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असीमानंद समेत सभी आरोपी बरी, समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में एनआईए कोर्ट का फैसला

पंचकूला की एक विशेष एनआईए कोर्ट ने समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में असीमानंद समेत सभी 4 आरोपियों को बरी कर दिया है। दिल्ली से लाहौर जाने वाली समझौता एक्सप्रेस में फरवरी 2007 में हरियाणा के पानीपत के पास हुए विस्फोट में 68 लोगों की मौत हुई थी।

फोटोः सोशल मीडिया

नवजीवन डेस्क

समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस के सभी आरोपी बरी हो गए हैं। हरियाणा के पंचकूला की विशेष एनआईए कोर्ट ने असीमानंद समेत मामले के सभी चारों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया है। असीमानंद के अलावा बरी होने वालों में कमल चौहान, राजिंद्र चौधरी और लोकेश शर्मा के नाम शामिल हैं।

अपना फैसला सुनाने से पहले कोर्ट ने केस में फैसले से ठीक पहले गवाही के लिए आए एक पाकिस्तानी नागरिक के आवेदन को ठुकरा दिया। इससे पहले 6 मार्च को इस केस में अंतिम बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए फैसले की तारीख 11 मार्च तय की थी। लेकिन 11 मार्च को अंतिम समय में एक पाकिस्तानी नागरिक द्वारा केस में गवाही दर्ज कराने के लिए आवेदन दाखिल किए जाने की वजह से कोर्ट ने अपना फैसला टाल दिया था।

इस मामले में जनवरी 2014 में एनआईए की अदालत ने दक्षिणपंथी नेता स्वामी असीमानंद और तीन अन्य आरोपियों- कमल चौहान, राजिंद्र चौधरी और लोकेश शर्मा के खिलाफ आरोप तय किए थे। फैसले के लिए कोर्ट में मुख्य आरोपी असीमानंद, कमल चौहान, लोकेश शर्मा और राजिंदर चौधरी सभी मौजूद थे।

गौरतलब है कि 18 फरवरी 2007 को दिल्ली से लाहौर जाने वाली समझौता एक्सप्रेस में हरियाणा के पानीपत के पास विस्फोट हुआ था। इस विस्फोट में 68 लोगों की मौत हुई थी,। मरने वालो में अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक थे। हालांकि मृतकों में 10 भारतीय और 15 अज्ञात भी थे। इन 68 लोगों में से 64 यात्री थे जबकि अन्य चार रेलवे अधिकारी थे।

मामले की जांच में एटीएस को इस ब्लास्ट में ‘अभिनव भारत’ नाम के संगठन के शामिल होने के संकेत मिले थे। जिसके बाद इस केस को एनआईए को सौंपा दिया गया था। एनआईए ने 26 जून 2011 को पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में नाबा कुमार उर्फ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, रामचंद्र कालसंग्रा, संदीप डांगे और लोकेश शर्मा का नाम था।

Published: 20 Mar 2019, 6:09 PM
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