यूपी में बीजेपी की योगी सरकार को बाबा रामदेव का झटका, ग्रेटर नोएडा फूड पार्क कहीं और शिफ्ट करने का ऐलान

बाबा रामदेव की पतंजलि ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर अड़ियल रवैया अपनाने और सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए ग्रेटर नोएडा में बनने वाले पतंजलि फूड पार्क को किसी और राज्य में शिफ्ट करने का ऐलान किया है। इसे योगी और बाबा रामदेव के मतभेदों का खुलासा भी माना जा रहा है।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात के दो दिन के अंदर ही उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पतंजलि योग पीठ के मुखिया बाबा रामदेव के जबरदस्त मतभेद सामने आए हैं। योगी सरकार ने ग्रेटर नोएडा में बनने वाले बाबा रामदेव के पतंजलि फूड पार्क को निरस्त कर दिया, तो वहां पतंजिल ने ऐलान किया कि वह इसे किसी दूसरे राज्य में स्थापित करेंगे। बाबा रामदेव की पतंजलि ने इसे किसानों की हालत और रोजगार से जोड़ते हुए कहा कि किसानों की हालत सुधारने और युवाओं को रोजगार देने का सपना पूरा नहीं हो सकता।

खबरों के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार के रवैये से नाराज होकर पतंजलि ने ग्रेटर नोएडा में स्थापित होने वाला अपना प्रस्तावित फूड पार्क किसी और राज्य में शिफ्ट करने का ऐलान किया है। पतंजलि विद्यापीठ के को-फाउंडर और पतंजलि के एमडी आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यूपी सरकार का रवैया ठीक नहीं रहा रहा है। लगातार इसे लेकर हीला-हवाली की जा रही थी। अब इसे यहां से शिफ्ट किया जाएगा। बालकृष्ण ने खुद ट्वीट कर इस बारे में जानकारी देते हुए लिखा कि, “आज हमें ग्रेटर नोएडा में केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत फूड पार्क को निरस्त करने की सूचना मिली है। राज्य सरकार के रवैये के चलते किसानों के जीवन में खुशहाली लाने का संकल्प अधूरा रह गया।”

बालकृष्ण ने कहा कि, “हमने कई बार सीएम से मुलाकात की लेकिन फायदा नहीं हुआ। फूड पार्क से यहां की तस्वीर बदल जाती। लोगों को रोजगार मिलता। उन्होंने प्रस्तावित फूड पार्क के आर्टिस्टिक डिजायन की तस्वीर भी शेयर की।

गौरतलब है कि इस फूड पार्क के लिए समाजवादी पार्टी के शासनकाल में पतंजलि को जमीन मिली थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 30 नवंबर 2016 को पतंजलि फूड और हर्बल पार्क का शिलान्यास किया था। तब अखिलेश ने कहा था कि समाजवादियों ने पतंजलि फूड और हर्बल पार्क का शिलान्यास कर बड़ा काम किया है। बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने एक अच्छी पहल की, जिसका सरकार ने साथ दिया. फूड पार्क का काम भी काफी तेजी से होगा और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिलेगी। लेकिन उत्तर प्रदेश की मौजूदा योगी सरकार ने इस पार्क को निरस्त करने का फैसला ऐसे समय में लिया है, जब वहां दीवारें बन चुकी थीं, ऑफिस बन चुका था।

बालकृष्ण ने एक अखबार से बातचीत में कहा कि करीब 450 एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना में करीब 6,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित था। इसके शुरू होने पर हजारों युवाओं को तो रोजगार मिलता ही, आसपास के हजारों किसानों को भी लाभ होता।

अमर उजाला अखबार की खबर के मुताबिक केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पतंजलि के ग्रेटर नोएडा मेगा फूड पार्क सहित उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित तीन फूड पार्क के प्रोमोटर को नोटिस जारी किया गया है। इनमें ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे मेगा फूड पार्क विकसित करने वाली कंपनी पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क नोएडा प्राइवेट लिमिटेड, मथुरा के गांव भदावल, तहसील छाता में मेगा फूड पार्क विकसित करने वाली कंपनी ओवरसीज इंफ्रा अलायंस फूड पार्क और मिर्जापुर के बेदौली, तालुका कलवारी माफी में मेगा फूड पार्क विकसित करने वाली कंपनी विंध्याचल अटिवो फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

इनमें से बाबा रामदेव की पतंजलि को इसी साल जनवरी में सरकार की तरफ से सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी। इस परियोजना के लिए सरकार कुल परियोजना लागत का 50 फीसदी सब्सिडी के रूप में देने वाली थी और 30 फीसदी की व्यवस्था किसी वित्तीय संस्था से कराई जानी थी। बाकी 20 फीसदी प्रोमोटर कंपनी को देना था।

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