शिक्षा पर केजरीवाल का झांसा, अजय माकन का खुलासा, आंकड़े पेश कर कांग्रेस ने आप सरकार के दावों की खोली पोल

शिक्षा पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जो झांसा दिया था, उस पर कांग्रेस नेता अजय माकन ने खुलासा कर दिया है। उन्होंने सारे आंकड़े पेश करते हुए केजरीवाल और उनकी सरकार के दावों की हवा निकाल दी।

फोटो : सोशल मीडिया
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केजरीवाल सरकार ने एक विज्ञापन के जरिए दावा किया कि दिल्ली में देश की सबसे अच्छी स्वास्थ्य प्रणाली और सबसे अच्छी शिक्षा प्रणाली है। सफलतापूर्वक चलाए गए इस विज्ञापन को खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शेयर किया। आमतौर पर दिल्ली और दिल्ली के बाहर ज्यादातर लोग अरविंद केजरीवाल के दावों पर भरोसा कर लेते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। इसकी मिसाल हाल के दिनों की महामारी का संकट जब लोगों ने खुद देखा कि दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाएं कहां खड़ी हैं।

महामारी संकट के दौरान दिल्ली के लोग सरकार अस्पतालों में जाने से डर रहे थे, क्योंकि उन्हें भरोसा नहीं था कि उन्हें वहां जरूरी इलाज मिल पाएगा। साधन-संपन्न लोग निजी अस्पतालों का रुख कर रहे थे। यह सबने देखा कि जब कुछ राजनीतिक और स्वयंसेवी संस्थाएं लोगं को ऑक्सीजन मुहैया करा रही थीं तो दिल्ली सरकार गायब थी। यहां तक कि कई देशों के दूतावास तक ने युवा कांग्रेस से ऑक्सीजन मुहैया कराने की गुहार लगाई थी न कि दिल्ली या केंद्र सरकार से। लेकिन केजरीवाल सरकार विज्ञापनों के जरिए इन सच्चाइयों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है और विकासका एक फरेबी दावा सामने रख रही है।

यही हाल दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था का है। ध्यान होगा कि केजरीवाल ने वादा किया था कि वे दिल्ली में 500 स्कूल खोलेंगे, लेकिन एक भी नहीं बना है। स्वास्थ्य और शिक्षा ऐसे क्षेत्र हैं जिनके बारे में मुख्यमंत्री हर जगह बढ़-चढ़कर डींगें हांकते रहे हैं, लेकिन केजरीवाल सरकार के शिक्षा मंत्री और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पिछले चुनाव में बमुश्किल अपनी सीट बचा पाए थे। वे मात्र 3 हजार से कुछ ज्यादा वोटों से जीत सके थे। इससे पहले मनीष सिसोदिया ने 28 हजार वोटं से जीत दर्ज की थी, लेकिन उनकी जीत का अंतर संकेत देता है कि उनके और उनकी सरकार द्वारा किए गए वादे पूरे नहीं हुए।

सच्चाई को दरकिनार कर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल झूठ का ढिंढोरा पीटने में लगे हैं और गलत आंकड़े पेश कर अपनी सरकार की वाहवाही कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एक ऐसी खबर को प्रचारित प्रसारित किया जो तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह झूठी है। उन्होंने इस खबर को अपने ट्वीट के जरिए भी शेयर किया। अपने ट्वीट में केजरीवाल ने दावा किया कि ‘पिछले कुछ सालों के दौरान देश में ऐसा पहली बार हुआ है कि निजी स्कूलों के 2 लाख से ज्यादा बच्चों ने दिल्ली सरकार के स्कूलों में दाखिला लिया है।’


ध्यान रहे कि महामारी के दौरान बहुत से लोगों की नौकरियां गई हैं और काम-धंधे बंद हुए हैं, ऐसे में लोग विश्वास कर सकते हैं कि जिन लोगों की आमदनी कम हुई है या खत्म हुई है उनके बच्चों ने निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया होगा, लेकिन सच्चाई और आंकड़े कुछ ही तस्वीर सामने रखते हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय माकन ने शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े तथ्य सामने रखते हुए केजरीवाल और उनकी सरकार के दावों की हवा निकाल दी है। माकन ने केजरीवाल को खुली चुनौती दी कि केजरीवाल अपने दावों के संबंध में आंकड़े सामने रखें। लेकिन जैसाकि अपेक्षित था, केजरीवाल या उनकी सरकार की तरफ से न तो कोई सफाई आई और न ही कोई आंकड़े पेश किए गए। इसके बाद अजय माकन ने सारे तथ्य सामने रखे।

उन्होंने कहा कि, “देश की तो नहीं जानता, लेकिन 2019 के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में निजी स्कूलों में सरकारी स्कूलों से अधिक छात्र पढ़ रहे थे।” उन्होंने आंकड़ा देते हुए कहा कि 2019 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 16.47 लाख छात्र थे, वहीं इस दौरान निजी स्कूलों में 16.61 लाख छात्र पढ़ रहे थे।

माकन ने 2013-14 के आंकडे भी सामने रखे। उन्होंने कहा कि 2013-14 से पहले हर साल दिल्ली के सरकारी स्कूलों से 12वीं बोर्ड की परीक्षा पास करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ जाती थी। लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद उल्टा हो गया। 2013-14 में कुल 1.47 लाख 12वीं बोर्ड मे उत्तीर्ण हुए थे, वहीं 2019-20 में केवल 1.09 लाख छात्र ही उत्तीर्ण हुए।

उन्होंने सवाल पूछा कि क्या यह सच नहीं है कि 2013 से पहले तक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में लगातार छात्रों की संख्या बढ़ रही थी लेकिन इसके बाद सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। उन्होंने कहा कि 2013-14 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या 17.75 लाख थी दो 2018019 में गिरकर 16.47 लाख पहुंच गई है। ऐसा भी तब हुआ है जब इस दौरान दिल्ली की आबादी में भी इजाफा हुआ है।

अजय माकन ने कहा कि 2013 में निजी स्कूलों में 13.57 लाख छात्र थे जबकि 2019 में इन छात्रों की संख्या 16.61 लाख पहुंच गई। उन्होंने सवाल पूछा कि ‘क्या यही है शिक्षा का मॉडल...’


अजय माकन ने कहा कि, “किसी भी स्कूल की विश्वसनीयता उसके नजीतों पर आधारित होती है। इस मामले में भी दिल्ली सरकार ने झूठ बोला है।” उन्होंने आंकड़े देते हए कहा कि 2013-14 से पहले तक दिल्ली के सरकारी स्कूलों के नतीजे हर साल बढ़ रहे थे, लेकिन केजरीवाल सरकार आने के बाद से इसका उलटा क्रम शुरु हो गया। उन्होंने कहा किजहां 2013-14 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों के 1,47,420 छात्र पास हुए थे वबीं 2020 में सिर्फ 1,09,098 छात्र ही सरकारी स्कूलों से पास हो पाए हैं।

हर चीज की एक कीमत होती है और अब दिल्ली के लोग जिन्होंने मुफ्त पानी और बिजली के वादे पर केजरीवाल को वोट दिया था, वे कीमत चुका रहे हैं, क्योंकि देश के भविष्य को उचित शिक्षा नहीं मिल रही है और लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने के लिए मजबूर हैं। लोगों ने महामारी के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र को देखा है और अब बारिश के दौरान सड़कों और जलजमाव की स्थिति देखी है।

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