भीमा कोरेगांव केस: अदालत में फरेरा का पुलिस पर आरोप, पूछताछ के दौरान पुलिस ने की पिटाई

अरुण फरेरा, वेरनन गोंजाल्विस और सुधा भारद्वाज

पुणे सेशंस कोर्ट ने भीमा कोरेगांव हिंसा में अरुण फरेरा, वेरनन गोंजाल्विस और सुधा भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी और तीनों को नजरबंद रखा गया था।

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पुणे सेशन कोर्ट में सुनवाई के दौरान अरुण फरेरा ने पुलिस पर हिरासत में पीटने का आरोप लगाया है। अरुण फेरेरा ने कोर्ट से कहा कि पूछताछ के दौरान उन्हें पीटा गया। उन्होंने बताया कि 4 नवंबर को पूछताछ के दौरान 8 से 10 बार पुलिस अधिकारियों ने थप्पड़ मारा था जिसकी वजह से उनकी तबियत खराब हो गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहीं कोर्ट ने सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा और वेरनन गोंजाल्विस को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी और तीनों को नजरबंद रखा गया था।

बता दें कि महाराष्ट्र पुलिस ने पांच कार्यकर्ताओं में से वरवर राव, अरुण फरेरा, वेरनन गोंजाल्विस , सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा को कोरेगांव भीमा हिंसा मामले में 28 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से सभी पांचों कार्यकर्ताओं को नजरबंद रखा गया था। हालांकि गौतम नवलखा को दिल्ली हाई कोर्ट ने रिहा कर दिया था।

2 नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान पुणे पुलिस की ओर से दर्ज मामलों को रद्द करने की मांग को लेकर गौतम नवलखा, प्रोफेसर आनंद और स्वामी ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। हाई कोर्ट ने कहा था, “मामले से संबंधित कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करना होगा।” मामले की अगली सुनवाई 21 नवंबर को होनी है।

बता दें कि 1 जनवरी 2018 को महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा फैली थी। इस मामले की जांच के दौरान पुणे पुलिस ने 28 अगस्त को 5 सामाजिक कार्यकर्ताओं गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वेरनन गोंजाल्विस, वरवरा राव और अरुण फरेरा को देश के अलग-अलग शहरों से गिरफ्तार किया था।

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