जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल पर ‘पद्मावत’ का साया, करणी सेना के विरोध के बाद नहीं आएंगे जावेद अख्तर और प्रसून जोशी

फिल्म ‘पद्मावत’ का असर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल पर भी पड़ रहा है। करणी सेना के विरोध के बाद जावेद अख्तर और प्रसून जोशी ने फेस्ट‍िवल से किनारा कर लिया है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल’ का 11वां संस्करण का 25 जनवरी से 29 जनवरी तक जयपुर के दिग्गी पैलेस होटल में चलेगा। लेकिन संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ के विरोध का असर फेस्ट‍िवल पर भी पड़ रहा है। करणी सेना ने ऐलान किया कि वह इस फेस्ट‍िवल में जावेद अख्तर और प्रसून जोशी का विरोध करेगा। इसके बाद इन दोनों ने फेस्ट‍िवल से किनारा कर लिया है। अब जावेद अख्तर और प्रसून जोशी लिटरेचर फेस्ट‍िवल में नहीं आएंगे।

करणी सेना लेखक जावेद अख्तर और प्रसून जोशी को पहले ही धमकी दे चुकी है। करणी सेना ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में वे आते हैं तो उनका वही हाल करेंगे, जो संजय लीला भंसाली का किया था। इस धमकी के बाद ये फैसला लिया गया कि अब ये दोनों जयपुर लिटरेचर फेस्ट‍िवल में शामिल नहीं होंगे।

जावेद अख्तर ने पहले फिल्म ‘पद्मावत’ विवाद पर कहा था, “राजपूत-रजवाड़े अंग्रेजों से तो कभी लड़े नहीं और अब सड़कों पर उतर रहे हैं। ये जो राणा और महाराजा लोग हैं, वे 200 साल तक अंग्रेज के दरबार में खड़े रहे थे।” उन्होंने यह भी कहा था, “उस समय उनकी राजपूती कहां थी? ये तो राजा ही इसीलिए हैं, क्योंकि इन्होंने अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार की थी।'' इसके साथ ही जावेद ने पद्मावती की कहानी को नकली बताया था।

सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी का विरोध भी करणी सेना कर रही है। करणी सेना का कहना है कि उन्होंने फिल्म ‘पद्मावत’ में कुछ कांट-छांट के बाद इस फिल्म को रिलीज करने की इजाजत दे दी थी।

इस साल इस महोत्सव में लगभग 35 देशों से 350 से भी अधिक लेखक, चिंतक, राजनेता, पत्रकार, सिनेमा और कला और संस्कृति जगत के लोग भाग ले रहे हैं। इनमें कई लोग नोबेल पुरस्कार, मैन बुकर, पुलित्जर पुरस्कार, पद्म विभूषण और साहित्य अकादमी जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित शख्सियत हैं और वे 15 से अधिक भारतीय और 20 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का प्रतिनिधित्त्व करते हैं।

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