बंगाल में हार के बाद ममता ने बीजेपी विरोधी ताकतों से एकजुट होने का आह्वान किया, लेफ्ट से भी की अपील
ममता ने कहा कि यह सोचने का समय नहीं है। हमारा पहला दुश्मन बीजेपी है। मैं सभी बीजेपी विरोधी ताकतों, सभी छात्र और युवा संगठनों और सभी गैर-सरकारी संगठनों से एकजुट होने का आह्वान करती हूं। हम बीजेपी के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाना चाहते हैं।

पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी की करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूरे देश में बीजेपी को रोकने के लिए सामान्य विचारधारा की पार्टियों को एकजुट होने का आह्वान किया। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने सभी बीजेपी विरोधी राजनीतिक ताकतों- चाहे वे वामपंथी हों या धुर वामपंथी सभी से एकजुट होने की अपील की। ममता ने विपक्षी दलों से जुड़े सभी छात्र संघों और गैर सरकारी संगठनों से भी बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।
रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर कालीघाट स्थित अपने आवास के सामने एक सभा को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, "राज्य में हर जगह चुनाव के बाद हिंसा की गूंज सुनाई दे रही है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद राज्य भर में तृणमूल कार्यकर्ताओं और समर्थकों को प्रताड़ित किया जा रहा है। कई जगहों पर गुंडागर्दी हो रही है, बीजेपी में बुरे तत्व घुस गए हैं।
टीएमसी प्रमुख ने कहा कि यह सोचने का समय नहीं है कि दुश्मन का दुश्मन मेरा दोस्त है, हमारा पहला दुश्मन बीजेपी है। मैं सभी बीजेपी विरोधी ताकतों, सभी छात्र और युवा संगठनों, और सभी गैर-सरकारी संगठनों से एकजुट होने का आह्वान करती हूं। हम बीजेपी के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यहां तक कि उनकी कभी कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही सीपीआई (एम) और पश्चिम बंगाल में उसके नेतृत्व वाला वाम मोर्चा का भी बीजेपी के खिलाफ पश्चिम बंगाल में बनने वाले इस संयुक्त मोर्चे में स्वागत योग्य हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "वामपंथी, धुर-वामपंथी और कोई भी अन्य राष्ट्रीय पार्टी स्वागत योग्य है। आइए हम सब एक साथ आएं, एकजुट हों। कोई भी मुझसे संपर्क करने के लिए स्वागत योग्य है। अब से मैं हर दिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक अपने कार्यालय में रहूंगी।"
ममता बनर्जी के इस आह्वान पर सीधे तौर पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो सदस्य और पार्टी के पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मो. सलीम ने गुरुदेव की दो पंक्तियां पढ़ीं- जीबोनो जोखोन शुकाये जाई, करुणा धाराई एशो" (जब जीवन सूख लगे तो करुणा की धारा बनकर आओ)। टैगोर की इस महत्वपूर्ण कविता का महत्व यह है कि ममता बनर्जी को अन्य बीजेपी-विरोधी ताकतों की अहमियत का एहसास तब हुआ, जब हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा और खुद ममता बनर्जी को भी भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी से करारी शिकस्त मिली।
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