अयोध्या फैसले के बाद अमन की गवाह बनी यूपी की राजधानी लखनऊ, हर साल की तरह इस साल भी निकलेगा जुलूस-ए-मोहम्मदी

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पूरे देश में अमन चैन कायम रहा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शहर भी इस शांति का गवाह बना। इसीलिए हर साल ईद मीलादुन्नबी के मौके पर निकलने वाला जुलूस परंपरागत तरीके से इस साल भी निकाला जाएगा।

फोटो: सोशल मीडिया
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असद रिज़वी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अयोध्या विवाद के फ़ैसले के बाद शांति का माहौल बना हुआ है। फ़ैसले को लेकर लोगों में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कोई फ़ैसले को संतुलित मानता है तो किसी को अब काशी-मथुरा में अयोध्या प्रकरण जैसा कुछ होने का डर सता रहा है। वहीं सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने साफ़ कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका नहीं दायर की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला राम मंदिर के पक्ष में आने बाद से लोगों की नज़र इस बात टिकी हुई थी कि इसके बाद अल्पसंख्यक समुदाय का अगला क़ानूनी क़दम क्या होगा। शाम होते-होते सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने अयोध्या विवाद पर आये फ़ैसले का स्वागत करने का ऐलान किया। बोर्ड के अध्यक्ष ज़ुफ़र फ़ारूक़ी ने कहा की वह इस मामले में पुनर्विचार याचिका दाख़िल नहीं करेंगे और अगर कोई याचिका दायर करता है तो उससे बोर्ड का कोई लेना-देना नहीं होगा।

उधर, बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी के संयोजक ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से संतुष्ट नहीं है। ज़फ़रयाब जिलानी के मुताबिक, “आज आए फ़ैसले के ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका दाख़िल कि जाएगी।“

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका अगर दायर होती है तो यह इस केस से जुड़े हर पक्ष संवैधानिक अधिकार है। इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार और पिछले कई दशकों से अयोध्या विवाद पर नज़र रखने वाले हुसैन अफ़सर कहते हैं की मुस्लिम पक्ष को संविधान के अनुसार पूरा हक़ है कि अगर वह फ़ैसले से सहमत नहीं है तो वह पुनःविचार के लिए दोबारा कोर्ट का दरवाज़े पर दस्तक दे। हुसैन अफ़सर कहते हैं विवादित भूमि के फ़ैसले के बाद अब अयोध्या प्रकरण के आरोपियों का मुक़दमा फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलना चाहिए, ताकि जो भी दोषी हो उसे सज़ा दी जा सके।

समाज के विभिन वर्गों में अयोध्या मामले पर आया फ़ैसला चर्चा का विषय बना रहा। समाज सेविका तहिरा हसन कहती है कि उनको आशंका है की अब काशी और मथुरा में 1992 जैसा प्रकरण ना दोहराया जाये। उन्होंने कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद पर नहीं बल्कि भारत के संविधान पर हमला हुआ था। तहिरा कहती हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सभी पक्षों को सम्मान करना चाहिए है।

वहीं अमित सूर्यवंशी कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सौहार्द की दृष्टि से बेहतरीन फ़ैसला दिया है। पेशे से वक़ील अमित सूर्यवंशी मानते हैं हाई कोर्ट के फ़ैसले (2010) से बेहतर और संतुलित फ़ैसला सामने आया है, जो समाज में सौहार्द पैदा करेगा क्योंकि कोर्ट ने अगर विवादित भूमि एक पक्ष को दी है तो दूसरे पक्ष को भी ज़मीन देने को कहा है।

वहीं कुछ लोगों का कहना है की संघ ने अयोध्या विवाद को राजनीतिक लाभ लेने के लिए जितना बड़ा बना दिया है, मुद्दा उतना बड़ा नहीं था। बैंक कर्मचारी रहे एम के रॉय कहते हैं की समाज में लोगों को इस मुद्दे में अब ज़्यादा दिलचस्पी नहीं रह गई थी। लेकिन संघ इसको अपनी राजनीति और अल्पसंख्यकों पर दबाव बनाने के लिए जीवित रखना चाहता है।

रविवार को ईद मीलादुन्नबी है, लेकिन एक दिन पहले रविवार को बाजारों में बीते बरसों जैसी चहल-पहल नजर नहीं आई। इस मौके पर हर साल जुलूस-ए-मोहम्मदी निकलने वाली कमेटी ने जुलूस को परम्परागत ढंग से निकलने का फ़ैसला किया है। राजधानी के चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात है। ईद मिलाद नबी के कार्यक्रमों को देखते हुए काफ़ी सतर्कता बरती जा रही है। इसके अलावा ज़िलाधिकारी के आदेश से राजधानी के सभी स्कूल सोमवार तक बंद रहेंगे।

उधर, हज़रतगंज इलाके से सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने वाले रमेश पाल को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। एसएसपी लखनऊ के मीडिया इंचार्ज आशीष दिवेदी के अनुसार साइबर क्राइम सेल ने साम्प्रदायिक माहौल ख़राब करने की कोशिश करने वाले रमेश पाल को हिरासत में लेकर उसके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कया है।

इससे पहले शनिवार सुबह जब सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद का फ़ैसला सुनाना शुरू किया तो उस वक़्त से ही प्रशासन-पुलिस के वाहने सारे दिन सड़क पर दौड़ते रहे। फ़ैसला आने के बाद किसी भी पक्ष की तरफ़ से कोई ऐसी प्रतिक्रिया नहीं हुई जिसे से शहर का अमन चैन ख़राब होता। प्रशासन पूरी तरह से आगामी त्यौहारो 10 नवंबर को ईद मिलाद नबी और 12 को गंगा स्नान (कार्तिक पूर्णिमा) के मद्देनज़र प्रशासन अभी भी सतर्क हैं।

Published: 10 Nov 2019, 9:59 AM
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