अजित पवार प्लेन क्रैश: हादसे को लेकर पूर्व एयर इंडिया पायलट ने सेफ्टी सिस्टम पर उठाए सवाल, जानिए क्या कहा
पूर्व एयर इंडिया पायलट और विमानन विशेषज्ञ मीनो वाडिया ने भारत में विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत को एक स्वतंत्र सुरक्षा बोर्ड की जरूरत है, जो विमान हादसों की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से कर सके।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती में हुए विमान हादसे में मौत के बाद पूरे देश में शोक की लहर है। साथ ही अब सवाल भी पूछे जा रहे हैं। इस बीच पूर्व एयर इंडिया पायलट और विमानन विशेषज्ञ मीनो वाडिया ने इस दुर्घटना को लेकर कई अहम बातें कहीं और लोगों से अपील की कि बिना पूरी जांच और ठोस सबूत के किसी नतीजे पर न पहुंचा जाए।
मीनो वाडिया ने आईएएनएस से बताया कि हादसा बारामती में हुआ, जहां उस समय दृश्यता पूरी तरह साफ नहीं थी। उनके मुताबिक, पायलट ने पहली बार लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाए और 'गो-अराउंड' करना पड़ा, यानी विमान को दोबारा उड़ान में ले जाना पड़ा। दूसरी बार लैंडिंग के दौरान ही विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
उन्होंने कहा, "अभी जो जानकारी मिल रही है, उससे ऐसा लग रहा है कि पायलट ने इमरजेंसी घोषित की थी। अब सवाल यह है कि इमरजेंसी क्यों घोषित की गई? क्या इंजन में कोई खराबी थी? अगर सिर्फ एक इंजन भी फेल हुआ होता, तब भी इस तरह का हादसा होना जरूरी नहीं था, क्योंकि पायलट एक इंजन पर भी विमान को सुरक्षित उतार सकता है।"
कुछ रिपोर्ट्स में विमान के अंडरकारेज यानी लैंडिंग गियर में खराबी की बात कही जा रही है। इस पर मीनो वाडिया ने कहा कि अगर वास्तव में अंडरकारेज में समस्या होती, तो इस वजह से विमान क्रैश नहीं होना चाहिए था। उन्होंने समझाया, "जब विमान हवा में था, तभी पायलट ने किसी समस्या की रिपोर्ट दी थी। अगर यह अंडरकारेज की दिक्कत होती, तो पायलट रनवे पर ही उतरने की कोशिश करता। लेकिन यह विमान रनवे से काफी पहले या दूर गिरा है। इससे लगता है कि हादसे की वजह कुछ और हो सकती है।"
उन्होंने आगे कहा कि अभी सिर्फ अंदाजे लगाए जा रहे हैं और सही वजह तभी सामने आएगी, जब जांच के दौरान ठोस सबूत मिलेंगे।
एक पैनल रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि सुबह के समय धुएं की वजह से दृश्यता थोड़ी भारी हो सकती है और अजित पवार अक्सर सुबह जल्दी उड़ान भरते थे। इस पर मीनो वाडिया ने कहा, "आज सुबह बारामती में कोहरा नहीं था और समय भी बहुत जल्दी नहीं था। यह करीब सुबह 8:45 या 9 बजे के आसपास का वक्त था। तस्वीरों से जरूर लगता है कि दृश्यता बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन सिर्फ इसी वजह से विमान का क्रैश होना संभव नहीं लगता।"
उन्होंने साफ कहा कि दृश्यता का असर उड़ान और लैंडिंग पर पड़ता है, लेकिन इसे हादसे की एकमात्र वजह मान लेना जल्दबाजी होगी।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस हादसे के लिए पायलट की गलती की बात कही जा रही है। इस पर मीनो वाडिया ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "मैं यह बिल्कुल नहीं मानता कि बिना सबूत के पायलट पर दोष डाल दिया जाए। सभी पायलट अच्छी तरह से प्रशिक्षित होते हैं और विमान उड़ाने और उतारने में सक्षम होते हैं।"
उन्होंने पिछले साल अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि तब भी विदेशी एजेंसियों और मीडिया ने जल्दबाजी में पायलट को जिम्मेदार ठहरा दिया था। कृपया ऐसा न करें। जब तक पुख्ता सबूत न हों, तब तक किसी को दोषी ठहराना सही नहीं है।
मीनो वाडिया ने भारत में विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत को एक स्वतंत्र सुरक्षा बोर्ड की जरूरत है, जो विमान हादसों की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से कर सके।
उन्होंने कहा, "मैं कई सालों से सरकार से कहता आ रहा हूं कि हमें एक स्वतंत्र सेफ्टी बोर्ड चाहिए। लेकिन इस दिशा में ज्यादा प्रगति नहीं हुई है। हमारी सुरक्षा व्यवस्था ऐसी नहीं है जिस पर हमें गर्व हो सके। इसमें सुधार की सख्त जरूरत है।"
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का सेफ्टी सिस्टम अपडेट नहीं किया गया है। डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) को और ज्यादा सक्षम और प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली दुर्घटना जांच की प्रक्रिया को समझते हों।
जब उनसे पूछा गया कि बड़े नेताओं और वीआईपी के लिए उड़ानों में क्या अलग सुरक्षा प्रक्रिया होती है, तो उन्होंने साफ कहा, "चाहे प्रधानमंत्री हों या आम आदमी, विमान की सुरक्षा सबसे ऊपर होती है। यह मायने नहीं रखता कि विमान में कौन बैठा है। हर हाल में सुरक्षा सर्वोपरि होती है।"
अपने अनुभव के आधार पर मीनो वाडिया ने कहा कि विमान हादसे के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। इंजन फेल होना, दोनों इंजनों में खराबी, आखिरी समय पर रनवे दिखाई न देना, या कोई और तकनीकी समस्या। लेकिन यह सब सिर्फ संभावनाएं हैं।
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