दुनिया की खबरें: अमेरिका की तरह चीन भी ताइवान पर करेगा कब्जा? और ईरान में विरोध-प्रदर्शनों में अब तक 35 लोगों की मौत

क्या ट्रंप दुनिया के किसी अन्य देश के साथ भी ऐसा कर सकते हैं या अमेरिका के नक्शे कदम पर चलते हुए चीन भी ताइवान पर अपना कब्जा कर सकता है?

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद भारत पर एक बार फिर से टैरिफ लगाने की धमकी दी। अमेरिका ने जिस तरह से वेनेजुएला के खिलाफ कार्रवाई की, उसको लेकर बड़ा प्रश्न चिन्ह यह है कि क्या ट्रंप दुनिया के किसी अन्य देश के साथ भी ऐसा कर सकते हैं या अमेरिका के नक्शे कदम पर चलते हुए चीन भी ताइवान पर अपना कब्जा कर सकता है? आइए जानते हैं कि इस पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन की क्या राय है?

पूर्व अमेरिकी एनएसए जॉन बोल्टन ने ट्रंप की तरफ से भारत को लेकर की गई टिप्पणी पर कहा, "मुझे लगता है कि काफी समय से यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा है कि बातचीत पूरी होने से पहले ही भारत के खिलाफ टैरिफ की घोषणा कर दी गई, लेकिन चीन या तुर्किये या किसी और पर रूसी तेल खरीदने के लिए टैरिफ लगाना दुर्भाग्यपूर्ण रहा है। मैं चाहता हूं कि रिश्ते फिर से करीबी हों क्योंकि चीन की दबदबे की चाहत के बारे में चिंता करने में हमारा आपसी हित है।"

क्या ट्रंप दुनिया के अन्य देशों के साथ भी ऐसा कर सकते हैं? इस पर अमेरिका के पूर्व एनएसए ने कहा, "यहां के हालात याद रखें। यह ऐसी स्थिति है, जहां मादुरो ने 2024 का चुनाव धांधली से जीता। विपक्षी नेता, मारिया कैरिना मचाडो, ने मादुरो को सत्ता में बने रहने से रोकने की कोशिश के लिए नोबेल शांति पुरस्कार जीता। यह बहुत कुछ वैसा ही है, जैसा 1990 में हुआ था, जब पनामा के चुने हुए राष्ट्रपति, गुइलेर्मो अंडारा, ने अमेरिका से तानाशाह मैनुअल नोरिएगा के खिलाफ दखल देने के लिए कहा था।"

उन्होंने कहा, "एक नेता को पकड़ना तब अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ नहीं है जब नेता नाजायज हो। यह तब नहीं जब नेता ने हमला या दूसरे ऐसे काम किए हों, जो अमेरिका की सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डालते हों। दूसरे लोग दावा कर सकते हैं कि वे भी यही कर रहे हैं, लेकिन आपको उस दावे को फैक्ट्स के आधार पर सही ठहराना होगा। सिर्फ वेनेजुएला में जो कुछ है, उसकी वजह से रूस का यूक्रेन पर हमला करना सही नहीं है। यह बिल्कुल अलग स्थिति है। वह बिना किसी उकसावे के किया गया हमला था। ताइवान पर चीन के हमले को उन्हीं वजहों से सही नहीं ठहराया जा सकता।"

उन्होंने कहा, "चीन ने यह साफ कर दिया है कि वे ताइवान को धमका रहे हैं। वे लंबे समय से ऐसा कर रहे हैं। ताइवान के लोगों ने बार-बार आजाद और निष्पक्ष चुनावों में अपनी बात रखी है। वे मेनलैंड में वापस शामिल नहीं होना चाहते। वे अब खुद को चीनी नहीं मानते, जैसा कि ताइवान में हुए कई सर्वे से साबित हुआ है। यह एक आजाद और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार है और मुझे लगता है कि ताइवान के लोगों को खुद पर राज करने का हक है।"

उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि चीन की ये धमकियां अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए असली खतरा हैं।

दूसरी ओर, वेनेजुएला पर कब्जा करने के बाद, अब अमेरिकी राष्ट्रपति ग्रीनलैंड पर कब्जा करने पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने खुद यह टिप्पणी की है। इसे लेकर जॉन बोल्टन ने कहा, "इसे ही हम अमेरिका में ट्रोलिंग कहते हैं। ट्रंप का मोलभाव करने का तरीका है। कुछ अजीब कहना और लोगों को चौंकाना, और फिर अगर उन्हें अपनी मांगी हुई रकम का 30 फीसदी मिल जाए तो वे खुश हो जाते हैं। मुझे लगता है कि यह मेरे लिए बिल्कुल भी सोचा नहीं जा सकता कि वे ग्रीनलैंड के खिलाफ सैन्य बल का इस्तेमाल करेंगे। अगर उन्होंने ऐसा किया, तो यह अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ी गलती होगी। इसका मतलब नाटो अलायंस का खत्म होना भी हो सकता है। यह एक आपदा होगी।"

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में हुई बढ़ोतरी

बांग्लादेश में कट्टरपंथी युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की दिसंबर में हुई हत्या के बाद अशांति के बीच हालिया हफ्तों में हिंसा के शिकार अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोगों का यहां उल्लेख किया जा रहा है।

मोनी चक्रवर्ती:

किराना दुकान के 40 वर्षीय मालिक की पांच जनवरी की रात को पलाश उप ज़िला के चारसिंदूर बाज़ार में अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से वार करके हत्या कर दी।

राणा प्रताप बैरागी:

बर्फ बनाने की फैक्टरी के मालिक और नरैल से प्रकाशित होने वाले 'दैनिक बीडी खबर' नामक समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक राणा प्रताप बैरागी (38) की पांच जनवरी को दक्षिणी बांग्लादेश के जेस्सोर जिले में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

पुलिस ने बैरागी को प्रतिबंधित ‘पूर्वी बांग्ला कम्युनिस्ट पार्टी’ का सक्रिय सदस्य बताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह पार्टी के आंतरिक कलह का शिकार हुए।

पुलिस ने बताया कि बैरागी के खिलाफ दो थानों में चार मामले दर्ज हैं। हालांकि, इन मामलों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

खोकोन चंद्र दास:

दुकान बंद कर घर लौट रहे हिंदू व्यापारी दास (50) पर 31 दिसंबर की रात बदमाशों ने बेरहमी से हमला किया, उन पर धारदार हथियार से वार किए और फिर आग लगा दी।

दवाओं की दुकान और मोबाइल बैंकिंग करने वाले दास की तीन दिन बाद तीन जनवरी को अस्पताल में मृत्यु हो गई।

अमृत ​​मंडल:

राजबारी कस्बे के पांग्शा उप ज़िला में 24 दिसंबर को जबरन वसूली के आरोप में उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।

मंडल ने कथित तौर पर एक आपराधिक गिरोह बनाया था और जबरन वसूली और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। स्थानीय लोगों ने तब उस पर हमला किया जब उसने अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर एक निवासी से धन वसूलने की कोशिश की।

पुलिस के अनुसार, मंडल के खिलाफ हत्या समेत कम से कम दो मामले दर्ज थे।

दीपू चंद्र दास:

कपड़ा कारखाने में काम करने वाले दीपू चंद्र दास (25) की 18 दिसंबर को मैमनसिंह शहर के बलुका में कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। बाद में उनके शव को आग लगा दी गई।

दास की हत्या में कथित संलिप्तता के आरोप में कम से कम 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।


इंडोनेशिया में अचानक आई बाढ़ से कम से कम 16 लोगों की मौत

इंडोनेशिया के नॉर्थ सुलावेसी प्रांत में भारी बारिश के कारण आई अचानक बाढ़ में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी ने बताया कि मानसून की बारिश के कई दिनों के बाद सोमवार तड़के नदियों के तटबंध टूट गए, जिससे चट्टानों के मलबे के साथ कीचड़ बहने लगा। उन्होंने बताया कि इससे सियाउ तागुलंदांग बियारो जिले में कई लोग बह गए और गांव जलमग्न हो गए।

मुहारी ने बताया कि पुलिस और सेना के सहयोग से आपातकालीन बचाव कर्मी इंडोनेशिया के चौथे सबसे बड़े द्वीप सुलावेसी के उत्तरी छोर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित छोटे से द्वीप सियाउ के तबाह हुए चार गांवों में तैनात किए गए हैं। कुछ स्थानों पर क्षतिग्रस्त सड़कों और बाधित संचार सुविधाओं के कारण आवागमन बाधित है।

मुहारी ने बताया कि पहाड़ियों से नीचे गिरे मलबे और कीचड़ में कम से कम सात घर बह गए और 140 से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा। बाढ़ के कारण 680 से अधिक निवासियों को चर्चों और सार्वजनिक भवनों में बने अस्थायी आश्रयों में शरण लेनी पड़ी।

नॉर्थ सुलावेसी खोज और बचाव कार्यालय के प्रवक्ता नूरियाडियन गुमेलेंग ने बताया कि मंगलवार को मौसम में सुधार होने और बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही बचाव दल ने 16 शव बरामद किए और उन क्षेत्रों में तीन अन्य लापता निवासियों की तलाश जारी रखी।

ईरान: विरोध-प्रदर्शनों में अब तक ‘35 लोगों की मौत, 1,200 हिरासत में

ईरान में अर्थव्यवस्था की खस्ताहाल स्थिति और राजनीतिक दमन को लेकर एक हफ्ते से अधिक समय से जारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,200 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। एक मानवाधिकार एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

इस बीच, ईरान सरकार ने देश के पश्चिमी प्रांत ईलम में हिंसा की बात स्वीकार की है, जहां सुरक्षाबलों ने एक अस्पताल पर कथित तौर पर धावा बोला और आम नागरिकों पर गोलीबारी भी की।

अमेरिका की ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ ने बताया कि ईरान के 31 प्रांतों में से 27 में 250 से अधिक स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। उसने बताया कि इन विरोध-प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 29 प्रदर्शनकारी, चार बच्चे और ईरानी सुरक्षा बल के दो सदस्य मारे गए हैं।

यह एजेंसी ईरान के भीतर मौजूद कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के जरिये आंकड़े जुटाती है और अशांति के पिछले दौर के दौरान इसकी रिपोर्टिंग सही साबित हुई थी।

अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ ने सोमवार देर रात बताया कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान लगभग 250 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल रेवोल्यूशनरी गार्ड बल के 45 सदस्य घायल हुए हैं।

हालांकि, ईरान सरकार ने विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में कोई समग्र आंकड़े या जानकारी प्रदान नहीं की है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सोमवार रात आंतरिक मामलों के मंत्रालय को ईलम प्रांत में हो रही घटनाओं की “गहन जांच” के लिए एक विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया।

राजधानी तेहरान से लगभग 515 किलोमीटर दूर ईलम प्रांत के मालेकशाही काउंटी से सामने आए वीडियो में सुरक्षाबलों को आम नागरिकों पर कथित तौर पर गोलीबारी करते देखा जा सकता है।

राष्ट्रपति कार्यालय ने “ईलम के एक अस्पताल में हुई उस घटना को भी स्वीकार किया”, जिससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं। इन वीडियो में दंगा रोधी गियर पहने सुरक्षाबलों को कथित तौर पर उस अस्पताल पर धावा बोलते देखा जा सकता है, जहां विरोध-प्रदर्शनों में घायल प्रदर्शनकारियों को भर्ती कराया गया है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने ईलम के अस्पताल पर ईरानी सुरक्षाबलों की कार्रवाई की कड़ी निंदा की और उसे “आपराधिक कृत्य” करार दिया।

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