अंकिता भंडारी हत्याकांड: राहुल गांधी का राष्ट्रपति से आग्रह, गौतम की नियुक्ति पर सरकार से पुनर्विचार को कहें
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में यह भी कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘वीआईपी’ की पहचान से जुड़े सवाल की सीबीआई जांच अभी जारी है और ऐसे समय में गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति से गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आग्रह किया कि वह सरकार से दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहें और यह सुनिश्चित किया जाए कि अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में सीबीआई जांच पूरी होने तक गौतम पदभार ग्रहण नहीं करें।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में यह भी कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘वीआईपी’ की पहचान से जुड़े सवाल की सीबीआई जांच अभी जारी है और ऐसे समय में गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति से गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने दावा किया कि अंकिता के परिवार समेत कई लोगों ने गौतम का नाम इस मामले से जोड़ते हुए आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की सीबीआई जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने पत्र में कहा, ‘‘मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप सरकार से इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने को कहें और सीबीआई द्वारा अपनी जांच पूरी किए जाने तक श्री गौतम पदभार ग्रहण नहीं करें।’’
उत्तराखंड की 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी। वह ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया और वे उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
अंकिता के माता-पिता ने गौतम की नियुक्ति के खिलाफ बुधवार को इंडिया गेट पर धरना दिया था और उन्हें बृहस्पतिवार तड़के हिरासत में ले लिया गया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने इंडिया गेट पहुंचकर अंकिता के माता-पिता के प्रति अपना समर्थन जताया था।
अंकिता के माता-पिता का आरोप है कि हत्याकांड में जिस कथित ‘‘वीआईपी’’ की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं, वह गौतम हैं। सितंबर 2022 में हुए इस हत्याकांड के समय गौतम भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी थे। हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा या गौतम की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि इस मामले में पिछले चार वर्षों से इस सवाल का जवाब नहीं मिल पाया है कि इस मामले से जुड़े ‘वीआईपी’ कौन थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार ने इस साल जनवरी में इस पहलू की जांच सीबीआई को सौंपी थी और जांच अभी जारी है।
राहुल गांधी ने दावा किया कि राज्यपाल के पद पर रहते हुए किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू या जारी नहीं रखी जा सकती और ऐसे में गौतम की नियुक्ति उन्हें सीबीआई की पहुंच से बाहर कर सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी जांच जिसका परिणाम कभी अभियोजन में नहीं बदल सके, वह केवल नाम की जांच रह जाती है। राज्यपाल को अपने राज्य के लोगों का विश्वास प्राप्त होना चाहिए और इस तरह के संदेह के घेरे में रहने वाला व्यक्ति ऐसा विश्वास हासिल नहीं कर सकता।’’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्यपाल की नियुक्ति प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर की जाती है, लेकिन राष्ट्रपति के पास संविधान के अनुच्छेद 74(1) के तहत मंत्रिपरिषद से उसकी सलाह पर पुनर्विचार करने को कहने का अधिकार है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि गौतम की नियुक्ति की सलाह देकर उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के प्रति ‘‘घोर उपेक्षा’’ दिखाई है।
राहुल गांधी ने पत्र में अंकिता के माता-पिता का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और अब इस नियुक्ति का भी विरोध कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि अंकिता ने ‘‘घृणित मांग’’ को मानने से इनकार किया और इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाई।
गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति को अंकिता के शोकाकुल माता-पिता को सांत्वना देने और राज्यपाल के उच्च संवैधानिक पद की गरिमा की रक्षा के लिए कदम उठाना चाहिए
