ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने का समझौता, इज़रायल को अनदेखा कर ट्रंप ने दी ईरान को बड़ी रियायतें

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने का समझौता हो गया है। इस समझौते में इज़रायल को पूरी तरह नजरंदाज कर दिया गया है। साथ ही ईरान को बहुत सारी रियायतें मिली हैं। समझौते कथित तौर पर सामने आए 14 सूत्री मसौदे से लगता है कि ईरान का पलड़ा वाकई भारी रहा है।

फ्रांस में ईरान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए "मेमोरैंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग" (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने AFP को बताया कि जी-7 समिट के बाद, ट्रंप ने वर्साय के महल में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ डिनर के दौरान इस पर हस्ताक्षर किए। समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा कि इस दस्तावेज़ को "राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप दिया गया।"

एक अधिकारी ने बताया कि रविवार, 14 जून को अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी गालीबाफ ने मेमो पर ट्रंप की मौजूदगी में डिजिटल रूप से इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार इस बात से इनकार करते रहे हैं कि अमेरिका किसी डील के तहत ईरान को पैसे भेज रहा है, उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान फ्रीज़ की गई ईरान की संपत्ति उसे वापस कर दी जानी चाहिए। ट्रंप ने कहा, "यह हमारा पैसा नहीं है, यह उनका पैसा है और हमने इसे फ्रीज़ किया था।" उन्होंने आगे कहा कि, "मुझे लगता है कि किसी न किसी समय हमें इसे वापस करना ही होगा।" ट्रंप ने कहा कि उन्होंने फ्रीज़ की गई संपत्ति को अमेरिका के पास रखने के बारे में सोचा था, लेकिन इससे अमेरिकी डॉलर की मज़बूती पर बुरा असर पड़ता। जी-7 समिट के आखिर में उन्होंने कहा, "अगर हम इसे वापस नहीं करते, तो कोई भी कभी डॉलर में निवेश नहीं करता।"


दोनों राष्ट्रपतियों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होने से कुछ घंटे पहले, सीएनएन ने दावा किया कि उसे इस समझौते का मसौदा उसके पास है, जिसे अभी तक आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है। सीएनएन ने इस 14-सूत्रीय समझौते की जानकारी दी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सार्वजनिक किए जाने से पहले इसके मसौदे में बदलाव हो सकता है। इससे पहले ब्लूमबर्ग ने भी 14-सूत्रीय समझौते की जानकारी जारी की थी, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने उन जानकारियों पर सवाल उठाए थे और तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने इस बारे में रिपोर्ट दी थी।

सीएनएन से बात करते हुए, अमेरिकी अधिकारियों ने उस मेमो की अहमियत को कम करके आंका। उन्होंने इसे एक "राजनीतिक दस्तावेज़" बताया जो ईरान द्वारा अमेरिका से किए गए अहम बैक-चैनल वादों को नहीं दिखाता, खासकर तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर। सीएनएन को मिले ड्राफ्ट के बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने ड्राफ्ट के लीक हुए मसौदे को गलत बताया।

लेकिन, अगर सीएनएन को मिला और उनके द्वारा पेश किया गया ड्राफ्ट सही है, तो ऐसा लगता है कि अमेरिका ने ईरान के मुकाबले ज़्यादा रियायतें दी हैं। इन रियायतों में सबसे अहम यह है कि अमेरिका ने इज़राइल को उसके हाल पर छोड़ दिया है। असल में इज़राइल को नज़रअंदाज़ किया गया है, उसे ड्राफ्ट एग्रीमेंट देखने तक नहीं दिया गया और लेबनान व बेरूत पर बमबारी रोकने के लिए कहा गया। एमओयू के सबसे पहले बिंदू में 'लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने' की बात कही गई है।

इज़राइल में इस समझौते को लेकर गुस्सा और निराशा देखी गई। इज़राइल में 'चैनल 14' के एंकर और जाने-माने दक्षिणपंथी कमेंटेटर ताल मीर ने राष्ट्रपति ट्रंप के मध्य-पूर्व वार्ताकारों—जेरेड कुशनर (जो राष्ट्रपति के दामाद भी हैं) और स्टीव विटकॉफ—की आलोचना की। उन्होंने ईरान डील पर बातचीत करने और अपने "असली घर" से मुंह मोड़ने के लिए उनकी निंदा की। डिप्लोमैटिक कॉरेस्पोंडेंट गाइ अज़्रिएल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "मैं अब पुष्टि कर सकता हूं कि इज़राइल ने ईरान समझौता ज्ञापन को देखने का औपचारिक अनुरोध किया था, जिसे ठुकरा दिया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से इतने अहम मुद्दे पर करीबी सहयोगियों के बीच यह एक उल्लेखनीय और बेहद असामान्य घटनाक्रम है।"


खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि हिज़्बुल्लाह के मामले में वे बेहतर कर सकते हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि उन्हें अपना बचाव नहीं करना चाहिए, मैं बस यह कह रहा हूँ कि — जब दो ड्रोन रेगिस्तान में गिराए जाते हैं और उनसे कोई नुकसान नहीं होता, तो बेरूत में इमारतें गिराने की ज़रूरत नहीं होती। वे बेहतर बर्ताव कर सकते हैं। और सच कहूं तो, वे बेहतर काम कर सकते हैं — मैं उन्हें पसंद करता हूँ, एक पार्टनर के तौर पर वे बहुत अच्छे रहे हैं, लेकिन हिज़्बुल्लाह के मामले में वे कहीं बेहतर काम कर सकते हैं।"

ईरानी मूल के कमेंटेटर ट्रिटा पारसी यह कहे बिना नहीं रह सके, "अमेरिका-ईरान डील में इज़राइल का सबसे ज़्यादा नुकसान होना एक तरह से 'पोएटिक जस्टिस' (कर्मों का फल) है, क्योंकि इज़राइल ने ही अपनी मर्ज़ी से शुरू हुई इस बेवकूफी भरी जंग के लिए ज़ोरदार पैरवी की थी। और अगर इसके चलते नेतन्याहू चुनाव हार जाते हैं और जेल चले जाते हैं, तो यह न्याय लगभग पूरा हो जाएगा।"

सीएनएन को मिले समझौते की मुख्य बातें ये हैं:

1.       लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना

2.       ईरान और अमेरिका एक-दूसरे की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान करेंगे

3.       दोनों देश बातचीत करेंगे और 60 दिनों के अंदर किसी अंतिम समझौते पर पहुँचेंगे; आपसी सहमति से इस समय को बढ़ाया जा सकता है

4.       अमेरिका तुरंत नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेगा और 'अंतिम समझौते' के 30 दिनों के भीतर अपनी सेनाएं वापस बुला लेगा

5.       ईरान 30 दिनों के भीतर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी बाधाओं और बारूदी सुरंगों (माइंस) को हटाएगा

6.       अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए एक व्यापक योजना बनाएंगे और कम से कम 300 अरब डॉलर की फंडिंग सुनिश्चित करेंगे

7.       अमेरिका, ईरान पर अपने, आईएईए और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए सभी तरह के प्रतिबंधों को खत्म करने का वादा करता है

8.       ईरान फिर से कहता है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

9.       ईरान और अमेरिका परमाणु कार्यक्रम, नए प्रतिबंधों और नई सैन्य तैनाती को लेकर यथास्थिति बनाए रखेंगे

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