बांकीपुर उपचुनावः बीजेपी के 'गढ़' से उभरे प्रशांत किशोर, नितिन नवीन के करीबी नीरज कुमार को भारी मतों से हराया
खास बात है कि बांकीपुर बीजेपी के गढ़ के साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की परंपरागत सीट भी है। इस उपचुनाव में पार्टी ने उनके बेहद खास नीरज को उम्मीदवार बनाया था। ऐसे में यहां से हार न सिर्फ बीजेपी के लिए बल्कि नितिन नवीन के लिए भी बड़ा झटका है।

बिहार की राजधानी पटना में बीजेपी का गढ़ कही जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को करारा झटका लगा है। यहां जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा को 18,953 मतों के अंतर से पराजित करके जीत दर्ज की है।
निर्वाचन आयोग के परिणामों के अनुसार, सभी 31 में से 31 दौर की मतगणना पूरी होने के बाद प्रशांत किशोर को 63,203 मत मिले, जबकि बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा को 44,250 मत प्राप्त हुए। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की उम्मीदवार रेखा कुमारी 14,085 मत हासिल करके तीसरे स्थान पर रहीं।
बीजेपी के साथ नितिन नवीन के लिए भी बड़ा झटका
अन्य उम्मीदवारों में प्रगतिशील जनता पार्टी के मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव को 950, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के तनवीर आलम को 847, भारतीय आम आवाम पार्टी के प्रदीप कुमार को 763, भारतीय जवान किसान पार्टी के बैजनाथ प्रसाद को 369, निर्दलीय अनिल दास को 308 और निर्दलीय सिकंदर कुमार को 261 मत मिले।
सबसे अहम बात यह है कि बांकीपुर न सिर्फ बीजेपी का गढ़ कहा जाता है, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की परंपरागत सीट भी है। नवीन ने पिछले वर्ष लगातार पांचवीं बार बांकीपुर विधानसभा सीट जीती थी। हालांकि, अप्रैल में राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इस उपचुनाव में पार्टी ने उनके बेहद करीबी नीरज को उम्मीदवार बनाया था। ऐसे में यहां से हार न सिर्फ बीजेपी के लिए बल्कि नितिन नवीन के लिए भी बड़ा झटका है।
"बीजेपी के अहंकार के लिए सबक"
किशोर की जीत को उनकी पार्टी से बाहर के कई नेताओं ने भी "बीजेपी के अहंकार के लिए सबक" करार दिया। इनमें जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी शामिल हैं। भाकपा (माले) लिबरेशन विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की सहयोगी पार्टी है।
1970 के दशक के जेपी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने कहा, "बांकीपुर के जनादेश को हाल के छात्र आंदोलनों में दिखी बीजेपी के प्रति व्यापक असंतोष की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। साथ ही प्रशांत किशोर को भी इसका श्रेय दिया जाना चाहिए, जिन्होंने असाधारण ऊर्जा और संगठनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया।"
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चुनाव के दिन दोनों पक्षों में कई जगह भिड़ंत हुई
आरजेडी के प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने भी उपचुनाव के परिणाम पर खुशी जताई। उनकी पार्टी अक्सर प्रशांत किशोर को बीजेपी की "बी टीम" बताती रही है। हालांकि, गगन ने कहा, "हमारे लिए यह अधिक महत्वपूर्ण है कि बीजेपी अपने गढ़ में पराजित हुई, बजाय इसके कि जीत किसकी हुई।"
इससे पहले 30 जुलाई को हुए मतदान से पहले कई दिनों तक प्रशांत किशोर और बीजेपी की ओर से जोरदार चुनाव प्रचार किया गया था। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगाए और इस संबंध में निर्वाचन आयोग का भी रुख किया। इसके बाद चुनाव के दिन भी दोनों पक्षों में कई जगह भिड़ंत भी हुई थी। इस दौरान प्रशांत ने पटना पुलिस पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था।
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