महाराष्ट्र राजभवन में नियमों के विपरीत हुई निजी सचिव की नियुक्ति, आरटीआई से खुलासे के बाद नवाब मलिक ने उठाए सवाल

महाराष्ट्र के राज्यपाल के निजी सचिव पद पर एक रिटायर्ड अधिकारी की नियुक्ति सवालों के घेरे में है। आरटीआई से खुलासे के बाद महाराष्ट्र के वरिष्ठ मंत्री नवाब मलिक ने सवाल उठाया है कि यह नियुक्ति नियमों के विरुद्ध है और इससे संदेह पैदा होता है।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवीन कुमार

महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी सरकार बनने के बाद से राजभवन किसी न किसी मुद्दे पर विवादों के केंद्र में रहा है। अब एक नया मामला राज्यपाल के निजी सचिव पद पर एक रिटायर्ड अधिकारी की नियुक्ति का सामने आया है। राज्यपाल के निजी सचिव के रूप में उल्हास मुंगेकर को नियुक्त किया गया है जबकि वे सेवानिवृत हो चुके हैं, लेकिन उन्हें राज्यपाल के निजी सचिव पद से सेवानिवृति होने के बाद इसी पद पर कांट्रेक्ट के आधार पर एक साल के लिए फिर से नियुक्त कर दिया गया है। ध्यान रहे कि राज्यपाल के निजी सचिव का पद नियमित होता है और वर्ष 2016 के सरकारी आदेशानुसार इस पद पर कांट्रेक्ट के आधार पर नियुक्ति संभव नहीं है।

महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक ने भी इस नियुक्ति पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि एक सेवानिवृत्त अधिकारी को नियमित पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा है कि इस पद के लिए उपयुक्त कई अधिकारी राजभवन में काम करते हैं। उनमें से किसी एक को चुनने का अधिकार राजभवन को है। लेकिन किसी सेवानिवृत्त अधिकारी को उस पद पर नियुक्त करना नियमों के विरुद्ध है।मलिक ने कहा है कि राजभवन से नियमों के उल्लंघन की उम्मीद नहीं की जाती है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने राज्यपाल के निजी सचिव पद पर मुंगेकर की नियुक्ति का मामला उजागर किया है। उन्होंने बताया कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य के सरकार के फैसले की अवहेलना करते हुए एक सेवानिवृत्त अधिकारी को निजी सचिव के पद पर फिर से नियुक्त किया है। गलगली ने कहा कि नियुक्ति का मामला, नियुक्त किए गए व्यक्ति, उनके पारिवारिक सदस्य और इनसे जुड़े दस्तावेजों की जांच होती है तो इस मामले में राज्यपाल की भूमिका पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

गलगली ने राज्यपाल के निजी सचिव मुंगेकर को सेवा विस्तार दिए जाने की जानकारी मांगी थी। राज्यपाल सचिवालय ने गलगली को उनके सेवा विस्तार के संबंध में पत्राचार की एक प्रति प्रदान की। राज्यपाल के प्रधान सचिव संतोष कुमार ने 28 मई 2021 को महाराष्ट्र सरकार के प्रमुख सचिव और मुख्य शिष्टाचार अधिकारी को पत्र भेजा था। इस पत्र में राज्यपाल के निजी सचिव मुंगेकर को विशेष मामले के रूप में दिनांक 17 दिसंबर 2016 के सरकारी आदेश के विपरीत राहत दिलाने का अनुरोध किया गया था। सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव सतीश जोंधले ने 16 जून 2021 को इस अनुरोध का उत्तर दिया कि सामान्य प्रशासन विभाग को दिनांक 17 दिसंबर 2016 की कार्य प्रक्रिया को लागू करके आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए। इस तथ्य को नजरअंदाज करते हुए राज्यपाल के प्रधान सचिव संतोष कुमार ने मुंगेकर को 20 जुलाई 2021 को एक वर्ष की अवधि के लिए कांट्रेक्ट के आधार पर नियुक्त किया।


इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार ने राज्यपाल सचिवालय को तीन बार पत्र लिखा है। पहला पत्र 5 अक्टूबर 2020, दूसरा पत्र 6 नवंबर 2021 और तीसरा पत्र 29 दिसंबर 2021 को भेजा है। इन पत्रों में सरकार ने साफ किया है कि नियुक्ति सरकारी निर्णय के तहत नहीं होने की बात दिखाई दे रही है। सरकारी निर्णय के तहत कार्रवाई कर सरकार को रिपोर्ट पेश की जाए। ये पत्र भेजने के बाद भी राज्यपाल सचिवालय की ओर से कार्रवाई करने की बात तो दूर जवााब देना भी मुनासिब नहीं समझा गया है।

गलगली ने कहा है कि सरकार के पत्र का जवाब न मिलने से संदेह होता है कि कुछ तो गड़बड़ है? गलगली ने राज्यपाल कोश्यारी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भेजकर मुंगेकर की कांट्रेक्ट पर हुई नियुक्ति को तत्काल रद्द करने और निजी सचिव जैसे नियमित पद को पदोन्नति से भरने की मांग की है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के कई निर्णय विवादास्पद रहे हैं। उन पर संवैधानिक पद पर होने के बावजूद बीजेपी के पक्ष में काम करने का भी आरोप लगता रहा है। राज्यपाल कोटे से 12 विधायकों की नियुक्ति भी अभी तक अधर में लटकी पड़ी है। एनसीपी नेता मलिक का कहना है कि राज्यपाल कोटे के 12 विधायकों की नियुक्ति और विश्वविद्यालय कानून से संबंधित सभी मामलों पर राज्यपाल कानूनी सलाह मांग रहे हैं। लेकिन निजी सचिव पद पर जो अवैध नियुक्ति हुई है उस बारे में भी राज्यपाल कानूनी सलाह लेंगे क्या? मलिक ने यह भी सवाल किया है कि एक सेवानिवृत्त अधिकारी को फिर से नियुक्त करने का प्रलोभन क्यों?

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