मध्य प्रदेश: सरकार से परेशान होकर यूनिवर्सिटी की जमीन छोड़कर भाग गए अनिल अंबानी, अब वहीं टेक्सटाइल पार्क बनाने का ऐलान

अचारपुरा फिर चर्चा में है क्योंकि सीएम शिवराज सिंह चौहान ने यहां 13 सितंबर को टेक्सटाईल पार्क का लोकार्पण किया। सवाल यह है कि करीब 10 साल यूनिवर्सिटी के इंतजार में निराश हो गए लोगों को अब कितने साल इस टेक्सटाइल योजना के पूरे होने का इंतजार करना होगा?

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नवजीवन डेस्क

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से अचारपुरा लगभग 14 किलोमीटर दूर है। यह फिर चर्चा में है। इसकी वजह भी है। पहले तो यह जानना चाहिए कि इससे पहले यह कब और क्यों चर्चा में था। 2010 में शिवराज सरकार ने खजुराहो में इन्वेस्टर मीट का आयोजन किया था। इस दौरान उद्योगपति अनिल अंबानी ने पिता धीरूभाई अंबानी के नाम पर विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की थी। तब राज्य सरकार ने निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए समझौते के तहत अचारपुरा में जमीन आवंटित की थी। मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2007 के प्रावधान और दिशा-निर्देशों के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। प्रदेश में निवेश को बढावा देने के लिए अंबानी ट्रस्ट को साल 2011 में अचारपुरा में 44 हेक्टेयर, यानी लगभग 110 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी।

उस वक्त बताया गया था कि यह विश्वविद्यालय 110 एकड़ क्षेत्र में बनाया जाएगा जो आधुनिक सुविधाओं के साथ विश्वस्तरीय होगा। इस विश्वविद्यालय में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और अन्य संबंधित विषयों पर अध्ययन के अलावा शोध कार्य की भी सुविधा मिलेगी और यहां मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास से संबंधित कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। ट्रस्ट के अध्यक्ष अनिल अंबानी ने तब कहा था कि मध्य प्रदेश अपने बौद्धिक संसाधन के बल पर आर्थिक विकास के क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में तेजी से बढ़ रहा है।

ट्रस्ट ने बाउंड्री वॉल बनाने में 1.04 करोड़ रुपये खर्च किए। ट्रस्ट के पांच करोड़ में से 3 करोड़ 23 लाख 43 हजार रुपये की राशि जमीन की लीज की प्रीमियम राशि जमा करने में खर्च हो गई। लेकिन इसके बाद पंचायत से लेकर वन विभाग, हॉर्टिकल्चर विभाग, शिक्षा विभाग और लोक निर्माण विभाग समेत अन्य शासकीय विभागों से एनओसी लेने में अंबानी ट्रस्ट के पसीने छूट गए। सूत्रों के अनुसार, अंबानी एनओसी में हो रही देरी से इतने परेशान हुए कि उन्होंने 2015 में जमीन वापस करने का फैसला कर लिया। वैसे, उस समय अनिल अंबानी के पास पैसे की किल्लत की सूचना आज की तरह सार्वजनिक नहीं हुई थी। लेकिन ग्रुप ने सितंबर, 2015 में जमीन वापस करते हुए गारंटी राशि निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग से मांगी थी। राज्य सरकार में इस वक्त यह बताने को कोई तैयार नहीं है कि उस राशि को सरकार ने अब तक वापस किया है या नहीं।


खैर, 5 साल बाद अचारपुरा फिर चर्चा में है क्योंकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां 13 सितंबर को टेक्सटाईल पार्क का लोकार्पण किया। उन्होंने इस मौके पर आयोजित समारोह में बताया कि गोकुलदास एक्सपोर्ट्स द्वारा प्रस्तावित यह इकाई 10 एकड़ भूमि पर बनेगी और इसमें कंपनी 110 करोड़ रुपये का निवेश करेगी जिससे 4 हजार से अधिक स्थानीय व्यक्तियों को रोज़गार उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही प्लांट में तीन चौथाई से अधिक महिलाएं काम करेंगी। सरकार ने इस इकाई से ही लगभग 10 हजार लोगों को रोज़गार देने का दावा किया। अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र 146 हेक्टेयर भूमि पर विकसित है। उद्योग स्थापना पर 800 करोड़ पूंजी निवेश की उम्मीद जताई गई है।

सवाल यह है कि करीब 10 साल यूनिवर्सिटी के इंतजार में निराश हो गए लोगों को अब कितने साल इस टेक्सटाइल योजना के पूरे होने का इंतजार करना होगा?

(भोपाल से रामयश केवट की रिपोर्ट)

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