हम हैं कामयाब–3: ‘सपनों का घर’ बनने से पहले ‘स्मार्ट क्राफ्ट्स मॉडल सॉल्यूशंस’ कराए उस घर का दर्शन

नितेश कुमार का कहना है कि भौतिक मॉडल तैयार करते समय वे हर छोटे से छोटे विवरण और बारीकियों का विशेष ध्यान रखते हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति अपने ‘सपनों के घर’ को वास्तविक रूप में देख सके।

फोटो: नवजीवन
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तनवीर अहमद

2002 की बात है, जब 19 वर्ष का एक युवक प्रतिदिन फ़रीदाबाद स्थित अपने घर से लगभग 15 किलोमीटर साइकिल चलाकर संगम विहार एक रोचक आर्ट (कला) में निपुणता प्राप्त करने जाता था। उस समय उसे प्रतिदिन 35 रुपये मिलते थे। आज 24 वर्ष बाद वही युवक अपने क्षेत्र में एक दक्ष कलाकार बन चुका है और लगभग 30 लाख रुपये प्रतिवर्ष अपने स्थायी कर्मचारियों के वेतन पर ख़र्च करता है। एक साधारण कर्मचारी से सफल उद्यमी बनने का यह सफ़र निरंतर संघर्ष की प्रेरक कहानी है।

इस व्यक्ति का नाम नितेश कुमार है, जिन्होंने हरियाणा के फ़रीदाबाद में वर्ष 2017 में ‘स्मार्ट क्राफ्ट्स मॉडल सॉल्यूशंस’ (Smart Crafts Model Solutions) नाम से अपनी कंपनी का पंजीकरण कराया। यह कंपनी बड़े-बड़े भवनों और टाउनशिप के वास्तविक स्वरूप जैसा ही भौतिक मॉडल (फ़िज़िकल मॉडल) तैयार करती है। अर्थात, किसी आवासीय या व्यावसायिक भवन के निर्माण से पहले यदि बिल्डर या ख़रीदार उसका डिज़ाइन देखना चाहे, तो यह कंपनी उसका लघु प्रारूप अत्यंत आकर्षक रूप में तैयार कर प्रस्तुत करती है।


नितेश कुमार बताते हैं कि वे प्रारंभ से ही स्वयं का व्यवसाय करना चाहते थे। इस दिशा में उन्हें प्रेरणा अपने चाचा, स्वर्गीय राज कुमार जांगीड़ से मिली। राज कुमार एक कंपनी के लिए इमारतों के भौतिक मॉडल तैयार करते थे, जिससे नितेश अत्यंत प्रभावित हुए। चूंकि यह कार्य पारंपरिक व्यवसायों से अलग था, इसलिए इस कला को सीखने की प्रबल इच्छा उनके मन में जागी। स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2002 में नितेश ने ‘जे.के. मॉडलर’ नामक कंपनी से जुड़कर क्राफ्टिंग का कौशल सीखना प्रारंभ किया। वे हर सुबह घर से साइकिल लेकर ‘भौतिक मॉडल’ तैयार करने में निपुणता प्राप्त करने के जुनून के साथ संगम विहार पहुंच जाते थे। दो वर्षों की कठोर मेहनत के बाद उन्हें इस कला की बारीकियाँ समझ में आने लगीं।

वर्ष 2004 में उनकी मेहनत रंग लाई, जब ‘एब्ली ग्रुप्स’ ने उन्हें कर्मचारी के रूप में कार्य करने का अवसर दिया। यह कंपनी टाउनशिप, व्यावसायिक भवनों और स्थापत्य मॉडल (आर्किटेक्चरल मॉडल) तैयार करती थी। यहाँ उन्होंने अपने कौशल को और अधिक निखारा। लगभग 2 वर्ष बाद वे ‘सुरेश गोयल एसोसिएट्स’ से जुड़े, जहाँ स्थापत्य से जुड़े कई नए आयामों से परिचय हुआ। यहां भी लगभग 2 वर्षों का समय बीता और लोगों के भरपूर सहयोग ने कोई बड़ा क़दम उठाने की हिम्मत पैदा की। यही वह समय था जब नितेश कुमार के भीतर अपनी कंपनी स्थापित करने का आत्मविश्वास मज़बूत होने लगा। इसी दौरान उन्होंने अपने निजी संपर्कों के माध्यम से कुछ कंपनियों के लिए स्वतंत्र रूप से भौतिक मॉडल बनाना शुरू किया।


इस पूरे संघर्ष काल में नितेश कुमार को अपनी माता श्रीमती शकुंतला देवी और पिता श्री लख्मीचंद का निरंतर सहयोग और आशीर्वाद मिलता रहा। वर्ष 2009 में उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब उनका विवाह राधा शर्मा से हुआ। उन्हें एक ऐसी जीवनसंगिनी मिली, जिन्होंने प्रत्येक कठिन परिस्थिति में उनका संबल बढ़ाया और हिम्मत देकर क़दम को डगमगाने से रोका।

नितेश कुमार बताते हैं कि वर्ष 2011 में उन्होंने एक छोटी सी जगह लेकर 2-3 कर्मचारियों के साथ सीमित स्तर पर कार्य शुरू किया। इस यात्रा में कई बार ऐसा लगा कि अब आगे बढ़ना कठिन हो जाएगा। कंपनी की स्थापना के शुरुआती वर्षों में आर्थिक चुनौतियाँ सामने आईं, और कोरोना काल तो विशेष रूप से भयावह था। उस समय कई महीनों तक बिना काम के भी कर्मचारियों को वेतन देना पड़ा। परिवार ने ऐसे समय में बहुत सहयोग किया और किसी तरह वह कठिन समय बीत गया। वर्ष 2024 में भी एक समय ऐसा आया था जब 5-6 महीने तक कोई काम नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियाँ सुधरती चली गईं। वर्तमान में वे फ़रीदाबाद में ही एक बड़े कार्यालय में स्थानांतरित होने की तैयारी कर रहे हैं।

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इस प्रकार नितेश कुमार ने अपना बिज़नेस करने का जो सपना देखा था, वह साकार हो चुका है और अब वे सपने को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में जुटे हैं। अब तक वे देश भर की दर्जनों प्रतिष्ठित कंपनियों के लिए भौतिक मॉडल तैयार कर चुके हैं, जिनमें दिल्ली की ‘एम3एम’, ‘सिग्नेचर ग्लोबल’, ‘मास्टर्स इंफ्रा’, ‘एटीएस’, ‘हीरो होम्स’; मुंबई की ‘भूमि ग्रुप’, ‘गोदरेज प्रॉपर्टीज़’, ‘ब्रिगेड’; कोलकाता की ‘पीएस ग्रुप’, ‘मर्लिन ग्रुप’; तथा बेंगलुरु की ‘कॉनकॉर्डे’ और ‘श्रीराम प्रॉपर्टीज़’ प्रमुख हैं। भारत के बाहर की कुछ कंपनियों से भी बातचीत चल रही है, जिससे स्पष्ट है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाने की तैयारी में हैं।

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नितेश कुमार अपने इस सफ़र को संघर्षपूर्ण लेकिन स्मरणीय बताते हैं। उनका कहना है कि भौतिक मॉडल तैयार करते समय वे हर छोटे से छोटे विवरण और बारीकियों का विशेष ध्यान रखते हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति अपने ‘सपनों के घर’ को वास्तविक रूप में देख सके। नितेश हमेशा बिल्डर्स की आवश्यकताओं के साथ-साथ ख़रीदारों की भावनाओं को भी महत्व देते हैं। बड़े भवन को छोटे स्केल पर सटीक रूप से तैयार करना जितना चुनौतीपूर्ण है, उसकी सफलता उतनी ही संतुष्टि देती है।

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घर का मॉडल हो या कार्यालय का, नितेश प्रत्येक कार्य अपनी निगरानी में ही कराते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भौतिक मॉडल बनाने की लागत 50 हज़ार रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक हो सकती है, जो मॉडल के आकार, विवरण और जटिलता पर निर्भर करती है। निस्संदेह, नितेश कुमार प्रशंसा के पात्र हैं, जो किसी व्यक्ति के करोड़ों रुपये के ‘सपनों के घर’ का दर्शन घर बनने से पहले ही कुछ लाख रुपये में संभव बना देते हैं।

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