अमित शाह दिलाएंगे हरियाणा को पंजाब से विधान भवन में हक, स्पीकर ने मुलाकात के बाद किया दावा

ज्ञानचंद गुप्‍ता ने चंडीगढ़ प्रशासन के माध्यम से पंजाब से विधानसभा भवन में हरियाणा का हिस्सा दिलाने की मांग की। करीब 55 साल से हरियाणा इसकी मांग कर रहा है। साथ ही गुप्ता ने पंजाब विश्वविद्यालय की मूल स्थिति और हरियाणा के हिस्से की बहाली की भी मांग की।

फोटोः @GianChandBjp
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धीरेंद्र अवस्थी

हरियाणा विधानसभा अध्‍यक्ष ज्ञानचंद गुप्‍ता ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद दावा किया कि चंडीगढ़ में हरियाणा की नई विधानसभा बनने का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही वर्तमान विधान भवन में पंजाब का 'कब्‍जा' भी हटेगा और पंजाब विश्वविद्यालय में भी प्रदेश को पूरी हिस्सेदारी मिलेगी। स्‍पीकर का कहना है कि अमित शाह ने तीनों मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया है।

स्पीकर ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात के दौरान पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ प्रशासक के साथ इस संबंध में हुए पत्राचार और विधानसभा सचिवालय के पास उपलब्ध मामले से जुड़े तथ्यों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि विधायिका की गरिमा और आधुनिक दौर की कार्यशैली के लिए नया विधान भवन समय की आवश्यकता बन चुका है। नए परिसीमन में हरियाणा में विधायकों की संख्या बढ़ेगी, लेकिन मौजूदा सदन में 90 विधायकों के लिए ही स्थान उपलब्ध है। इसके साथ ही संसदीय कामकाज के तौर-तरीकों में भी बड़े बदलाव का दौर चल रहा है। ऐसे में भव्य और आधुनिक विधान भवन बनाना जरूरी हो गया है।

इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान विधान भवन में पंजाब द्वारा किए गए ‘अवैध’ कब्जे को हटवाने की मांग भी केंद्रीय गृह मंत्री से की। उन्होंने कहा कि विधान भवन चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश की संपत्ति है। ऐसे में यह कार्य सीधे-सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आता है। इसलिए उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन के माध्यम से पंजाब से हरियाणा का हिस्सा दिलाने की मांग की है। करीब 55 साल से हरियाणा इसकी मांग कर रहा है। हरियाणा विधानसभा इस संबंध में एक प्रस्ताव भी पास कर चुकी है। राज्य के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा था।


ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि हरियाणा विधानसभा की 13 समितियां हैं, जबकि समिति कक्ष मात्र दो हैं। इसलिए बैठकें करने में बड़ी दिक्कत आती है। विधानसभा सचिवालय में करीब 350 कर्मचारी हैं, लेकिन इन सभी के बैठने के लिए स्थान उपलब्ध नहीं है। कमरों में केबिन्स बनाकर प्रथम श्रेणी अधिकारियों को बैठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं विभिन्न विधायक दलों के कार्यालय भी नहीं हैं। गुप्ता ने कहा कि मीडिया के बदलते स्वरूप और आवश्यकताओं के अनुसार यहां आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता है।

इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष ने पंजाब विश्वविद्यालय की मूल स्थिति और हरियाणा के हिस्से की बहाली की भी मांग की। इससे पहले वह 2017 में इस मामले को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष भी उठा चुके हैं। उपराष्ट्रपति और पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति एम. वेंकैया नायडू को भी पत्र लिख चुके हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हरियाणा-पंजाब के बंटवारे के वक्त भी विश्वविद्यालय में दोनों प्रदेशों को 40:60 का हिस्सा देने का प्रावधान हुआ था। इसलिए 100 किलोमीटर तक के दायरे में आने वाले अंबाला और यमुनानगर के कॉलेजों को भी इस विश्वविद्यालय के साथ जोड़ने पर विचार करना चाहिए।

ज्ञान चंद गुप्ता ने अमित शाह को उन राज्यों के उदाहरण भी दिए, जिन्होंने अस्तित्व में आने के कुछ समय बाद ही अपने भव्य विधान भवनों का निर्माण किया है। यहां तक कि उन्होंने देश की राजधानी नई दिल्ली में नई संसद के हो रहे निर्माण का भी हवाला दिया।

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