लखीमपुर में इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी मौन साधे बैठे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- मल्लिकार्जुन खड़गे

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में इतनी बड़ी घटना होने पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौन साधे बैठे हैं। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को संसद तक लेकर जाएंगे और सरकारी शह पर हुई इस घटना का हर स्तर पर विरोध करेंगे।

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नवजीवन डेस्क

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में इतनी बड़ी घटना होने पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौन साधे बैठे हैं। उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ वह लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को संसद तक लेकर जाएंगे और सरकारी शह पर जो घटनाएं घटी हैं, उसका हम सब हर स्तर पर यथासंभव विरोध करेंगे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर 2021 को शांतिपूर्ण विरोध कर रहे चार किसानों की नृशंस हत्या और उसके बाद घटी घटनाओं की मैं कड़ी निंदा करता हूं। इस कांड में कई किसान घायल भी हुए हैं। शांतिपूर्वक विरोध कर रहे किसानों को वाहनों से कुचल कर उनके खिलाफ जो अमानवीय कार्यवाही केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे और उनके साथियों ने की है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी बड़ा आघात है। लेकिन राज्य प्रशासन ने इस घटना के दोषियों पर कार्यवाही की जगह लीपापोती की है।

उन्होंने कहा कि, "किसान परिवारों को सांत्वना देने लखीमपुर खीरी जा रही श्रीमती प्रियंका गांधी को बिना वारंट अवैध रूप से हिरासत में लेकर राज्य सरकार ने बेहद निंदनीय कार्य किया है। उनके साथ अशिष्ट व्यवहार किया गया। जबकि प्रियंका जी कोई कानून नहीं तोड़ रही थीं बल्कि पीड़ित किसान परिवारों से मिल कर शोक संतप्त लोगों को सांत्वना देने और इस अमानवीय कृत्य की निंदा करने के लिए वहां जा रही थीं। उत्तर प्रदेश में जो कुछ घटा वह संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की आजादी और मौलिक अधिकारों का हनन है।"

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि, "मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं, जो इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मौन साधे बैठे रहे। किसानों के प्रति उनका क्या नजरिया है, उनकी संवेदनहीनता और इस बात से जाहिर है कि उन्होंने न केवल किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने से इनकार कर दिया, जिसके खिलाफ ये बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, उन्होंने विरोध करने वाले किसानों की शिकायतों और चिंताओं को सुनने, शांत करने और उनका समाधान करने के लिए भी कुछ नहीं किया।"

उन्होंने कहा कि, "यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हमारे संविधान में निहित लोकतांत्रिक भावना का स्पष्ट अपमान है। हम लोगों के हितों की रक्षा करने और प्राचीन संवैधानिक सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने में पीएम मोदी और उनकी सरकार की इस घोर लापरवाही की कड़ी निंदा करते हैं।"


खड़गे ने कहा कि निर्वाचित जन प्रतिनिधि होने के नाते हम अन्नदाताओं को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर लड़ेंगे। लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों के लिए इन मुद्दों को संसद तक ले जाएंगे। देश इस समय असहिष्णु, किसान विरोधी, निरंकुश और जनविरोधी सरकार के शिकंजे में है। वे किसानों और आम लोगों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह से उदासीन हैं।

उन्होंने कहा कि, "यह सरकार उन लोगों की आवाज को दबाने के लिए सभी संभव कोशिश कर रही है जो अन्याय के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। विपक्ष की आवाज को दबाने के इन प्रयासों की मैं कड़ी निंदा करता हूँ। लखीमपुर खीरी में जो सरकारी शह पर जैसी घटनाएँ घटी हैं, उसका हम सब हर स्तर पर यथासंभव विरोध करेंगे।"

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