आंदोलनजीवी-परजीवी, खालिस्तानी-पाकिस्तानी, जानें कब-कब पीएम और बीजेपी ने किसानों को किया अपमानित

केंद्र सरकार ने पिछले साल सितंबर में तीन कृषि कानून पास किये थे, जिसके खिलाफ हजारों किसान आंदोलन पर बैठ गए थे। लेकिन पीएम मोदी, उनके मंत्री और बीजेपी नेता हमेशा यही कहते रहे कि इन कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अचानक से कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर एक बार फिर सबको चौंकाने की कोशिश की। दरअसल, केंद्र सरकार ने पिछले साल सितंबर में तीन कृषि कानून पास किये थे, जिसके खिलाफ हजारों किसान आंदोलन पर बैठ गए थे। लेकिन पीएम मोदी, उनके मंत्री और बीजेपी नेता हमेशा यही कहते रहे कि इन कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा। इस दौरान इन लोगों ने आंदोलकारी किसानों को भी निशाने पर लिया और कई बार उन्हें अपमानित करने वाले बयान दिए। लेकिन आज के ऐलान के बाद पीएम, मंत्रियों और बीजेपी नेताओं के सारे बयान गलत साबित हुए। आईए जानते हैं पीएम मोदी और बीजेपी नेताओं ने कब-कब क्या-क्या कहा?

विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के शुरू होने के बाद 29 नवंबर 2020 में पीएम मोदी ने मन की बात में किसानों को लेकर बात की। इस दौरान उन्होंने नए कृषि कानूनों से किसानों को होने वाले फायदे गिनाए थे। पीएम मोदी ने कहा था कि किसानों की दशकों पुरानी मांगों को पूरा करने के लिए नया कानून लाया गया है। फिर, 30 नवंबर 2020 को किसानों के आंदोलन के बीच पीएम मोदी वाराणसी पहुंचे, जहां उन्हेंने फिर दोहराया कि किसानों को भ्रमित किया जा रहा। इस दौरान पीएम मोदी ने विपक्ष पर भी हमला किया और कहा कि विपक्ष कृषि कानूनों को लेकर झूठ फैला रहा है।

इसके बाद 15 दिसंबर 2020 को पीएम मोदी ने गुजरात के कच्छ में किसानों से संवाद किया, जिसमें कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों के हित में काम कर रही है, लेकिन विपक्ष इसे लेकर भ्रम फैला रहा है। पीएम मोदी ने कहा था कि दिल्ली के पास जमा हुए किसानों को साजिश के तहत भ्रमित किया जा रहा है। फिर 18 दिसंबर 2020 को पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश के रायसेन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किसान कल्याण कार्यक्रम को संबोधित किया, जिसमें विपक्ष पर झूठ फैलाने और किसानों को भ्रमित करने का आरोप लगाया।

फिर 25 दिसंबर 2020 को पीएम मोदी ने किसानों से संवाद कार्यक्रम में साफ कर दिया था कि केंद्र सरकार कानून वापस नहीं लेने वाली और कृषि सुधार से जुड़े कानूनों को लागू करेगी। उन्होंने विपक्ष पर किसानों के कंधे से फायरिंग करने का आरोप लगाया था। इसके बाद 30 जनवरी 2021 को पीएम मोदी ने संकेत दिए थे कि कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे। उन्होने कहा था कि जहां तक किसानों के मुद्दों की बात है, हम लगातार किसान नेताओं से बातचीत करने के लिए तैयार हैं। मैं बस एक फोन कॉल भर दूर हूं। इसी दौरान हुए संसद सत्र में पीएम मोदी ने किसान आंदोलन पर निशाना साधते हुए कहा था इसमें आंदोलनजीवी परजीवी की तरह होते हैं।


सिर्फ पीएण मोदी ने ही नहीं बल्कि उनकी सरकार में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 18 जून 2021 को कहा कि सरकार किसानों से बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा। अगर किसान संगठन कृषि कानूनों को वापस लेने के अलावा कोई बात करना चाहते हैं, तो हम तैयार हैं। फिर 1 जुलाई 2021 को उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर कृषि कानून वापस नहीं होगा, लेकिन बातचीत के सभी रास्ते खुले रहेंगे।

इसके बाद 8 जुलाई 2021 को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि केंद्र सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेगी। हालांकि, सरकार इस मुद्दे पर किसानों से चर्चा और उनकी समस्याओं को सुनने के लिए तैयार है। तोमर ने किसानों से विरोध प्रदर्शन खत्म करने की अपील की थी। इतना ही नहीं इस दौरान एक बार नरेंद्र तोमर ने कहा था कि भीड़ इकट्ठा होने से कानून वापस नहीं होते हैं।

इनके अलावा समय-समय पर अन्य मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने भी किसानों पर हमला बोला और ना जाने उन्हें क्या-क्या कहा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा किसान आंदोलन माओवादी विचारधारा से प्रेरित लोगों के हाथों में चला गया है। केंद्रीय मंत्री वी के सिंह ने कहा कि तस्वीरों में कई लोग किसान नहीं लग रहे हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने कहा कि आंदोलन के पीछे पाकिस्तान और चीन का हाथ।

इनके अलावा दिल्ली से बीजेपी के सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि आंदोलनकारी टुकड़े-टुकड़े गैंग के हैं। आंदोलन में किसानों की मौत पर बीजेपी सांसद रतनलाल ने कहा कि इन किसानों को यहीं मरना था। हरियाणा के मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि आंदोलन के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। वहीं कर्नाटक की बीजेपी सरकार के कृषि मंत्री बीसी पाटिल ने कहा कि कायर हैं आत्महत्या करने वाले किसान।

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