शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक, हाईकोर्ट से यौन शोषण मामले में बड़ी राहत
अदालत ने अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले की जांच में पुलिस का सहयोग करेंगे। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बटुकों के कथित यौन शोषण मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर शुक्रवार को रोक लगा दी और कहा कि निर्णय आने तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और मुकदमा के वादी आशुतोष पांडेय को इस मामले में अपने जवाब दाखिल करने को कहा।
न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की और से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया जिसके मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनाए जाने की संभावना है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले की जांच में पुलिस का सहयोग करेंगे। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 24 फरवरी को अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को पॉक्सो मामले की गंभीरता से अवगत कराया और कहा कि याचिकाकर्ता को पहले निचली अदालत का रुख करना चाहिए था। वहीं, स्वामी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि पूरा मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने कहा कि शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय काई आपराधिक मामलो में लिप्त रहे हैं और याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के इशारे पर इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि पीड़ित बटुक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम में कभी नहीं रहे। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि आरोप निराधार हैं और जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।
आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दायर अर्जी पर जिला अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ नाबालिग बटुकों से दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। प्रकरण पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज है और विशेष न्यायाधीश पॉक्सो की अदालत के आदेश के अनुपालन में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर प्राथमिकि दर्ज की गई।
सुनवाई से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और “झूठ की उम्र लंबी नहीं होती।” उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो नार्को टेस्ट सहित हर प्रकार की जांच के लिए वे तैयार हैं। फिलहाल आज अदालत के आदेश के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।
इसी बीच, स्वामी पक्ष के अधिवक्ता को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने आरोपी अजीत कुमार सरोज को वाराणसी के जंसा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी विधि का छात्र है और प्रारंभिक पूछताछ में उसने बताया कि पड़ोसी को फंसाने के उद्देश्य से उसने धमकी भरा संदेश भेजा था।
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia