अटॉर्नी जनरल बोले E20 प्रयोग है, सरकार ने किया इनकार, BPCL डायरेक्टर ने बताया– E20 से कम हो जाता है माइलेज

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के बायोफ्यूल्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुराग सरावगी ने पुष्टि की है कि एथेनॉल मिले पेट्रोल का इस्तेमाल करने से गाड़ियों की माइलेज में 30 फीसदी तक कमी आ सकती है।

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अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने मंगलवार, 30 जून को सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि E-20 पेट्रोल (ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 फीसदी एथेनॉल मिला हो) एक प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होने कहा कि, 'ये व्यवस्था अभी भी 'विकसित हो रही है' और इसका नतीजा अगले साल अक्टूबर तक पता चलेगा।' इस जानकारी के सामने आने से लोगों में भारी आक्रोश फैल गया कि आखिर प्रयोग के तौर पर उन्हें 'गिनी पिग' (ऐसे जीव जिन पर प्रयोग किए जाते हैं) क्यों बनाया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने इस बाबत सफाई पेश की कि अटॉर्नी जनरल के हवाले से सही जा रही बातें गलत हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर लोग सुप्रीम कोर्ट में कही गई अटार्नी जनरल की बातों के वीडियो शेयर कर रहे हैं। (नवजीवन इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है)

अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा पारित एक आदेश के खिलाफ बहस कर रहे थे, जिसमें तेल मार्केटिंग कंपनियों को आवंटित की तुलना में अधिक इथेनॉल की आपूर्ति करने के लिए एक आपूर्तिकर्ता की पेशकश को समायोजित करने का निर्देश दिया गया था। चूंकि वर्ष के लिए आपूर्ति आदेश पहले ही तय और आवंटित किए जा चुके थे, उन्होंने तर्क दिया, एक आपूर्तिकर्ता के आवंटन को बदलने से आपूर्ति श्रृंखला बाधित होगी क्योंकि 75 अन्य आपूर्तिकर्ता समान मांग करेंगे। अटॉर्नी जनरल व्यावहारिक रूप से स्वीकार कर रहे थे कि सरकार ने आवश्यकता से अधिक इथेनॉल की आपूर्ति की है।

याद दिला दें कि सितंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने E20 प्रोग्राम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था और इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को कानूनी करार दिया था। तब अटॉर्नी जनरल ने तर्क दिया था कि याचिकाकर्ता एक ऐसी बड़ी लॉबी के हितों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे जो भारत के स्वच्छ ईंधन की ओर बदलाव में बाधा डालना चाहते थे। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने पूछा था, "यह नीति हमारे गन्ना किसानों को लाभ पहुंचा रही है और कीमती विदेशी मुद्रा की बचत कर रही है। क्या देश के बाहर के लोग यह तय करेंगे कि भारत को किस तरह के ईंधन का इस्तेमाल करना चाहिए?"


मंगलवार शाम कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने यह कहते हुए नाराजगी जताई कि '3.6 करोड़ भारतीय कार मालिकों पर किए जा रहे एक्सपेरिमेंट' किए जा रहे हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा कि भारत में 10 में से 9 गाड़ियां E20 के अनुकूल नहीं हैं और यह पॉलिसी बिना किसी आम सहमति, बिना जनता से सलाह-मशविरा और बिना किसी नतीजे को जाने लागू कर दी गई। कर्नाटक के मंत्री ने कहा, "हमारी गाड़ियों में इसे ज़बरदस्ती डालने के बाद आप राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन बदलने की इस प्रक्रिया को 'एक्सपेरिमेंट' नहीं कह सकते। जब आपका अपना डेटा ही अभी तक तैयार नहीं है, तो आप नागरिकों को नुकसान साबित करने की चुनौती नहीं दे सकते। आम लोग गिनी पिग (प्रयोग के लिए इस्तेमाल होने वाले जानवर) नहीं हैं। हमारी सड़कें टेस्ट ट्रैक नहीं हैं। हमारी जेबें आपके ट्रायल का बजट नहीं हैं। E20 को वापस लें। पहले साबित करें, फिर लागू करें।"

ई 20 प्रोग्राम की आलोचना करने वाले अक्सर नीति आयोग की 2021 की रिपोर्ट ‘भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए रोडमैप 2020-25’ का ज़िक्र करते हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने से चार-पहिया वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी 6-7 प्रतिशत और दो-पहिया वाहनों की 3-4 प्रतिशत तक कम हो सकती है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के ब्लेंडेड फ्यूल से कारें धीमी हो जाती हैं, माइलेज कम हो जाता है, गाड़ियों के पार्ट्स खराब हो जाते हैं और अक्सर रास्ते में ही इंजन बंद हो जाते हैं।

और अब भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के बायोफ्यूल्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुराग सरावगी ने पुष्टि की है कि एथेनॉल मिले पेट्रोल का इस्तेमाल करने से गाड़ियों की माइलेज में 30 फीसदी तक कमी आ सकती है।


दूसरे आलोचकों का कहना है कि ई20 प्रोग्राम का मकसद न तो भारतीय किसानों को फ़ायदा पहुँचाना था और न ही इसे साफ़-सुथरे ईंधन की ओर बढ़ने के लिए डिज़ाइन किया गया था। हालाँकि यूरोपीय यूनियन के देशों और अमेरिका, दोनों जगह इथेनॉल-मिला पेट्रोल आम है, लेकिन वहां आम तौर पर ई10 (10% इथेनॉल) ही बिकता है, और पुरानी कारों के लिए ई5 पेट्रोल मिलता है। भारत में, ई10 को अपनाने और बिना मिलावट वाला पेट्रोल भी उपलब्ध कराने की मांग अभी तक नहीं मानी गई है। उनका कहना है कि सड़कों पर चल रही 80% भारतीय कारें ई20-कम्प्लायंट नहीं हैं।

कुछ आलोचकों का मानना ​​है कि इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम को अमेरिकी मक्का, इथेनॉल और डीडीजीएस (इथेनॉल बनाने के बाद बचा हुआ हिस्सा, जो जानवरों के चारे के तौर पर इस्तेमाल होता है) के लिए एक पक्का बाज़ार बनाने के मकसद से तेज़ किया जा रहा है। ऐसा खासकर तब हो रहा है जब भारत ने पिछले साल अमेरिका से आयात दोगुना करने का वादा किया था। आयोवा कॉर्न ग्रोअर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट मार्क मुलर ने अगले पांच सालों में भारत के 500 अरब डॉलर के व्यापारिक वादे को "अमेरिकी मक्का किसानों की जीत" बताया था। हालांकि सरकार का तर्क है कि इथेनॉल-ब्लेंडिंग से कच्चे तेल का आयात कम होगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी, लेकिन इथेनॉल बनाने के लिए अमेरिका से अनाज के आयात से यह फ़ायदा खत्म भी हो सकता है।

अमेरिकी ग्रेन्स एंड बायोप्रोडक्ट्स काउंसिल ने नई दिल्ली में एक स्थायी ऑफिस खोला है और अमेरिकी सोयाबीन एक्सपोर्ट काउंसिल ने भारत में एक 'सोय एक्सीलेंस सेंटर' शुरू किया है। इससे इस बात को बल मिलता है कि जल्द ही इथेनॉल बनाने के लिए सोयाबीन और मक्के का आयात किया जाएगा। भारत पहले ही चावल को डिस्टिलरीज़ (शराब बनाने वाली इकाइयों) को भेज चुका है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अमेरिका दौरे के दौरान महाराष्ट्र-आयोवा पार्टनरशिप एमओयू पर साइन किए थे। अप्रैल 2026 से सभी फ्यूल आउटलेट्स पर 20 पेईट्रोल अनिवार्य होने के साथ ही, भारतीय कारों के लिए इथेनॉल का सफर शुरू होने की तैयारी पूरी हो चुकी है।

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