बिहारः संकट में कुशावाहा के बेटे दीपक का मंत्री पद, सुप्रीम कोर्ट दोबारा मंत्री बनाने के खिलाफ करेगा सुनवाई

दीपक प्रकाश को सम्राट चौधरी सरकार में पंचायती राज मंत्री बनाया गया है। हालांकि, वह न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं। इससे पहले भी नवंबर 2025 में बनी नीतीश सरकार में दीपक प्रकाश बिना किसी सदन के सदस्य होते हुए मंत्री बने रहे थे।

बिहारः संकट में कुशावाहा के बेटे दीपक का मंत्री पद, सुप्रीम कोर्ट दोबारा मंत्री बनाने के खिलाफ करेगा सुनवाई
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बिहार की एनडीए सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी खतरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री नियुक्त करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है और इस मामले में बिहार सरकार और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किया है।

दीपक प्रकाश को हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नीत मंत्रिमंडल में पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया था। हालांकि, वह न तो बिहार विधानसभा और न ही राज्य विधान परिषद के सदस्य हैं। इससे पहले भी नवंबर 2025 में बनी नीतीश सरकार में भी दीपक प्रकाश बिना किसी सदन के सदस्य होते हुए मंत्री बने रहे थे।

बिना किसी सदन की सदस्यता के दीपक प्रकाश को बार-बार मंत्री बनाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता से सवाल किया, ‘‘मौजूदा स्थिति क्या है?’’


इसके जवाब में अधिवक्ता ने कहा कि दीपक प्रकाश इस समय भी मंत्री हैं। पीठ ने इसके बाद याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाए।’’ उच्चतम न्यायालय ने याचिका पर बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया है। पीठ ने मामले की सुनवाई जुलाई में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, जब आंशिक कामकाज के दिनों के बाद शीर्ष न्यायालय सामान्य रूप से काम करना शुरू करेगा।

याचिका में दलील दी गई है कि दीपक प्रकाश को 20 नवंबर, 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था, जबकि वह न तो बिहार विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य थे। इसके बाद 7 मई, 2026 को दीपक प्रकाश को सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री के तौर पर फिर से नियुक्त किया गया, जबकि वह न तो बिहार विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं।


याचिका में संविधान के अनुच्छेद 164 (4) का हवाला दिया गया है, जो कहता है कि ‘कोई मंत्री, जो निरंतर छह महीने की अवधि तक राज्य विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा।’’ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश का मंत्री पद अब खतरे में है।

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