सरकारी बैंकों के लाखों अफसरों की पीएम मोदी को ना, कहा- हमसे चौकीदार बनने की उम्मीद मत करिए

पीएम मोदी ने कुछ समय पहले एक ट्वीट कर डॉक्टरों, वकिलों, इंजीनियरों, शिक्षकों, आईटी प्रोफेशनल और बैंकरों से ‘मैं भी चौकीदार, अभियान से जुड़ने का आग्रह किया था। इसी के जवाब में सरकारी बैकों के 3.20 लाख अफसरों ने पीएम मोदी को कहा है कि हमसे चौकीदार बनने की उम्मीद मत पालिए।

फोटो: सोशल मीडिया
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सरकारी बैंकों के लाखों अफसरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान से जुड़ने से इनकार कर दिया है। बता दें कि पीएम मोदी ने कुछ समय पहले एक ट्वीट कर डॉक्टरों, वकिलों, इंजीनियरों, शिक्षकों, आईटी प्रोफेशनल और बैंकरों से ‘मैं भी चौकीदार, अभियान से जुड़ने का आग्रह किया था। इसी के जवाब में सरकारी बैकों के 3.20 लाख अफसरों ने पीएम मोदी को कहा है कि हमसे चौकीदार बनने की उम्मीद मत पालिए।

दरअसल, सार्वजनिक क्षेत्र बैंक ऑफिसर्स के सबसे बड़े यूनियन ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉनफेडरेशन (एआईबीओसी) ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि सरकार तब तक बैंकिंग बिरादरी से अपने इस अभियान में शामिल होने की उम्मीद न करे, जब तक की उनकी मांगे पूरी नहीं होती। यूनियन सरकारी बैंकों के वियल का विरोध कर रही है। साथ ही वेतन संशोधन और कर्मचारियों की भर्ती संबंधित मुद्दों पर सरकार से बात करने की मांग कर रही है।

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनियन ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉनफेडरेशन में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के करीब 3 लाख 20 हजार अफसर जुड़े हुए हैं, जो कुल बैंक अफसरों का 85 प्रतिशत है। पत्र में कहा गया है, “पूरी बैंकिंग बिरादरी के साथ करीब 10 लाख बैंक ऑफिसर्स और कर्मचारियों के मुख्य मुद्दे पर बात किए बिना, आपको यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि बैंकिंग बिरादरी आपके राजनीतिक अभियान ‘मैं भी चौकीदार’में शामिल हो जाए।”

एआईबीओसी विजया बैंक, देना बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के विलय का विरोध कर रहा है। यूनियन ने इस विलय के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की है। इनके अलावा बैंक कर्मचारियों की कमी और वेतन में समानता जैसी कई मुद्दे हैं जिसको लेकर यूनियन सरकार से नाराज है।

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Published: 27 Mar 2019, 8:39 PM