राफेल सौदे में मोदी सरकार को क्लीन चिट देना क्या सही था, सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

राफेल सौदे में मोदी सरकार को क्लीन चिट देना क्या सही था? सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की इजाजत देना सही फैसला था? सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को अपने ही इन दो फैसलों पर नया फैसला सुनाएगा।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को दो अहम मामलों में फैसला सुनाने वाला है। पहला मामला राफेल सौदे से जुड़ा है। हालांकि राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर, 2018 को फैसला सुना दिया था और केंद्र सरकार को इस सौदे में क्लीन चिट दे दी थी। लेकिन इस फैसले की समीक्षा के लिए कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिन पर सुनवाई के बाद 10 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसाल सुरक्षित रख लिया था।

राफेल सौदे से जुड़े मामले में ही कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से जुड़ा मामला भी है। बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दायर करते हुए लिखा था कि उन्होंने अपने भाषणों में चौकीदार चोर है का नारा देकर प्रधानमंत्री का अपमान किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को भी राफेल सौदे से जुड़ी समीक्षा याचिकाओं के साथ जोड़ दिया था।

इसके अलावा गुरुवार (14 नवंबर, 2019) को ही सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला मंदिर मामले में भी फैसला सुनाएगा। इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट पहले फैसला दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2018 को सबरीमाला मंदिर मामले में फैसला देते केरल के सबरीमाला अयप्पा मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश का अधिकार दे दिया था। इस फैसले की समीक्षा के लिए 60 याचिकाएं दायर की गई थीं। इन सभी चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने सुनवाई कर 6 फरवरी 2019 को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

दरअसल चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह जस्टिस शरद अरविंद बोबडे अगले चीफ जस्टिस बनेंगे। ऐसे में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने आए सभी मामलों में फैसले आ रहे हैं। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में 9 नवंबर को फैसला सुनाया है।

Published: 13 Nov 2019, 3:30 PM
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