दिल्ली के होटलों के बाद टैक्सियों में भी चीनी नागरिकों की नो इंट्री, संगठन ने नहीं बिठाने का लिया फैसला

लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में देश के 20 जवानों की शहादत के बाद से देश भर मेंं लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। इसी क्रम में अब दिल्ली टैक्सी टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ने चीन के नागरिकों के लिए अपनी सेवा बंद कर दी है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में देश के 20 जवानों की शहादत के बाद से देश भर मेंंलोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। इसी क्रम में अब विभिन्न व्यावसायों और सेवा उद्योगों ने चीनी नागरिकों से किसी तरह का कारोबार नहीं करने का फैसला लिया है। इसी क्रम में दिल्ली टैक्सी टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ने मंगलवार को एक निर्णय के तहत चीन के नागरिकों के लिए अपनी सेवा बंद कर दी है।

यानी अब इस एसोसिएशन के अंदर आने वाली सभी टैक्सियों में चीन के नागरिकों को बैठने की इजाजत नहीं होगी। दिल्ली टैक्सी टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के अंदर 400 टैक्सी कंपनियां और लगभग 50,000 टैक्सियां आती हैं। दिल्ली टैक्सी टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने बताया, हमारे सैनिकों के साथ जो व्यवहार किया गया है, उसके बाद हमने यह फैसला लिया है कि हम किसी भी चीनी नागरिक को अपनी टैक्सी की सेवा नही देंगे। हम केंद्र सरकार से यह गुजारिश करते हैं कि चीन के सभी सामानों का देश में बहिष्कार किया जाए।

गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली होटल रेस्टोरेंट एंड ओनर्स एसोसिएशन ने भी यह फैसला लिया था कि दिल्ली के होटल और गेस्ट हाउस में अब किसी भी चीनी व्यक्ति को ठहराया नहीं जाएगा। दिल्ली में लगभग 3,000 बजट होटल और गेस्ट हाउस हैं, जिनमें लगभग 75 हजार कमरे हैं। अब इन सभी होटलों में चीनी नागरिकों को कमरा नहीं मिल सकेगा।

इससे पहले कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) चीनी सामानों के बहिष्कार का आह्वान कर चुका है। इसी क्रम में दिल्ली होटल रेस्टोरेंट एंड ओनर्स एसोसिएशन (डीएचआरओए) भी ऐलान कर चुकी है कि दिल्ली के बजट होटलों और गेस्ट हाउस में अब किसी भी चीनी व्यक्ति को ठहराया नहीं जाएगा। एसोसिएशन ने बतायाअब से दिल्ली के किसी भी बजट होटल अथवा गेस्ट हाउस में किसी भी चीनी व्यक्ति को ठहराया नहीं जाएगा।

वहीं कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने बताया था कि कैट के चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के आह्वान से देश के विभिन्न वर्गों के लोग जुड़ रहे हैं। इसी सिलसिले में कैट अब ट्रांसपोर्टर, किसान, हॉकर्स, लघु उद्योग, उपभोक्ता, स्वउद्यमी, महिला उद्यमी के राष्ट्रीय संगठनों से संपर्क कर उन्हें भी इस अभियान से जोड़ेगा।

इस बीच देश में चीन के खिलाफ गुस्सा देखते हुए कल भारत सरकार ने टिकटॉक, यूसी ब्राउजर समेत 59 चीनी एप पर बैन लगा दिया है। इनमें हेलो, वीचैट, यूसी न्यूज जैसे प्रमुख एप भी शामिल हैं।

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