बंगाल चुनाव: टीएमसी ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, अधिकारियों की पक्षपातपूर्ण पोस्टिंग पर उठाए सवाल

डेरेक ओ'ब्रायन ने लिखा कुछ अधिकारियों की जानबूझकर और बार-बार एक ही जिले/उप-मंडल/प्रखंड में पोस्टिंग करना, जो भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी बाध्यकारी निर्देशों से स्पष्ट रूप से हटकर है। इससे पक्षपात और पक्षपातपूर्ण आचरण की उचित आशंका पैदा होती है।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पश्चिम बंगाल को पत्र लिखा। इस पत्र में ईसीआई के ट्रांसफर दिशानिर्देशों और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए अधिकारियों की बार-बार और पक्षपातपूर्ण पोस्टिंग के संबंध में शिकायत की गई है।

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने पत्र जारी कर कहा कि मैं अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की ओर से और उनकी तरफ से यह शिकायत पत्र लिख रहा हूं, ताकि आपके संज्ञान में एक अत्यंत गंभीर मामला लाया जा सके जो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करता है। यह मामला है- कुछ अधिकारियों की जानबूझकर और बार-बार एक ही जिले/उप-मंडल/प्रखंड में पोस्टिंग करना, जो भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी बाध्यकारी निर्देशों से स्पष्ट रूप से हटकर है। इससे पक्षपात और पक्षपातपूर्ण आचरण की उचित आशंका पैदा होती है।


पत्र में कहा गया है कि विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावों के संचालन से जुड़े अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग को नियंत्रित करने वाले अपने निर्देशों में विशेष रूप से यह अनिवार्य किया है कि अधिकारियों को उनके गृह जिलों में तैनात नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, यह भी निर्देश दिया गया है कि कोई भी जिला निर्वाचन अधिकारी/रिटर्निंग अधिकारी/सहायक रिटर्निंग अधिकारी/पुलिस निरीक्षक/उप-निरीक्षक या उससे ऊपर के पद का अधिकारी उसी विधानसभा क्षेत्र/जिले में वापस तैनात नहीं किया जाएगा, न ही उसे वहां बने रहने की अनुमति दी जाएगी, जहां वह पिछले विधानसभा चुनाव या निर्धारित अवधि के भीतर हुए किसी भी उपचुनाव के दौरान तैनात था। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके और स्थानीय प्रभाव या जान-पहचान की किसी भी गुंजाइश को समाप्त किया जा सके।

उन्होंने आगे कहा कि उपर्युक्त निर्देश इस मूलभूत सिद्धांत पर आधारित हैं कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए न केवल वास्तविक निष्पक्षता की आवश्यकता होती है, बल्कि पक्षपात की किसी भी उचित आशंका का अभाव भी आवश्यक है।

हालांकि, यह बात सामने आई है कि कुछ अधिकारी प्रखंड विकास अधिकारी अरिजीत गोस्वामी को एगरा-II, प्रखंड विकास अधिकारी सुभासिस मजूमदार को रामनगर-I और प्रखंड विकास अधिकारी शुभदीप धर को रामनगर-II में तैनात किया गया है। ये अधिकारी उसी विधानसभा क्षेत्र/जिले/उप-मंडल/प्रखंड में तैनात किए गए हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जहां उन्होंने पहले प्रशासनिक अधिकार का प्रयोग किया था और/या चुनावी कर्तव्यों का पालन किया था, जिसमें 2024 के लोकसभा चुनाव भी शामिल हैं और अब उन्हें फिर से चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।


इस तरह की पोस्टिंग का बार-बार होना महज एक संयोग नहीं है, बल्कि यह भारत के चुनाव आयोग के ऊपर बताए गए निर्देशों की भावना और जनादेश से साफ तौर पर भटकाव है। इन अधिकारियों का पहले से ही उसी भौगोलिक और प्रशासनिक माहौल में चुनाव कराने से जुड़ाव रहा है, इसलिए उन्हें दोबारा उसी जिले/उप-मंडल में तैनात नहीं किया जाना चाहिए था, क्योंकि इस तरह की निरंतरता से स्थानीय जान-पहचान बढ़ती है, उनका प्रभाव मजबूत होता है और यह लोकतांत्रिक रोटेशन (बदलाव) के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देता है।

आगे यह भी कहा जाता है कि बार-बार पोस्टिंग के इस तरीके को जब जमीनी स्तर की रिपोर्टों और आसपास के हालात के साथ मिलाकर देखा जाता है तो इससे एक वाजिब और सही आशंका पैदा होती है कि इन अधिकारियों को जान-बूझकर इसलिए रोका और तैनात किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें कुछ खास उम्मीदवारों के करीब और उनके प्रति झुकाव रखने वाला माना जाता है। ऐसी स्थिति निष्पक्षता के सिद्धांत की जड़ पर ही चोट करती है और एक असमान चुनावी माहौल बनाती है, जिससे चुनावी प्रक्रिया ही दूषित हो जाती है।

चुनाव आयोग के बाध्यकारी निर्देशों/दिशानिर्देशों की अनदेखी करते हुए इन अधिकारियों को जान-बूझकर रोके रखना और दोबारा तैनात करना, आदर्श आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन माना जाता है, क्योंकि यह चुनाव कराने में पक्षपातपूर्ण दखल को बढ़ावा देता है और इस प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर जनता के भरोसे को कमजोर करता है।


टीएमसी ने पत्र में मांग की है कि उन परिस्थितियों की तत्काल जांच शुरू की जाए, जिनके कारण इन अधिकारियों को उसी विधानसभा क्षेत्र/जिले/उप-मंडल/ब्लॉक में बार-बार तैनात किया गया और रोके रखा गया। इन अधिकारियों का तत्काल तबादला किया जाए और उनकी जगह निष्पक्ष अधिकारियों को तैनात किया जाए। चुनाव आयोग के तबादला और रोटेशन संबंधी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की सभी पोस्टिंग की एक व्यापक समीक्षा की जाए और स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के हित में, जो भी अन्य आदेश उचित और सही समझे जाएं, वे पारित किए जाएं।