असम: नागरिक संशोधन विधेयक का विरोध जारी, असम आंदोलनकारियों के परिजनों ने लौटाया बीजेपी सरकार का दिया हुआ सम्मान

असम आंदोलन में लड़ते हुए जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों ने बुधवार को नागरिकता विधेयक का विरोध करते हुए बीजेपी सरकार द्वारा दिये गये स्मृति चिन्ह लौटा दिया।

फोटो: सोशल मीडिया 
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नवजीवन डेस्क

असम में नागरिक (संशोधन) विधेयक को लेकर विरोध लगातार जारी है। खबरों के मुताबिक, असम आंदोलन में लड़ते हुए जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों ने बुधवार को नागरिकता विधेयक का विरोध करते हुए बीजेपी सरकार का दिया हुआ स्मृति चिन्ह लौटा दिया है।

खबरों के मुताबिक, असम आंदोलनकारियों के परिजनों के संगठन ‘एसपीएसपी’ के सदस्य नागरिक संशोधन विधेयक के विरोध में यहां ‘ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन’ के मुख्यालय ‘शहीद न्यास’ में इकठ्ठा हुए। परिजनों ने राज्य सरकार सरकार द्वारा 855 लोंगों को मरणोपरांत दिये गये स्मृति चिन्ह विरोध के रुप में लौटाने का फैसला किया। बता दें कि सर्वानंद सोनोवाल सरकार ने 10 दिसंबर 2016 को एक कार्यक्रम में हर दिवंगत व्यक्ति के परिवार को पांच लाख रुपये और स्मृति चिन्ह दिये थे।

संगठन के प्रमुख राजन डेका ने कहा, ‘‘नागरिकता विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है। यह हम सबके लिए बहुत शर्म की बात है। अगर विधेयक कानून बनता है तो असम आंदोलन के 800 से अधिक शहीदों का बलिदान महत्वहीन हो जाएगा।’’

क्या है नागरिक संशोधन विधायक

नागरिक (संशोधन) विधेयक के मुताबिक अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को बिना वैध दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए उनके निवास काल को 11 वर्ष से घटाकर 6 साल कर दिया गया है। यानी अब ये शरणार्थी 6 साल बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस बिल के तहत सरकार अवैध प्रवासियों की परिभाषा बदलने के प्रयास में है।

Published: 31 Jan 2019, 11:12 AM
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