अफगान बलों ने तालिबान को दिया करारा जवाब, हवाई हमले में 33 आतंकवादियों का मार गिराया

देश छोड़ रहे अमेरिका और नाटो सैनिकों ने भी गुरुवार को अफगानिस्तान के कंधार और हेलमंद प्रांत में कई हवाई हमले कर तालिबान को भारी नुकसान पहुंचाया। इन हमलों से तिलमिलाए तालिबान ने इसे दोहा समझौते का उल्लंघन करार देते हुए परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

फोटोः IANS
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नवजीवन डेस्क

अफगानिस्तान में लगातार मजबूत होती जा रही तालिबान की पकड़ के बीच अफगान वायु सेना ने करारा जवाब देते हुए दो प्रांतों में किए गए हवाई हमलों में 33 तालिबान आतंकवादियों को मार गिराया है और 17 से ज्यादा घायल हुए हैं। अफगान रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जावजान प्रांत में, प्रांतीय राजधानी शिबरघन के बाहरी इलाके में मुर्गब और हसन तब्बिन गांवों में तालिबान के ठिकानों को युद्धक विमानों द्वारा निशाना बनाया गया जिसमें 19 आतंकवादी मारे गए और 15 घायल हो गए।

इसके अलावा मंत्रालय ने बताया कि हेलमंद प्रांत की राजधानी लश्कर गाह के बाहरी इलाके में वायु सेना के हमले में 14 तालिबान आतंकवादियों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। इसमें कहा गया है कि तीन वाहन, छह मोटरसाइकिल, दो बंकर और बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी नष्ट हो गए।

इस बीच देश छोड़ रहे अमेरिका और नाटो सैनिकों ने भी गुरुवार को अफगानिस्तान के कंधार और हेलमंद प्रांतों में कई हवाई हमले कर तालिबान को भारी नुकसान पहुंचाया है। वहीं इन हमलों से तिलमिलाए तालिबान ने इसे दोहा समझौते का उल्लंघन करार दिया। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि गुरुवार को किए गए हवाई हमले के परिणाम भुगतने होंगे।


तालिबान ने अपने बयान में कहा, अमेरिकी कब्जे वाले बलों ने कंधार और हेलमंद में हवाई हमले किए हैं, जिसमें नागरिक और कुछ मुजाहिदीन हताहत हुए हैं। हमलों को बर्बर बताते हुए, आतंकवादी समूह ने उन्हें अमेरिका और तालिबान के बीच समझौते का स्पष्ट उल्लंघन बताया।
बयान में कहा कि, अशरफ गनी (राष्ट्रपति) ने हाल ही में घोषणा की है कि उन्होंने अगले छह महीनों में बड़े ऑपरेशन की योजना बनाई है।

रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने कहा कि इस अवधि के दौरान सभी सैन्य विकास की जिम्मेदारी गनी प्रशासन के नेताओं पर आ जाएगी। मुजाहिद ने कहा कि लड़ाके अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों की रक्षा करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकारी बल युद्ध पर जोर देते हैं तो विद्रोही रक्षात्मक मुद्रा में नहीं रहेंगे।

तालिबान और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के बीच वापसी समझौते के तहत, सभी विदेशी सैनिकों को मई 2021 तक अफगानिस्तान छोड़ना था। लेकिन अप्रैल में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि सभी अमेरिकी सैनिकों को 11 सितंबर तक स्वदेश लाया जाएगा। यह एक ऐसा निर्णय है, जिसकी तालिबान ने कड़ी आलोचना की है।

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