कोरोना के खिलाफ भिलवाड़ा मॉडल देने वाले अशोक गहलोत की मांग- संकट की इस घड़ी में सबको साथ लेकर चलें पीएम

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि मौजूदा हालत में वह लॉकडाउन हटाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन चरणबद्ध तरीके से हटाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों को लॉकडाउन बढ़ाने पर फैसला लेने का अधिकार देना चाहिए।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया
user

नवजीवन डेस्क

पूरा देश इस समय कोरोना वायरस से पैदा हुए संकट से जूझ रहा है। लेकिन देश में राजस्थान एक ऐसा राज्य साबित हुआ जिसने कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में नायाब उदाहरण पेश किया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान में कोरोना संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि राज्य की करीब 7.5 करोड़ की आबादी में से करीब पांच करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जबकि राज्य में लगभग 15 हजार टेस्ट हुए हैं, जो केरल के बाद सबसे अधिक हैं। पूरे प्रदेश के अंदर 1 लाख बेड चिन्हित कर लिए गए हैं। प्रदेश में इस संकट को देखते हुए क्राईसिस मैनेजमेंट के लिए अलग से विंग बनाई गई है, जिसकी मॉनिटरिंग खुद अशोक गहलोत कर रहे हैं।

देश में सबसे पहला कोरोना जोन बनकर उभरे भीलवाड़ा में पहले कर्फ्यू और फिर महाकर्फ्यू के बाद संक्रमण पर काबू पा लिया गया है। भीलवाड़ा में पिछले 13 दिन से कर्फ्यू और फिर महाकर्फ्यू जारी है। गहलोत ने बताया कि मौजूदा हालत में वह लॉकडाउन को हटाने के पक्ष में नहीं हैं। गहलोत ने कहा कि उनका मानना है कि लॉकडाउन चरणबद्ध तरीके से हटाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों को लॉकडाउन बढ़ाने पर फैसला लेने का अधिकार देना चाहिए।

अशोक गहलोत ने कोरोना संकट से निपटने के लिए राज्यों को एक लाख करोड़ रुपये का पैकेज देने की मांग करते हुए कहा कि कोविड-19 आने के पहले से ही राज्यों की स्थिति पूरे देश में नाजुक बनी हुई थी। पहले से राज्यों का जीएसटी का हिस्सा रुका हुआ है और ग्रांट भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में एक लाख करोड़ रुपए राज्यों को दिए जाएं। साथ ही आरबीआई के माध्यम से बिना इंट्रेस्ट लोन की भी बहुत जरुरत है।

इस दौरान अशोक गहलोत ने दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के जलसे के मामले पर चल रहे विवाद को लेकर कहा कि जब देश कोविड-19 संकट से लड़ रहा है तो यह समय इसके लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर जमात को मरकज में जलसा करने की अनुमति किसने दी? उन्होंने कहा कि जिसने भी नियम-कानून तोड़ा, उसके खिलाफ कानून सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इस तरह से किसी समुदाय को बदनाम करना ठीक नहीं है।

गहलोत ने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के जज की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई जानी चाहिए। दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दोषी कौन हैं जो दोषी पाए जाएं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा किइस जांच से यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि इसमें प्रशासन की भी गलती है या नहीं।

राजस्थान के सीएम ने कहा कि कोरोना से लड़ने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जो सुझाव दिए हैं और प्रधानमंत्री जी से जो अनुरोध किया है कि उन पर फौरन सरकार कार्रवाई करें। गहलोत ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ऐसे वक्त में केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर काम करें और जिस तरह सोनिया गांधी जी ने प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखकर विश्वास दिलाया है कि पूरी कांग्रेस पार्टी इस संकट में उनके साथ खड़ी रहेगी तो उसके बाद ये प्रधानमंत्री जी की ड्यूटी है कि वो तमाम राजनीतिक दलों और सबको साथ लेकर चलें और पहल करें, जिसका सारे देश के लोग स्वागत करेंगे।

लोकप्रिय
next