लॉकडाउन के दौरान हादसों में कम से कम 198 प्रवासी मजदूरों की गई जान, भूख-थकान से मौत का आंकड़ा नहीं

लॉकडाउन में मजबूरी और हताशा में पैदल ही घरों की ओर निकले कई प्रवासी मजदूरों के साथ हुए हादसों में करीब 200 मजदूरों की जान चली गई। सबसे ज्यादा 94 मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं। इसके बाद मध्य प्रदेश में 38, बिहार में 16, तेलंगाना में 11 और महाराष्ट्र में 9 लोगों की जान गई।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

देश भर में 25 मार्च से 31 मई के बीच लॉकडाउन के दौरान करीब 200 प्रवासी कामगारों की मौत घर लौटने के दौरान 1,461 सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। सेव लाइफ फाउंडेशन द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, इन दुर्घटनाओं में 198 प्रवासी कामगारों सहित कुल 750 लोगों की मौत हुई है।

कोरोनो वायरस संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए मोदी सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन के कारण पूरे देश में भूख-प्यास से बेहाल हजारों परिवार घर जाने के लिए निकल पड़े थे। कोई साधन नहीं होने के कारण लाखों लोग पैदल ही सामान और बच्चों को कंधे पर लादकर हजारों किलोमीटर दूर अपने घरों की ओर निकल पड़े। कई इलाकों में अभी भी हजारों लोग इस सफर पर हैं।

इस दौरान मजबूरी और हताशा में जान बचाने के लिए पैदल ही घरों की ओर निकले कई मजदूरों के साथ कई हादसे भी पेश आए जिनमें करीब 200 प्रवासी मजदूरों की जान चली गई। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 94 मौतें हुईं। इसके बाद मध्य प्रदेश में 38, बिहार में 16, तेलंगाना में 11 और महाराष्ट्र में 9 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो गई।

सेवलाइफ फाउंडेशन द्वारा मीडिया-ट्रैकिंग और कई सूत्रों से वेरिफिकेशन के जरिये संकलित आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश दुर्घटनाएं तेज रफ्तार और ड्राइवर की थकान के कारण हुई। आंकड़ों के अनुसार 68 दिनों के लॉकडाउन के दौरान, 1,390 लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए। इस मामले में भी उत्तर प्रदेश 30 प्रतिशत यानी 245 घायलों के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद तेलंगाना 56, मध्य प्रदेश 56, बिहार 43, पंजाब 38 और महाराष्ट्र भी 36 घायलों के साथ इस लिस्ट में हैं।

सेवलाइफ फाउंडेशन के संस्थापक और सीईओ पीयूष तिवारी ने कहा कि कोविड-19 के साथ अभी भी चारों ओर, हम सड़क दुर्घटना से संबंधित ट्रॉमा के साथ अत्यधिक हेल्थकेयर प्रणाली का बोझ नहीं उठा सकते। आंकड़ों से पता चलता है कि तीसरे और चौथे चरण में राज्यों से प्रतिबंधों को हटाने के साथ सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई। इन सबके बीच 68 फीसदी मौतों में पैदल यात्री, दोपहिया और तिपहिया वाहन शामिल हैं।

(आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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