अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम के लिए लगाई गयी शर्तों पर उठाए सवाल, 'BJP को जनता सबक सिखाएगी'
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के एक कार्यक्रम पर जिला प्रशासन द्वारा लगाई गई इन पाबंदियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अखिलेश यादव ने 'एक्स' पर कहा, ‘‘आंख और मुंह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते…।"

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार पर राजधानी लखनऊ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के एक कार्यक्रम के लिए लगायी गयी शर्तों को लेकर निशाना साधा। गाय को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिलाने और पूरे देश में गौ हत्या पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने के अपने अभियान के तहत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बुधवार को लखनऊ में एक सभा को संबोधित करेंगे। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने 'गौ प्रतिष्ठा ध्वज स्थापना, धर्म युद्ध शंखनाद सभा' नामक इस कार्यक्रम को लगभग 26 शर्तों के साथ इजाजत दी है।
आयोजकों के मुताबिक जिला प्रशासन की शर्तों में किसी भी धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के खिलाफ भड़काऊ भाषणों पर रोक, राजनीतिक या धार्मिक हस्तियों के खिलाफ गाली-गलौज पर रोक और नाबालिगों से विवादित नारे न लगवाने के निर्देश शामिल हैं। प्रशासन ने कार्यक्रम के दौरान कोविड-19 संबंधी नियमों का पालन करने को भी कहा है।
आयोजकों ने बताया कि इसके अलावा जिला प्रशासन ने यह भी कहा है कि आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह पारंपरिक झंडों के अलावा और कोई भी चीज कार्यक्रम स्थल पर न लाएं, निजी सुरक्षा के बंदोबस्त किए जाएं, साथ ही अग्निशमन, यातायात नियम, वायु प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े दिशानिर्देशों का पालन किया जाए और पुलिस की तैनाती में होने वाला खर्च भी खुद ही उठाएं।
जिला प्रशासन द्वारा लगाई गई इन पाबंदियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अखिलेश यादव ने 'एक्स' पर कहा, ‘‘आंख और मुंह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते…।"
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपाई सनातन का सम्मान नहीं कर सकते हैं तो भले न करें, परंतु अपमान भी न करें। उत्तर प्रदेश की अहंकारी सरकार जिस समाज विशेष के मान की बांह मरोड़ रही है, उस समझदार समाज को वह बात समझ आ रही है।’’
अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी की सरकार के तमाम मंत्री पार्टी सांसद और विधायक तथा अन्य जनप्रतिनिधि इस मामले पर अपने समाज से मुंह चुरा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी की भट्ठी पर अपने स्वार्थ की रोटी सेंकने वाले ऐसे भाजपाई जनप्रतिनिधि, अपने ही समाज में सम्मान खो चुके हैं। जनता अगले चुनाव में उनको सबक सिखाएगी।’’
अखिलेश यादव ने कहा कि इन जनप्रतिनिधियों में से जो कुछ लोग अपने समाज के सच्चे शुभचिंतक हैं वे उन अन्य दलों के संपर्क में हैं तथा वे सदैव सनातन और इस समाज का सम्मान भी करते रहे हैं । उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम में कोविड-19 संबंधी नियमों का पालन करने के प्रशासन के आदेश पर भी सवाल खड़े किये।
अखिलेश यादव ने लिखा, ‘‘ और हां… कोविड-19 अब भी चल रहा है क्या? अगर ये सच है तो सरकार की किस सभा या बीजेपी के किस आयोजन में इसका आख़िरी बार अनुपालन हुआ, उसका प्रमाण दिया जाए। भाजपाई और उनके संगी-साथियों की भूमिगत बैठकों में क्या यह लागू होता है। अतार्किक बंदिशें लगाना कमज़ोर सत्ता की पहचान होती है।’’
इस बीच, अविमुक्तेश्वरानंद ने संवाददाताओं से बातचीत में जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम को लेकर लगाई गई शर्तों को अव्यावहारिक करार दिया। उन्होंने कहा, “लोगों को इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि कोई क्या कहता है या कौन से शब्द इस्तेमाल करता है। मुद्दा यह है कि क्या पाबंदियां व्यावहारिक हैं?”
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “ कोविड अभी नहीं है, इसलिए ऐसे नियमों की जरूरत नहीं है। अगर कोविड गाइडलाइंस का पालन करना ही है, तो उन्हें रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डों, सड़कों या सचिवालय में क्यों नहीं लागू किया जा रहा है? यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारी भी मास्क नहीं पहन रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे सिर्फ हमारे मुंह पर पट्टी बांधना चाहते हैं।”
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “निर्देश व्यावहारिक होने चाहिए। नामुमकिन शर्तें नहीं थोपी जानी चाहिए।”