कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन को 72 फीसदी लोग मान रहे कारगर, सर्व में खुलासा

सर्वे ने वैक्सीन हिचकिचाहट का पता लगाने के लिए कुल 9,14,164 प्रतिक्रियाएं प्राप्त कीं। सर्वेक्षण के अनुसार, 8.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने वायरस के खिलाफ टीका लगवाने में झिझक व्यक्त की है।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

एक सर्वेक्षण में शामिल कुल 72 फीसदी लोगों का मानना है कि भारतीय कोविड के टीके कोरोनावायरस के खिलाफ सुरक्षित और प्रभावी हैं। हालांकि, 60 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि भारतीय टीके विदेशी कोविड-19 टीकों के बराबर हैं। लोकेशन आधारित सोशल नेटवकिर्ंग ऐप पब्लिक द्वारा पब्लिक की आवाज पोल नामक सर्वे किया गया है, ताकि वैक्सीन की हिचकिचाहट के बारे में लोगों की राय जानी जा सके। पोल ने वैक्सीन हिचकिचाहट का पता लगाने के लिए कुल 9,14,164 प्रतिक्रियाएं प्राप्त कीं। सर्वेक्षण के अनुसार, 8.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने वायरस के खिलाफ टीका लगवाने में झिझक व्यक्त की है।

कुल अनुमानों के अनुसार, उत्तरदाताओं का एक बड़ा हिस्सा वैक्सीन लेना सुरक्षित मानता है। लगभग 72 प्रतिशत ²ढ़ता से सहमत हैं कि टीके सुरक्षित और प्रभावी हैं और 60 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं का मानना है कि भारतीय टीके विदेशी कोविड-19 टीकों के बराबर हैं। लगभग 25 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें पहले ही दोनों खुराकों का टीका लगाया जा चुका है।

हालांकि अधिकांश उत्तरदाताओं ने टीकों का समर्थन किया है और सर्वेक्षण से पता चला कि 18 प्रतिशत उत्तरदाताओं को अभी भी एक भी खुराक नहीं मिली है, जबकि 8.8 प्रतिशत टीके प्राप्त करने के बारे में सुनिश्चित नहीं दिखे। केवल 4 प्रतिशत ने टीकों के प्रति अपना अविश्वास व्यक्त किया।

वैक्सीन नहीं लेने के लिए लगभग 34 प्रतिशत लोगों ने साइड इफेक्ट का संभावित जोखिम बताया। सर्वे के निष्कर्षों के अनुसार, टीके में हिचकिचाहट पैदा करने वाले अन्य कारक 20 प्रतिशत लोगों के लिए विश्वास की कमी, 14 प्रतिशत के लिए स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और 11 प्रतिशत के लिए कभी कोई टीका नहीं लेना है।


सर्वेक्षण के अनुसार, इस संबंध में समुदाय और संस्थागत प्रोत्साहन दोनों आवश्यक हैं। उत्तरदाताओं में से 24 प्रतिशत ने कहा कि टीकों की प्रभावशीलता में उनका विश्वास मित्रों और परिवार की दी गई सलाह पर आधारित है, जबकि 25 प्रतिशत ने कहा कि वे स्वास्थ्य विशेषज्ञों के कहे पर चलेंगे।

प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाओं में सूचना की जीवंतता का संकेत मिलता है, क्योंकि 23 प्रतिशत का मानना है कि टीकों के बारे में अधिक जानकारी तक पहुंच आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद कर सकती है।

टीकों के बारे में जानकारी और अपडेट प्राप्त करने के सवाल पर, 59 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने मीडिया को एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में चिह्न्ति किया, जबकि 15 प्रतिशत सरकारी विज्ञापनों पर भरोसा करते दिखाई दिए हैं। लगभग 13 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे मित्रों और परिवार पर निर्भर हैं, जबकि 11 प्रतिशत ने सूचना प्राप्त करने के साधन के रूप में अन्य स्रोतों का हवाला दिया।

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