बिहार: 7 खून का आरोपी मुख्यमंत्री और बेगुनाह जेल में? तेजप्रताप की गिरफ्तारी पर रोहिणी आचार्य का बड़ा हमला!
तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी पर उनकी बहन रोहिणी आचार्य भड़क गईं हैं। उन्होंने कहा कि ये कैसा न्याय है, जिसमें सात खून का आरोपी मुख्यमंत्री बन जाता है और देश के युवा भविष्य के लिए आवाज उठानेवाले , संघर्ष करने वाले बेगुनाह को झूठे आरोपों में फंसा कर जेल भेज दिया जाता है ?

नीट पेपर लीक मामले में छात्र आंदोलन में शामिल हुए जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। तेजप्रताप यादव की बहन रोहिणी आचार्य भड़क गईं हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी सम्राट सरकार की तानाशाही . ..बिहार के मुख्यमंत्री से पूछता है बिहार.. क्या शिक्षा - व्यवस्था को सुधारने की मांग के साथ जारी छात्रों - युवाओं के आंदोलन , प्रदर्शन को समर्थन देना अपराध है ?
उन्होंने कहा कि सम्राट सरकार की पुलिस के द्वारा तथ्यहीन और झूठे आरोपों में तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार किया जाना साफ़ तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है l छात्रों , युवाओं और जनता की समस्याओं के लिए आवाज उठाना हर भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार एवं दायित्व है और अपने इसे अधिकार एवं दायित्व का निर्वहन करने की ऐवज में बदले की भावना से गिरफ़्तारी की गयी है तेज प्रताप यादव की l
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए गिरफ्तार किया जाना स्पष्ट तौर पर सरकार के खिलाफ उभरे असंतोष को दबाने की दमनात्मक तानाशाही कार्रवाई का हिस्सा है और सम्राट सरकार प्रशासन एवं पुलिस बल का दुरूपयोग कर राजनीतिक विरोधियों को डराने और जन आंदोलनों के प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि ये कैसा न्याय है .. ये कैसा चलन है .. ये कैसी रीत है .. जिसमें सात खून का आरोपी मुख्यमंत्री बन जाता है और देश के युवा भविष्य के लिए आवाज उठानेवाले , संघर्ष करने वाले बेगुनाह को झूठे आरोपों में फंसा कर जेल भेज दिया जाता है ?
इससे पहले रोहिणी आचार्य ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछारों के इस्तेमाल को 'दुखद' और 'निंदनीय' बताया था। रोहिणी आचार्य ने कहा था कि लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के माध्यम से अपनी चिंताओं को उठाने का संवैधानिक अधिकार है।
उन्होंने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान देने के बजाय बलपूर्वक असहमति को दबाने का प्रयास किया, जिसे उन्होंने तानाशाही मानसिकता का प्रतिबिंब बताया था।
