सांसदों की बगावत के बीच उद्धव ने कहा- पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार, लेकिन चोरों के हाथ में नहीं जाने दूंगा

पार्टी के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में भावुक होते हुए उद्धव ने कहा कि चुनौतियों और हमलों के बावजूद उनका संकल्प नहीं डगमगाया है। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं से कार्यकर्ता निराश नहीं हुए, बल्कि और अधिक जोश में आ गए हैं।

सांसदों की बगावत के बीच उद्धव ने कहा- पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार, लेकिन चोरों के हाथ में नहीं जाने दूंगा
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शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों की बगावत के बीच उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को 60वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में भावुक होते हुए कहा कि चुनौतियों और हमलों के बावजूद उनका संकल्प नहीं डगमगाया है, लेकिन अगर पार्टी को उन पर भरोसा और विश्वास नहीं है, तो वह इसके अध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार हैं।

चार साल में दूसरी बार अपनी पार्टी में आसन्न टूट पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह एक दशक से अधिक समय से पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए वह शिवसेना (यूबीटी) के शीर्ष पद से हटने को तैयार हैं। भावुक ठाकरे ने अपने समर्थकों से कहा, ‘‘अगर पार्टी का ही कोई व्यक्ति अगला शिवसेना प्रमुख बनता है तो मुझे खुशी होगी, लेकिन मैं इसे चोरों के हाथों में नहीं जाने दूंगा।’’


उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह डगमगाए नहीं हैं और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए डटे हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैं नहीं चाहता कि कोई भी शिवसैनिक मुझ पर उंगली उठाए कि मैंने मुख्यमंत्री पद से (2022 में) इस्तीफा दे दिया और (2026 में) विधान परिषद की सदस्यता जारी नहीं रखी।’’ उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं से शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता निराश नहीं हुए, बल्कि और अधिक जोश में आ गए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बागी सांसदों के उन दावों की कड़ी आलोचना की, जिनमें कहा गया था कि उन्हें आशंका है कि शिवसेना (यूबीटी) कांग्रेस में अपना विलय कर सकती है। उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘‘अगर 30 साल तक सहयोगी रहने के बावजूद हमने बीजेपी में अपना विलय नहीं किया, तो हम कांग्रेस में विलय कैसे कर सकते हैं? मुझे आशंका है कि बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना का खुद में विलय कर सकती है।’’