संसद में अखिलेश यादव ने मोदी सरकार को घेरा, पूछा- बीजेपी शासित 21 राज्यों में कितनी महिला मुख्यमंत्री?

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी जनगणना नहीं कराना चाहती। अगर जातीय आंकड़े सामने आएंगे, तो आरक्षण की मांग और दबाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ दिया गया है, ताकि इसके लागू होने में देरी हो सके।

संसद में अखिलेश यादव ने मोदी सरकार को घेरा, पूछा- बीजेपी शासित 21 राज्यों में कितनी महिला मुख्यमंत्री?
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नवजीवन डेस्क

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परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी और केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पूछा कि जिन 21 राज्यों में बीजेपी की सरकार है, वहां कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं।

अखिलेश यादव ने कहा कि सपा महिला आरक्षण के पक्ष में है और यह उनकी पार्टी की सोच का हिस्सा रहा है। उन्होंने राम मनोहर लोहिया का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा जेंडर जस्टिस और सोशल जस्टिस के समर्थक रहे। उनकी पार्टी भी उसी विचारधारा पर चल रही है और महिला आरक्षण से इस सोच को और मजबूती मिलती है।

सपा प्रमुख ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह 'नारी' को सिर्फ एक नारे के रूप में इस्तेमाल कर रही है। सवाल उठाया कि जो पार्टी अपने संगठन में महिलाओं को पर्याप्त जगह नहीं देती, वह उनके सम्मान और अधिकारों की बात कैसे कर सकती है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद देश में जेंडर इक्वलिटी की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

अखिलेश यादव ने बीजेपी से यह भी पूछा कि जिन 21 राज्यों में उनकी सरकार है, वहां कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी अपने ही ढांचे में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने में विफल रही है। अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि पूरे देश में बीजेपी के विधायकों में महिलाओं की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम है और लोकसभा में भी उनका प्रतिनिधित्व सवालों के घेरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में पंचायत स्तर पर महिलाओं को सबसे ज्यादा आरक्षण देने का काम समाजवादी पार्टी ने किया है।


अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसे में सवाल यह उठता है कि बीजेपी को इतनी जल्दबाजी क्यों है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी जनगणना नहीं कराना चाहती, खासकर जातीय जनगणना से बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि अगर जातीय आंकड़े सामने आएंगे, तो आरक्षण की मांग और दबाव बढ़ेगा, जिससे सरकार बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ दिया गया है, ताकि इसके लागू होने में देरी हो सके। उनके मुताबिक इससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार की मंशा आरक्षण देने की नहीं, बल्कि उसे टालने की है।

अखिलेश यादव ने बीजेपी की रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसआईआर के जरिए उनकी रणनीति सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पहली गिनती में विपक्ष अपने वोट बचाने में सफल हुआ, तो बीजेपी ने फॉर्म 7 का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करना शुरू कर दिया। सपा प्रमुख ने कहा कि इस प्रक्रिया को भी पकड़ लिया गया और यह सामने आया कि फॉर्म 7 का इस्तेमाल संदिग्ध तरीके से किया जा रहा था।

अखिलेश यादव ने कहा कि इस मामले की जानकारी चुनाव आयोग को दी गई, जिसके बाद वोट कटना तो रुक गया, लेकिन फर्जी हस्ताक्षरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अखिलेश यादव ने कहा कि इन सभी घटनाओं से बीजेपी की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसे पारदर्शी और तुरंत लागू करने की जरूरत है, न कि इसे अन्य प्रक्रियाओं से जोड़कर टालने की।

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