दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना हुआ दूभर, हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’, अगले 3 दिन और खराब होंगे हालात
एयर क्वालिटी इंडेक्स के हवाले से बताया है कि पीएम 2.5 और पीएम 10 बेदह खराब स्तर पर पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता और खराब होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है।

दिल्ली में हवा की क्वालिटी इस मौसम में पहली बार बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई है और कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर हो गया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स के हवाले से बताया है कि पीएम 2.5 और पीएम 10 बेदह खराब स्तर पर पहुंच गया है। पीएम 2.5 का स्तर बढ़कर 224 तो पीएम 10 का स्तर 272 पहुंच गया है, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि दिल्ली की हवा बेहद खराब हो चुकी है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता के और खराब होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है।
मंगलवार रात से ही दिल्ली का एयर इंडेक्स 300 से ऊपर चल रहा है। एनसीआर के अधिकतर जिलों में भी पिछले दो दिनों से इसी स्तर की हवा में लोग सांस ले रहे हैं। ऐसे में अब ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के अगले चरण के प्रावधान लागू करने की तैयारी हो रही है। ग्रेप के तहत डीजल जनरेटर पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, इसलिए होटलों आदि में लकड़ी और कोयले के प्रयोग पर रोक लग सकती है। साथ ही सार्वजनिक वाहन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए डीटीसी और मेट्रो को अपने फेरे बढ़ाने होंगे।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ते ही दिल्ली सरकार ने फिर से पराली को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। सरकार का कहना है कि पड़ोसी राज्यों में फसलों के अवशेष जलाने से ही दिल्ली की हवा में प्रदूषण तेजी बढ़ रहा है। बुधवार को पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने इसकी प्रमाणिकता के लिए नासा द्वारा ली गई वह इमेज भी साझा की, जिसमें पंजाब और हरियाणा में फसल अवशेष जलाए जा रहे हैं।
बता दें कि एनजीटी ने पराली जलाने पर जुर्माने के लिए 2016 में आदेश दिया था। पर्यावरण अदालत ने आदेश दिया था कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। पंजाब ने 1981 के वायु अधिनियम की धारा 19(5) के तहत 2013 में एक आदेश जारी कर दिया गया था, जिसमें पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। एनजीटी ने आदेश दिया था कि दो एकड़ जमीन पर किसानों द्वारा पराली जलाने पर 2,500 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि जिनके पास दो से पांच एकड़ जमीन है, उन्हें 5000 रुपये और किसानों को पांच एकड़ से अधिक जमीन वाले किसानो पर 15,000 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जाएगा।
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Published: 18 Oct 2018, 11:24 AM
