बाढ़ से बेहाल असम: टूटी सड़कें, बहे स्कूल, कांग्रेस ने मांगा ₹10,000 करोड़ का पैकेज, गौरव गोगोई की PM मोदी से अपील
गोगोई ने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध करता हूं कि वह लोगों को हुई आर्थिक क्षति और सड़कों, दुकानों, स्कूलों और पेयजल अवसंरचना समेत ग्रामीण बुनियादी ढांचों को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए असम को 10,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दें।’’

कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बाढ़ से लोगों को हुई आर्थिक क्षति और बुनियादी ढांचों को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए राज्य को 10,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने की अपील की। गोगोई ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि लोगों को हुई आर्थिक क्षति तथा सड़कों, दुकानों, स्कूलों और पेयजल अवसंरचना को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए एक विशेष पैकेज की जरूरत है।
लोकसभा में विपक्ष के उप-नेता गोगोई ने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध करता हूं कि वह लोगों को हुई आर्थिक क्षति तथा सड़कों, दुकानों, स्कूलों और पेयजल अवसंरचना समेत ग्रामीण बुनियादी ढांचों को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए असम को 10,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दें।’’
उन्होंने कहा कि असम दशकों की सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है, जबकि ‘पीएम केयर्स फंड’ में 8,452 करोड़ रुपये पड़े हुए हैं।
गोगोई ने कहा, ‘‘क्या प्रधानमंत्री सच में असम के लोगों की परवाह करते हैं? निधि की हालिया ऑडिट रिपोर्ट, जो काफी देरी से और बिना किसी अतिरिक्त जानकारी के जारी की गई, उससे पता चलता है कि इस निधि का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा सावधि जमा में रखा गया था, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान केवल 87.85 लाख रुपये ही खर्च किए गए।’’
उन्होंने कहा कि केंद्र ने अब एसडीआरएफ के तहत पहली किस्त के तौर पर असम के लिए 379.35 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है।
गोगोई ने कहा कि यह निधि तब बनाई गई, जब पहले से ही 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष' (पीएमएनआरएफ) मौजूद था तथा इस नयी निधि का दायरा बड़े पैमाने पर आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए और भी व्यापक है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसे अलग-अलग स्रोतों से संसाधन जुटाने और उनका इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया था। फिर भी, जब असम को संसाधनों की तत्काल जरूरत है, तो ‘पीएम केयर्स फंड’ मदद के लिए आगे नहीं आ रहा।’’
गोगोई ने कहा कि इसके बजाय, असम को संगठनों और नेक लोगों के योगदान पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे 'एक बुनियादी सवाल उठता है: क्या प्रधानमंत्री को असम की जरा भी परवाह है?’
असम 19 जुलाई से बाढ़ की चपोट में है। शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं। बाढ़ के कारण अब तक 105 लोगों की जान जा चुकी है।
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