आरएसएस के मंच से प्रणब मुखर्जी के भाषण की 10 प्रमुख बातें

गुरुवार को पूरे देश की निगाहें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के भाषण पर लगी हुई थीं। अपने भाषण में प्रणब मुखर्जी ने कहा कि विविधतता हमारी सबसे बड़ी ताकत है और भेदभाव और नफरत से भारत की पहचान को खतरा है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि मैं यहां देश और देशभक्ति समझाने आया हूं। मैं यहां देश की बात करने आया हूं। आइये देखते हैं प्रणब मुखर्जी के भाषण की 10 प्रमुख बातें।

  1. आरएसएस के मंच से अपने संबोधन में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, “मैं यहां देश और देशभक्ति समझाने आया हूं। मैं यहां देश की बात करने आया हूं।”
  2. उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान है। देशभक्ति का मतलब देश की प्रगति में आस्था है। भेदभाव और नफरत से हमारी पहचान को खतरा है। सहिष्णुता ही हमारी ताकत है। धर्म कभी भारत की पहचान नहीं बन सकता, नफरत से देश को सिर्फ नुकसान है। भारत के दरवाजे सबके लिए खुले हैं।
  3. प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत की आत्मा सहिष्णुता में बसती है। यह देश अपने अलग-अलग रंगों, भाषाओं की वजह से बना है, यही इसकी पहचान हैं।.
  4. उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसा गांधी जी ने समझाया था कि भारतीय राष्ट्रवाद कोई भिन्न नहीं, न ही आक्रामक और न ही विनाशकारी है।
  5. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि पंडित नेहरू ने 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' में साफ लिखा है कि, "मुझे विश्वास है कि राष्ट्रवाद केवल हिंदू, मुसलमानों, सिखों और भारत के अन्य समूहों के विचारधारात्मक एकता से ही बाहर आ सकता है। भेदभाव और नफरत से भारत की पहचान को खतरा है।”
  6. उन्होंने कहा कि विजेता होने के बावजूद सम्राट अशोक शांति का पुजारी था। 1800 साल तक भारत दुनिया के ज्ञान का केंद्र रहा है। भारत के द्वार सभी के लिए खुले हैं।
  7. प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सहनशीलता ही हमारे समाज का आधार है। हमारी सबकी एक ही पहचान 'भारतीयता' है। हम विविधता में एकता को देखते हैं।
  8. उन्होंने कहा कि समाज के अंदर हर विषय पर चर्चा होनी चाहिए। हम किसी विचार से सहमत हो भी सकते हैं और नहीं भी हो सकते हैं, लेकिन चर्चा होनी चाहिए।
  9. पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि विचारों में समानता के लिए संवाद होना बेहद जरूरी है। बातचीत से हर समस्या का समाधान संभव है। शांति से ही समृद्धि मिलेगी।
  10. प्रणब मुखर्जी ने कहा कि बहुत पहले कौटिल्य ने कहा था कि प्रजा की खुशी में ही राजा की खुशी निहित होती है। प्रजा का हित ही राजा का हित होता है।
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