दुनिया की खबरें: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शांति समझौता और रूस के भीषण हमलों से दहला यूक्रे
ट्रंप ने रविवार शाम को ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “इस्लामिक गणराज्य ईरान के साथ समझौते को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सभी को बधाई।” इस समझौते से वैश्विक ऊर्जा बाजारों ने राहत की सांस ली है।
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शांति समझौता, 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा हस्ताक्षर
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान ने अपने 107 दिन लंबे युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को कहा कि उनका देश स्विट्जरलैंड में 19 जून को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर के लिए आयोजित किये जाने वाले समारोह की मेजबानी करेगा। शांति समझौते का विवरण हालांकि तत्काल उपलब्ध नहीं कराया गया है।
ट्रंप ने रविवार शाम को ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “इस्लामिक गणराज्य ईरान के साथ समझौते को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सभी को बधाई।” इस समझौते से वैश्विक ऊर्जा बाजारों ने राहत की सांस ली है।
उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त कर दी जाएगी।
ट्रंप ने कहा, “मैं मुक्त आवाजाही के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल पूरी तरह खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की मंजूरी देता हूं। दुनिया के जहाजों, इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह होने दो।”
हालांकि, एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य शुक्रवार को समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने के बाद ही खोला जाएगा। यह समझौता ऐसे दिन हुआ जब ट्रंप अपना 80वां जन्मदिन मना रहे थे।
इस शांति समझौते को अंतिम रूप दिये जाने के साथ ही युद्ध और कूटनीति से भरे एक उथल-पुथल भरे हफ़्ते का समापन हुआ; इस दौरान अमेरिका ने ईरान पर हमले किए और अमेरिकी राष्ट्रपति ने आखिरी समय पर इस्लामी गणराज्य के तेल निर्यात केंद्र, खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की अपनी धमकी वापस ले ली।
ट्रंप ने कहा, “यह समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगा। मुझसे पहले कई राष्ट्रपतियों ने ईरान के साथ शांति स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन सभी विफल रहे।”
उन्होंने कहा, “क्षेत्र के नेताओं को पहली बार ऐसा राष्ट्रपति मिला है, जो उन्हें वास्तविक शांति दिलाने में मदद कर सकता है। शुक्रवार को हुए समझौते के बाद जलडमरूमध्य के खुलने और बारूदी सुरंगें हटाने का काम शुरू होने से, इस क्षेत्र और दुनिया के लिए फिर से तेल की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।”
ईरान को अमेरिका पर भरोसा कम! बाघेई ने याद दिलाया इतिहास, बोले- 'लंबा रास्ता तय करना होगा'
अमेरिका-ईरान शांति समझौता जिनेवा में 19 जून को संपन्न होगा। समझौते का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कर चुके हैं, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ संसद में बोल चुके हैं तो ईरान ने भी पहली प्रतिक्रिया स्वरूप एमओयू को लेकर सकारात्मक बयान दिया। हालांकि ईरान अभी भी अमेरिका को लेकर आश्वस्त नहीं है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट कहा कि रास्ता लंबा है। उन्होंने दशकों पुराना इतिहास भी याद दिलाया।
बाघेई ने कहा कि अमेरिका के साथ भरोसा बहाल करने के लिए “लंबा रास्ता” तय करना होगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच अविश्वास की जड़ें दशकों पुरानी हैं।
बाघेई ने कहा, “हम अमेरिका पर भरोसा नहीं करते क्योंकि हमारे पास उनके साथ पहले के अनुभव हैं जो 1953 तक जाते हैं। उस समय से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच भरोसा समाप्त हो चुका है और यह अविश्वास गहराई तक स्थापित हो गया है।"
ईरानी प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिका को ईरान का विश्वास हासिल करने के लिए लंबा और कठिन कूटनीतिक रास्ता अपनाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं ने दोनों देशों के संबंधों को स्थायी रूप से प्रभावित किया है।
ईरान का अविश्वास 1953 की घटनाओं से जुड़ा है, जब पश्चिमी देशों द्वारा कथित तख्तापलट कराया गया था। इस कार्रवाई में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को सत्ता से हटाया गया था। कथित तौर पर यूके और अमेरिका ने 1953 में ईरान के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग की सरकार गिरा दी थी और उन्हें पद से हटाकर कैद कर लिया गया था। उन पर तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कराने के खिलाफ पश्चिमी देश इकट्ठे हुए थे।
इसके साथ ही ईरान ने लेबनान को शांति वार्ता की अहम शर्त में शामिल करने का दावा किया है। बाघेई ने कहा कि लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता अमेरिका के साथ हुए समझौते की प्रमुख शर्तों में शामिल है। समझौते में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने और लेबनान की स्वतंत्रता व उसकी सीमाओं का सम्मान करने पर जोर दिया गया है।
रूस के भीषण हमलों से दहला यूक्रेन, कीव की ऐतिहासिक कैथेड्रल चर्च में आग, 11 लोगों की मौत
रूस ने रविवार की रात 70 मिसाइलों और 611 ड्रोन की मदद से यूक्रेन पर ताबड़तोड़ हमले किए। इन हमलों में 60 से अधिक मिसाइलें तो राजधानी कीव में ही दागी गईं। इन हमलों में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि कीव में 35 लोग घायल हुए हैं। जबकि, पूरे देश में 53 लोगों के घायल होने की खबर है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया, ''कीव में रूसी हमलों के बाद की स्थिति से निपटने का काम लगातार जारी है। यही हाल खार्किव में भी है। बीती रात रूस ने केवल राजधानी कीव पर ही 60 से अधिक मिसाइलें दागीं। पूरे यूक्रेन में कुल मिलाकर 70 मिसाइलें और 611 ड्रोन छोड़े गए।''
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि फिलहाल जानकारी के अनुसार, कीव में 35 लोग घायल हुए हैं। पूरे देश में 53 लोग घायल हुए हैं और रूस के इस बड़े हमले में 11 लोगों की मौत की खबर है। मैं सभी पीड़ित परिवारों और उनके प्रियजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि रूसी हमले के कारण कीव-पेचेर्स्क लावरा में स्थित डॉर्मिशन कैथेड्रल में आग लग गई। इस चर्च का इतिहास 11वीं सदी का है। आज की स्थिति में यह ईसाई संस्कृति के खिलाफ रूस की ओर से किए गए सबसे बड़े अपराधों में से एक माना जा सकता है। राज्य आपातकालीन सेवा ने कैथेड्रल की छत पर लगी आग को बुझा दिया है।
उन्होंने कहा कि खार्किव में रूस ने फिर से उन बचावकर्मियों को निशाना बनाया जो एक औद्योगिक परिसर पर हुए हमले के बाद लगी आग बुझाने का काम कर रहे थे। फिलहाल, यह पुष्टि हुई है कि दुखद रूप से पांच लोगों की मौत हो गई है। मैं उनके परिवारों और प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।
नीपर में रूस ने रेलवे स्टेशन, एक कॉलेज और औद्योगिक स्थलों को निशाना बनाया है। इसके अलावा कई अन्य शहरों और समुदायों पर भी हमले हुए। कीव, नीपर, डोनेट्स्क, जापोरिज्जिया, सुमी और मायकोलाइव क्षेत्र भी हमलों की चपेट में आए।
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