CAA: वसूली आदेश पर योगी सरकार को बड़ा झटका, नुकसान की भरपाई के नोटिस पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कानपुर प्रशासन द्वारा जारी वसूली नोटिस के खिलाफ एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए नोटिस पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

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उत्तर प्रदेश में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा में हुए संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए योगी सरकार के वसूली के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नुकसान की भरपाई के लिए जारी वसूली नोटिस पर रोक लगा दी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस पंकज नकवी और जस्टिस एसएस शमशेरी की पीठ ने बीते दिसंबर में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान को लेकर एडीएम सिटी कानपुर द्वारा जारी वसूली नोटिस के खिलाफ दायर एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए अगले आदेश तक रोक लगा दी है। यह याचिका कानपुर के मोहम्मद फैजान की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका में 4 जनवरी को कानपुर के एडीएम सिटी द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी।

याचिका में आरोप है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गाइडलाइन तय की गई है, जिसका योगी सरकार ने पालन नहीं किया है। याचिका में कहा गया है कि गाइडलाइन के मुताबिक सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान के आकलन का अधिकार हाईकोर्ट के किसी मौजूदा या सेवानिवृत्त जज या फिर जिला जज को है। और उन्हीं को नोटिस जारी करने का अधिकार है। एडीएम सिटी को इस तरह का नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं है।


बता दें कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ दिसंबर 2019 में उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई थी। इस दौरान पुलिस के साथ झड़प में विभन्न शहरों में 15 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। प्रदर्शन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने विभिन्न शहरों में सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार करने के साथ ही हजारों लोगों को हिरासत में लिया था। इसके अलावा प्रदर्शन को कुचलने के लिए योगी सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई प्रदर्शनाकिरयों से करने का आदेश जारी किया था।

जिसके बाद कथित प्रदर्शनकारियों के खिलाफ योगी सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी। इसके बाद कई लोगों को सार्वजनिक संपत्तियों के नुकसान की भरपाई के लिए नोटिस जारी किया गया। इसमें कई लोगों को लाखों रुपये का नोटिस थमा दिया गया। नोटिस में कहा गया है कि जुर्माना नहीं चुका पाने की स्थिति में संपत्ति कुर्क की जा सकती है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद विभिन्न जिलों में कई लोगों को वसूली के नाम पर प्रशासन की तरफ से लाखों रुपये के नोटिस जारी कर दिए गए। कई नोटिस ऐसे लोगों को जारी कर दिए गए क्योंकि उनकी दुकान उस जगह पर थी, जहां प्रदर्शन हुआ। इसमें ये भी आरोप है कि जानबूझकर मुसलमानों को केवल नोटिस भेजा गया। इसी तरह का एक वसूली नोटिस मुरादाबाद जिला प्रशासन ने मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी को भी जारी किया है। मुरादाबाद प्रशासन ने इमरान प्रतापगढ़ी को 1 करोड़ 4 लाख 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए नोटिस जारी किया है। उन पर धारा 144 तोड़ते हुए मुरादाबाद में सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने का आरोप है।

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