महाराष्ट्र निकाय चुनाव को लेकर महा विकास अघाड़ी का बड़ा फैसला, संयुक्त रैलियां कर बीजेपी-शिंदे को घेरने का ऐलान

एमवीए नेताओं ने आज बताया कि तीनों दलों के शीर्ष नेता एकजुट होकर महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के संकट जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर जनता तक पहुंचेंगे और बताएं कि कैसे एकनाथ शिंदे और अन्य ने जून 2022 में एमवीए सरकार को गिराने के लिए बीजेपी के साथ सांठगांठ की थी।

फोटोः IANS
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नवजीवन डेस्क

महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने आगामी स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना-यूबीटी के शीर्ष नेताओं ने निकाय चुनाव से पहले प्रमुख चुनावी शहरों में कई संयुक्त रैलियां कर बीजेपी-शिंदे की पोल खोलने और अपनी एकजुटता दिखाने का ऐलान किया है।

यह कदम एमवीए के शीर्ष नेताओं के बीच गहन विचार-विमर्श के बाद आया है, जिसने पुणे में हाल ही में हुए कसबा पेठ उपचुनाव में बड़ी सफलता हासिल की। कसबा पेठ 3 दशक से बीजेपी का गढ़ माना जाता था। एमवीए नेताओं ने सोमवार को बताया कि तीनों दलों के शीर्ष नेता एकजुट होकर महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के संकट जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर जनता तक पहुंचेंगे और बताएं कि कैसे एकनाथ शिंदे और अन्य ने जून 2022 में एमवीए सरकार को गिराने के लिए बीजेपी के साथ सांठगांठ की थी।


एमवीए की प्रस्तावित रैलियों में से पहली रैली 2 अप्रैल को छत्रपति संभाजीनगर में और उसके बाद 16 अप्रैल को नागपुर में होगी। 1 मई को महाराष्ट्र दिवस उत्सव के साथ मुंबई में, 14 मई को पुणे में, 28 मई को कोल्हापुर में और 3 जून को नासिक में एक बड़ी सार्वजनिक रैली की योजना है।

एमवीए नेताओं ने कहा कि तीनों पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को आपसी सम्मान के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करेंगी और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और सत्तारूढ़ सहयोगी बीजेपी को चुनाव में जाने वाली विभिन्न सिविल बॉडीज को उखाड़ फेंकने के लिए ताकत का प्रदर्शन करेंगी।

निकाय चुनाव से पहले क्षेत्रीय मुख्यालयों में इन आगामी रैलियों के बाद तीनों पार्टियां 2023 के मध्य से जिला स्तर पर और राज्य के दूरदराज के हिस्सों में इसी तरह की बैठकें आयोजित करने की योजना बनाएंगी, जिससे 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव प्रक्रिया को गति मिल सके।

एमवीए नेताओं जैसे उद्धव ठाकरे, शरद पवार, विधानसभा में विपक्ष के नेता अजीत पवार, परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे, एनसीपी के राज्य प्रमुख जयंत पाटिल, नाना पटोले, छगन भुजबल, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, अशोक चव्हाण और अन्य ने पिछले कुछ दिनों में इन पहलुओं पर विचार-विमर्श किया है।

गौरतलब है कि एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, शिवसेना-यूबीटी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले और अन्य ने पुणे में जीत का उदाहरण दिया है कि अगर विपक्ष एकजुट होकर काम करता है तो बीजेपी और उसके सहयोगियों को कैसे हराया जा सकता है।

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