से खारिज किया है। बुधवार को एक बयान जारी कर 'सच' बताया है।
सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फैक्ट बताया। उनके मुताबिक ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) फोर्स ने दावा किया कि उन्होंने मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी नौसेना के दो डिस्ट्रॉयर पर हमला किया। यह पूरी तरह से गलत है।
सच्चाई से रूबरू कराते हुए आगे कहा, "अमेरिकी नौसेना के किसी भी युद्धपोत पर हमला नहीं हुआ है; आईआरजीसी के सभी हमले नाकाम रहे। वहीं, अमेरिकी सेना ने पिछले एक हफ्ते में ईरान के 10 टैंकरों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है। ये जहाज एक ऐसे अरबों डॉलर के 'शैडो नेटवर्क' का हिस्सा थे जो आईआरजीसी को फंड देता है, और ईरान इनकी रक्षा नहीं कर सकता।"
अमेरिका की ओर से किए गए हमले के जवाब में बुधवार सुबह ईरान ने खाड़ी में अमेरिका के दो युद्धपोतों और आठ तेल टैंकरों पर हमले का दावा किया था। साथ ही ये भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के प्रतिबंधित और असुरक्षित इलाके से गुजरने की कोशिश कर रहे दस जहाजों को भी निशाना बनाया। आईआरजीसी के मुताबिक यह हमले उस जवाबी कार्रवाई के तहत किए गए, जिसमें ईरान के पांच टैंकरों को निशाना बनाकर नष्ट किया गया।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने ईरान की सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को कहा कि उसने खाड़ी में अमेरिका के दो जहाजों और आठ तेल टैंकरों पर हमला किया।
जॉर्डन पर ईरान का हमला बेवजह और बेरहम: सऊदी अरब
पश्चिम एशिया संकट बरकरार है। अमेरिका के ईरान पर हमले और फिर जवाबी कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में टकराव की स्थिति बनी हुई है। ईरान ने जवाबी हमले जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए। इस अटैक की सऊदी अरब ने कड़ी आलोचना की है। बुधवार को विदेश मंत्रालय ने एक्स पर जारी एक बयान में जॉर्डन पर ईरान के लगातार हमलों को 'बेवजह और बेरहम' करार दिया।
बयान में कहा गया है कि सऊदी अरब, ईरान की आक्रामकता के खिलाफ जॉर्डन द्वारा उठाए जाने वाले "सभी कदमों" में उसके साथ खड़ा है।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, ईरान की इन आक्रामक कार्रवाइयों के जवाब में जॉर्डन और वहां के लोगों द्वारा उठाए गए सभी कदमों के साथ अपनी एकजुटता दोहराता है। सऊदी अरब के अनुसार, ईरान के ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और अच्छे पड़ोसी के तौर पर रहने के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन हैं।
मंत्रालय ने बयान में आगे कहा कि वह जॉर्डन और इस क्षेत्र के अन्य देशों पर ईरान के बेखौफ हमलों को तुरंत रोकने की जरूरत पर जोर देता है और क्षेत्र के देशों व लोगों की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर कदम उठाने का आह्वान करता है।
अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं।
जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने 18 मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिर गईं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इसे लेकर एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा, "ईरान ने पिछले दो दिनों में अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया।"
लेबनान पर इजरायल का बढ़ता हमला निन्दनीय: यूएन महासचिव गुटेरेस
दक्षिणी लेबनान में इजरायल के बढ़ते हमले और सैन्य अभियानों पर संयुक्त राष्ट्र ने फिक्र जाहिर की है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बुधवार को इस पर दुख जताते हुए तेल अवीव से अपील की कि वो अपने ऑपरेशन पर विराम लगाए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एंटोनियो गुटेरेस ने लिखा, "मैं आम लोगों की मौत, लोगों को जगह खाली करने के आदेशों से होने वाली परेशानी और विस्थापन, तथा बड़े पैमाने पर हुई तबाही और बर्बादी के दृश्यों को देख दुखी हूं और इसकी निंदा करता हूं।"
गुटेरेस ने "लड़ाई को तुरंत रोकने" की अपील करते हुए इजरायल से अपील की कि वो लेबनान के इलाके से अपनी सेना हटा ले।
उन्होंने आगे लिखा, "ताकत का इस्तेमाल करने का अधिकार सिर्फ लेबनान की सरकार के पास होना चाहिए। मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं कि वे लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें।"
आम नागरिकों और नागरिक ठिकानों की हर समय सुरक्षा की जानी चाहिए। वे हमले का लक्ष्य नहीं होना चाहिए और उन पर किए गए हमले स्वीकार्य नहीं हैं।
शांति अपील करते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र हिंसा खत्म करने, नागरिकों की सुरक्षा करने और इस संघर्ष का स्थायी समाधान खोजने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
पिछले काफी अरसे से हिज्बुल्लाह के खिलाफ एक्शन की बात करते हुए दक्षिणी लेबनान को इजरायल टारगेट करता आया है। वहीं, बुधवार को भी गोला बारूद से हमले की खबर आई है। इजरायली सेना ने नबातीह प्रांत के दक्षिणी लेबनानी कस्बों, कफर रेमन और कफर तेबनित पर तोपों से गोले दागे।
यूक्रेन पर रूसी हमले जारी, रिहायशी इमारत पर ड्रोन से किया हमला, दो की मौत
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि बुधवार सुबह कीव में एक रूसी ड्रोन ने रिहायशी इमारत को निशाना बनाया, जिसमें 4 लोग घायल हुए। वहीं ओडेसा में मोल्दोवा सीमा पर स्थित अंतरराष्ट्रीय चौकी पर रातभर हुए हमले में दो लोगों की मौत और तीन घायल हुए हैं। जेलेंस्की ने कहा कि रूस रोजाना हमले कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया बेहद कम है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट पर हमले की जानकारी साझा की।
जेलेंस्की ने पोस्ट में लिखा, ''आज सुबह कीव में एक रूसी ड्रोन ने एक रिहायशी बहुमंजिला इमारत को निशाना बनाया। इस हमले में चार लोग घायल हो गए। हमेशा की तरह, हमारे बचावकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और अब आग पर काबू पा लिया गया है।''
उन्होंने बताया कि रातभर ओडेसा ओब्लास्ट में मोल्दोवा की सीमा पर स्थित अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकी 'स्टारोकोजाचे' पर हमला किया गया। वहां का संचालन फिलहाल रोक दिया गया है। दुर्भाग्य से इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। बचावकर्मियों ने 16 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। मैं उन लोगों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं जिन्होंने अपनी जान गंवाई है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने बताया कि रूस के हमलों के बाद निप्रो, मायकोलाइव, जापोरिज्जिया, खार्किव ओब्लास्ट, जाइटॉमिर ओब्लास्ट और कीव ओब्लास्ट में भी नुकसान की स्थिति से निपटने का काम जारी है।
जेलेंस्की ने कहा कि दुर्भाग्य से, इन हमलों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया बहुत कम रही है, जबकि ये हमले लगभग हर दिन लोगों की जान ले रहे हैं। इसका जवाब दिया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस आक्रामकता को यहीं और अभी रोकना होगा, ताकि यह और आगे न फैले। मॉस्को को यह नहीं सोचना चाहिए कि मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए आतंक फैलाने पर उसे कोई सजा या परिणाम नहीं भुगतने पड़ेंगे।
'सोशल मीडिया एल्गोरिदम प्लान' से नाराज व्हाइट हाउस ने ऑस्ट्रेलिया को दी चेतावनी
अमेरिकी सरकार ऑस्ट्रेलिया के 'सोशल मीडिया एल्गोरिदम प्लान' से नाराज है। ट्रंप प्रशासन ने ऐतराज जताते हुए बयान जारी किया जिसमें स्पष्ट किया गया कि व्हाइट हाउस अमेरिका के प्रमुख टेक्नोलॉजी सेक्टर पर जबरन वसूली संबंधी मसौदे के खिलाफ है।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने मंगलवार को अपने प्रस्तावित विधेयक का मसौदा जारी किया। इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बच्चों को खाने से जुड़े विकारों, स्त्री-विरोधी सामग्री, अपराध के महिमामंडन, दुर्व्यवहार और साइबरबुलिंग जैसी हानिकारक सामग्री से बचाने के लिए कदम उठाने होंगे। वयस्कों और बच्चों दोनों को अवैध सामग्री से भी सुरक्षा प्रदान करनी होगी।
मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया की घोषणा के 24 घंटे से भी कम समय में व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी किया। प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन "व्यापारिक साझेदारों" के सामने अपनी चिंताएं रखेगा।
देसाई ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यापारिक साझेदारों को अमेरिका के प्रमुख टेक्नोलॉजी सेक्टर पर डिजिटल सर्विस टैक्स, जुर्माना और जबरन वसूली के अन्य तरीके लागू करने के खिलाफ साफ तौर पर चेतावनी दी है।" उन्होंने कहा, “प्रशासन अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ इन मुद्दों को उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
वहीं, ऑस्ट्रेलिया की कम्युनिकेशन मिनिस्टर अनिका वेल्स ने इस बयान को "सामान्य" बताते हुए ज्यादा तवज्जो नहीं दी और ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टर न्यूज24 को बताया कि उन्हें अमेरिकी प्रतिनिधि से सीधे तौर पर ऐसी कोई चेतावनी नहीं मिली है।
वेल्स ने कहा, "हम एक संप्रभु देश हैं। हमें ऑस्ट्रेलियाई माता-पिता और बच्चों की रक्षा करने का अधिकार है और हम ऐसा करेंगे।"
मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने संसद भवन में पत्रकारों से बातचीत में प्रस्तावित 'डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर कानून' की घोषणा की। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को 16 वर्ष से अधिक उम्र के यूजर्स को एल्गोरिदम आधारित फीड से बाहर निकलने का विकल्प देना होगा।
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