सुदर्शन टीवी पर सुप्रीम कोर्ट का डंडा, संपादक को लगाई लताड़, कहा- कार्यक्रम मुसलमानों को बदनाम करने की मंशा वाला

सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन टीवी के उस कार्यक्रम पर रोक लगा दी जिसमें यूपीएससी परीक्षाओं में मुसलमानों के प्रवेश पर सवाल उठाए गए थे। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम की मंशा मुसलमानों को कलंकित करने की है।

सुप्रीम कोर्ट/ फाइल फोटो
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नवजीवन डेस्क

अपने कार्यक्रम के जरिए देश में नफरत और सांप्रदायिकता का जहर फैलाने की कोशिश करने वाले सुदर्शन टीवी को सुप्रीम कोर्ट का डंडा पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस चैनल के उस शो पर रोक लगा दी है जिसमें यूपीएससी में मुस्लिम छात्रों के प्रवेश पर सवाल उठाए गए थे और जामिया जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने चैनल के संपादक को भी लताड़ लगाई है। कोर्ट ने कहा कि, “यह कार्यक्रम एक विशेष समुदाय को बदमान करने की बेहद कपटपूर्ण साजिश वाला है।” कोर्ट ने कहा कि विशेष समुदाय के नागरिक भी एक ही परीक्षा से गुजरते हैं और एक ही पैनल को इंटरव्यू देते हैं। कोर्ट के मुताबिक, “यह यूपीएससी परीक्षा पर भी सवाल उठाता है। हम इन मुद्दों से कैसे निपटें? क्या इसे बरदाश्त किया जा सका है?” सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चंद्रचूड़ ने आश्चर्य दताते हुए कहा कि, यह कैसे इतना कट्टर हो सकता है। एक समुदाय को निशाना बनाना जो सिविल सेवा में शामिल हो रहा है।“

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह उन्माद पैदा करने वाला कार्यक्रम है। कोर्ट ने एक पांच सदस्यीय कमेटी गठित करने को कहा। यह कमेटी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कुछ मानक तय करेगी। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि, “हम देश की सबसे बड़ी अदालत होने के नाते आपको यह कहने की इजाजत नही दे सकते कि मुस्लिम नागरिक सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं।” अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस इन्दु मल्होत्रा और जस्टिस के एम जोसेफ की बेंच ने सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि मीडिया में स्व नियंत्रण की व्यवस्था होनी चाहिए। इस टीवी कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया गया था कि सरकारी सेवा में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की घुसपैठ की साजिश का पर्दाफाश किया जा रहा है। पीठ ने इस कार्यक्रम के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि कुछ मीडिया हाउस के कार्यक्रमों में आयोजित होने वाली बहस चिंता का विषय है क्योंकि इसमें हर तरह की मानहानि कारक बातें कहीं जा रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि, ऐसा लगता है कि इस कार्यक्रम का विशेष मकसद मुस्लिम समुदाय को कलंकित करना है। कोर्ट ने कहा, “हम केबल टीवी एक्ट के तहत तय प्रोग्राम कोड के पालन को सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं एक स्थिर लोकतांत्रिक समाज की इमारत और अधिकारों और कर्तव्यों का सशर्त पालन समुदायों के सह-अस्तित्व पर आधारित है। किसी समुदाय को कलंकित करने के किसी भी प्रयास से निपटा जाना चाहिए। हमारी राय है कि हम पांच प्रतिष्ठित नागरिकों की एक समिति नियुक्त करें जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कुछ मानकों को सामने रखे। हम कोई राजनीतिक विभाजनकारी प्रकृति नहीं चाहते हैं, और हमें ऐसे सदस्यों की आवश्यकता है जो प्रशंसनीय कद के हों।“

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि याचिका में संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर अहम सवाल उठाए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के मौलिक अधिकार के साथ, अदालत को ऐसे स्वत: तय मानकों की स्थापना और एक विचारशील बहस को बढ़ावा देने की जरूरत है।

सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पत्रकारों की स्वतंत्रता सर्वोच्च है और प्रेस को नियंत्रित करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक होगा। सुदर्शन टीवी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने पीठ से कहा कि चैनल इसे राष्ट्रहित में एक खोजी खबर मानता है। इस पर कोर्ट ने दीवान से कहा कि आपका मुवक्किल देश का नुकसान कर रहा है और वह नहीं स्वीकार कर रहा कि भारत विविधता भरी संस्कृति वाला देश है। आपके मुवक्किल को अपनी आजादी के अधिकार का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए।

‘न्यूज चैनलों के साथ समस्या टीआरपी की’

कोर्ट ने सुदर्शन टीवी के वकील से कहा कि देश के देश की सबसे बड़ी अदालत के तौर पर हम आपको यह कहने की अनुमति नहीं दे सकते कि मुस्लिम नागरिक सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं। आप यह नहीं कह सकते कि पत्रकारों को यह करने की पूर्ण स्वतंत्रता है। इस दौरान जस्टिस जोसेफ ने कहा, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ समस्या टीआरपी के बारे में है और इस तरह अधिक से अधिक सनसनीखेज हो जाता है तो कई चीजें अधिकार के रूप में सामने आती हैं।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यह तर्क दिया गया है कि यह कार्यक्रम देश में घृणास्पद भाषण का केंद्र बिंदु बन गया है। उन्‍होंने कहा, ‘लोग शायद आज अखबार नहीं पढ़ते, लेकिन टीवी देखते हैं। फिर स्थानीय भाषाओं में स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं की पहुंच मुख्यधारा के अंग्रेजी अखबारों से ज्यादा है। टीवी देखने का एक मनोरंजन मूल्य है जबकि समाचार पत्र के पास कोई नहीं है। इसलिए हम मानक रखना चाहते हैं। इस दौरान जस्टिस जोसेफ ने कहा कि प्रोग्राम कोड के नियम 6 में कहा गया है कि केबल टीवी कार्यक्रम कुछ भी ऐसा नहीं दिखा सकते हैं जो किसी विशेष धर्म या समुदाय को लक्षित करता है।

ध्यान रहे कि इससे पहले 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने शो का प्रसारण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन और सुदर्शन न्यूज को नोटिस जारी किए थे। वहीं मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों और पूर्व छात्रों के एक समूह द्वारा दायर याचिका पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय को कार्यक्रम कोड के कथित उल्लंघन के लिए चैनल को भेजे गए नोटिस पर निर्णय लेने के लिए कहा था।

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