अखिलेश यादव का धीरेंद्र शास्त्री पर हमला, कहा- न ब्रज में स्वागत होगा, न अवध में, भावनाएं आहत हुई
अखिलेश यादव ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में शास्त्री का नाम लिए बिना कहा, ''इन्होंने यदुवंशियों और रघुवंशियों दोनों की भावनाएं आहत की हैं। अब इन्हें न ब्रज में प्रवेश मिलेगा, न अवध में। अब न तो कोई सच्चा रघुवंशी इनका स्वागत करेगा, न सच्चा यदुवंशी।''

अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान, "इन्होंने यदुवंशियों-रघुवंशियों की भावनाएं आहत कीं, अब न ब्रज में स्वागत होगा न अवध में!
रामजी के 5 पिता वाले बयान पर भड़के अखिलेश यादव, बोले- 'ये सनातन विरोधी तत्व किसके इशारे पर सक्रिय हैं?'
अखिलेश यादव की बड़ी मांग: 'धार्मिक और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले शास्त्री के सभी कार्यक्रम तुरंत रद्द हों!'
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता धीरेंद्र शास्त्री की भगवान कृष्ण और भगवान राम के पिता को लेकर की गई कथित विवादास्पद टिप्पणियों पर कड़ी आलोचना करते हुये कहा कि शास्त्री ने यदुवंशियों और रघुवंशियों, दोनों की भावनाओं को आहत किया है और अब उनका न तो ब्रज में स्वागत होगा और न ही अवध में।
अखिलेश यादव ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में शास्त्री का नाम लिए बिना कहा, ''इन्होंने यदुवंशियों और रघुवंशियों दोनों की भावनाएं आहत की हैं। अब इन्हें न ब्रज में प्रवेश मिलेगा, न अवध में। अब न तो कोई सच्चा रघुवंशी इनका स्वागत करेगा, न सच्चा यदुवंशी।''
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की सीमा पर इनकी नाकाबंदी का बोर्ड लगा दिया जाना चाहिए, जिस पर लिखा हो कि 'ईशनिंदा' करने वालों का उत्तर प्रदेश की धर्मभूमि पर प्रवेश वर्जित है।
उन्होंने कहा कि जिसने धर्म-मजहब नहीं छोड़ा, वह अगली बार समुदायों पर छींटाकशी करने से बाज नहीं आएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि समझाने की जरूरत नहीं है कि अगला नंबर किसका है। यादव ने यह भी कहा कि नेपाल सीमा भी बंद करनी पड़ सकती है, क्योंकि वहां से उत्तर प्रदेश में आना ज्यादा नजदीक पड़ेगा।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश में किसी बाहरी व्यक्ति के इशारे पर किसी की राजनीतिक और धार्मिक सत्ता को चुनौती देने का काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि आपसी टकराव में राजनीतिक लोगों को भगवान को बीच में नहीं लाना चाहिए।
उनकी यह प्रतिक्रिया शास्त्री की हिंदू धार्मिक हस्तियों को लेकर की गई कथित टिप्पणियों के कारण जारी विवाद के बीच आई है।
इससे पहले मंगलवार को अखिलेश यादव ने 'एक्स' पर 41 सेकंड का एक वीडियो साझा किया था। इस वीडियो में मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ''रामजी के पांच पिता थे। यह अजीब है और इसे स्वीकार करना मुश्किल है, लेकिन दुर्भाग्य से यही सच है।''
यादव ने मंगलवार को एक अन्य पोस्ट में कहा था, ''ये सनातन विरोधी किसके कहने पर सक्रिय हैं। पहले भगवान कृष्ण के बारे में विवादित वीडियो आया, अब भगवान राम के पिता के बारे में अभद्रता की बात प्रसारित हो रही है। इसके राजनीतिक आकाओं को ये सब मंजूर होगा, हमें अंश मात्र भी स्वीकार्य नहीं है।''
उन्होंने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में शास्त्री के सभी कार्यक्रम रद्द किये जाने की किए जाने की मांग भी की थी।
यादव ने कहा था कि अब सच्चे सनातनी उनकी पर्ची लिखेंगे।
उधर मथुरा से मिली खबर के अनुसार बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा प्रवचनों में श्रीकृष्ण पर की गई एक टिप्पणी से नाराज यहां के कुछ धार्मिक संगठनों ने उन्हें वाणी की मर्यादा बनाए रखने की सलाह दी है।
शास्त्री ने तीन दिन पूर्व प्रवचन के दौरान कथित रूप से भगवान श्रीराम एवं श्रीकृष्ण के चरित्रगत लक्षणों की व्याख्या करते हुए भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम एवं श्रीकृष्ण को लीला पुरुषोत्तम बताते हुए उन्हें टेड़े स्वभाव वाला बताया था।
इस टिप्पणी से यहां के कुछ धार्मिक संगठनों ने नाराजगी जताई है, जिनमें अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा एवं श्री माथुर चतुर्वेद परिषद ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। पुरोहित महासभा व चतुर्वेद परिषद के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता आयोजित कर इस प्रकार के वक्तव्यों का देश भर में विरोध करने का बयान दिया है।
अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के संरक्षक एवं श्री माथुर चतुर्वेद परिषद के मुख्य संरक्षक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सनातन संस्कृति के आराध्य हैं। उनके प्रति अमर्यादित टिप्पणी श्रद्धालुओं की आस्था को आहत करती है। इसलिए सभी कथावाचक धार्मिक मंचों से बोलते समय वाणी की मर्यादा बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि लोकप्रियता या तालियां बटोरने के लिए देवी-देवताओं और धार्मिक परंपराओं पर अमर्यादित टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री द्वारा अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांग लिए जाने के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा करने से श्रद्धालुओं की आहत भावनाओं की गंभीरता कम नहीं हो जाती। उन्हें तो ऐसी कोई टिप्पणी करने से पहले ही सोचना चाहिए कि ऐसी बातों से भक्तों में क्या संदेश जाएगा और इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
दूसरी ओर, धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ व अन्य पदाधिकारियों ने बयान जारी कर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कथन का यह कहकर बचाव किया कि उन्होंने व्यास पीठ से भगवान राम एवं कृष्ण के बारे में जो कुछ भी कहा वह हर किसी के समझ में आने वाली बात नहीं है।
उन्होंने कहा जो लोग केवल शाब्दिक अर्थ लेते हैं हो सकता है उनके दिलों को कष्ट पहुंचा हो। परंतु, ब्रज के रसिक, संत आदि उन्हें सखा मानते हुए गालियां भी देते हैं जिसे मित्रवत् माना जाता है।
गौड़ ने बताया कि श्रीकृष्ण के एक सुप्रसिद्ध स्वरूप बांकेबिहारी का मतलब टेढ़ा ही होता है, हर मंदिर में उनके दर्शन बांके स्वरूप में ही होते हैं। इसलिए हम ब्रजवासियों के लिए यह कोई नई बात नहीं है।
प्रादेशिक लखनऊ
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