पंजाब में पानी के मसले पर कांग्रेस सरकार के साथ आए सभी दल, साथ मिलकर लड़ने का ऐलान

पंजाब में सीएम अमरिंदर सिंह द्वारा बुलाई सर्वदलीय बैठक में जल संकट के साथ विवादित एसवाईएल का मुद्दा भी उठा। इस बैठक से हरियाणा में सियासी पारा गर्मा गया है, क्योंकि वहां बीजेपी की सरकार है और पड़ोसी पंजाब में बीजेपी नेताओं ने कैप्टन का समर्थन कर दिया है।

फोटोः अमरीक
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अमरीक

पंजाब में गहराते जल संकट को लेकर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा बुलाई सर्वदलीय बैठक में तमाम राजनीतिक दलों ने एक सुर में कहा कि राज्य का पानी दूसरे राज्यों को न दिया जाए, क्योंकि पंजाब इतने गंभीर जल संकट का शिकार है कि दो दशक बाद सूबा रेगिस्तान में बदल जाएगा। इस बैठक की अहम बात यह रही कि समूचे विपक्ष ने पानी के मसले पर मुख्यमंत्री का पूरा समर्थन किया और एकजुटता के साथ इस मसले पर लड़ने की बात कही।

पंजाब में सीएम अमरिंदर सिंह द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में बहुविवादित एसवाईएल का मुद्दा भी शिद्दत से उठा। हालांकि, इस बैठक के बाद हरियाणा में सियासी पारा गर्म हो गया है। हरियाणा में बीजेपी की सरकार है, जबकि पंजाब बीजेपी के नेताओं ने इस मसले पर कैप्टन सरकार का पुरजोर समर्थन कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दल ने भी इन मुद्दों पर कांग्रेस सरकार का खुला समर्थन कर दिया है।

गौरतलब है कि 16 साल के बाद पानी के मसले पर पंजाब में सर्वदलीय बैठक की गई और हर मुद्दे पर आपस में भिड़ने वाले सियासी दल हमख्याल होते दिखे। इससे पहले ऐसी सर्वदलीय बैठक 2004 में बुलाई गई थी। तब भी कैप्टन अमरिंदर सिंह की ही सरकार थी। बैठक में सर्वसम्मति से केंद्र से अंतरराज्यीय नदी जल विवाद एक्ट में संशोधन की मांग करने का फैसला हुआ। नदियों के पानी की उपलब्धता का पुन: मूल्यांकन करने की मांग उठी। कहा गया कि भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पंजाब की तीन नदियों का पानी किसी भी हालत में बेसिन से नॉन-बेसिन इलाकों में स्थानांतरित न किया जाए।

हालांकि, बैठक में एसवाईएल को लेकर कोई प्रस्ताव विधिवत रूप से पारित नहीं किया गया, लेकिन तमाम दलों ने एक सुर में कहा कि एसवाईएल नहर का बनना पंजाब के लिए घातक होगा। एसवाईएल विवाद चार दशक पुराना है। पंजाब और हरियाणा अक्सर इस पर भिड़ते रहते हैं। अब यह मसला सुप्रीम कोर्ट में है। सर्वदलीय बैठक में सभी दलों के नेताओं ने कहा कि पानी के सवाल पर वे सुप्रीम कोर्ट का कोई विपरीत फैसला नहीं मानेंगे। जरूरत पड़ने पर पक्ष-विपक्ष सब मिलकर विरोध और संघर्ष करेंगे।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सभी दल इस मसले पर एकजुट होकर प्रधानमंत्री से मिलेंगे और हर 6 महीने के बाद ऐसी सर्वदलीय बैठक होगी। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता सांसद बलविंदर सिंह भूंदड़ कहते हैं, “कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर अच्छी पहल की है। पंजाब के जल संसाधनों की रक्षा के लिए सब दलों को इसी तरह एकजुट होना चाहिए।” शिरोमणि अकाली दल के एक अन्य वरिष्ठ नेता महेश इंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा, “वह मुख्यमंत्री के इस कथन का पुरजोर समर्थन करते हैं कि एसवाईएल बनी तो हिंसा होगी और आतंकवाद लौटने का खतरा पैदा होगा।”

वहीं वरिष्ठ बीजेपी नेता मदन मोहन मित्तल कहते हैं, “कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस गंभीर समस्या पर सभी को एकजुट किया, इसके लिए तमाम पार्टियों को उनका आभारी होना चाहिए।” विधानसभा में विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा के मुताबिक जल संकट पर इस तरह सर्वदलीय बैठक बुलाकर और सब की बात सुनकर मुख्यमंत्री ने अच्छे सद्भाव का परिचय दिया है। आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर उनके साथ है। बीएसपी के जसवीर सिंह गढ़ी ने भी कहा कि पानी और एसवाईएल के सवाल पर उनकी पार्टी कैप्टन सरकार का हर कदम पर खुला समर्थन करेगी।

यह बैठक इसलिए भी काफी अहम थी कि पंजाब में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और कई इलाके डार्क जोन घोषित किए जा चुके हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने अटल भूजल योजना से पंजाब को बाहर रखा है। शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी नेताओं ने बैठक में इस मसले के उठने पर कहा कि वे मुख्यमंत्री के साथ जाकर इस मामले में प्रधानमंत्री से मिलने को तैयार हैं। उधर, हरियाणा में पंजाब की एकजुटता ने तगड़ी खलबली मचा दी है। सूत्रों के मुताबिक हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी सर्वदलीय बैठक बुलाने की तैयारी कर रहे हैं।

Published: 24 Jan 2020, 9:30 PM
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